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वर्षाको आवाज सुनेर जाग्छन् माटोमुनिका बीउ – Online Khabar

वर्षा की आवाज़ मिट्टी के नीचे मौजूद बीजों को अंकुरित होने का संकेत देती है

सांकेतिक छवि। एमआईटी के वैज्ञानिकों ने यह नई खोज की है कि वर्षा की आवाज़ मिट्टी के नीचे मौजूद बीजों को अंकुरित होने का संकेत देती है। अध्ययन में पाया गया कि धान के बीज वर्षा की आवाज़ सुनने के बाद 30 से 40 प्रतिशत तेजी से अंकुरित होते हैं। बीजों के अंदर मौजूद स्टैटोलिथ नामक कण वर्षा की आवाज़ से उत्पन्न कंपन को महसूस कर सही समय पर अंकुरित होने का निर्णय लेते हैं।

क्या मिट्टी के अंदर दफन बीज आसमान से गिरने वाली वर्षा की आवाज़ सुन सकते हैं? यह सवाल किसी कल्पनिक कहानी जैसा हो सकता है, लेकिन हालिया वैज्ञानिक शोध ने इस तथ्य की पुष्टि की है। अमेरिकी प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थान एमआईटी के वैज्ञानिकों ने यह रोचक खोज की है। वैज्ञानिकों के अनुसार जब वर्षा की पहली बूंद सूखी मिट्टी पर गिरती है, तो वह आवाज मिट्टी के नीचे मौजूद बीजों तक पहुँचती है और सूक्ष्म अवस्था में मौजूद बीज इस संकेत से जागने लगते हैं।

वर्षा की वह आवाज़ उनके लिए जीवन शुरू करने का संकेत बन जाती है। अध्ययन में विशेष रूप से दिखाया गया कि धान के बीज वर्षा की आवाज़ सुनने के 30 से 40 प्रतिशत तेज अंकुरित होते हैं। यानी वर्षा की टप-टप की आवाज़ उनके सामान्य समय से कहीं जल्दी बढ़ने में मदद करती है। इस खोज ने पौधों को निर्जीव और चेतना विहीन मानने की धारणा को गलत साबित किया है।

वैज्ञानिकों के अनुसार बीज केवल नमी और पानी का इंतजार नहीं करते, बल्कि वे अपने आसपास के पर्यावरण को महसूस करते हैं और उसी आधार पर अंकुरित होने के सही समय का निर्णय लेते हैं। तो बीज वर्षा की आवाज़ कैसे सुनते हैं? जब वर्षा की बूंदें मिट्टी या पानी पर गिरती हैं, तो ध्वनि तरंगें उत्पन्न होती हैं। ये तरंगें मिट्टी और पानी में कंपन पैदा करती हैं, जिसे बीज महसूस कर सकते हैं।

वैज्ञानिक कहते हैं कि बीजों के अंदर स्टैटोलिथ नाम के छोटे कण होते हैं, जो स्टार्च से बने होते हैं। वर्षा की आवाज़ से उत्पन्न कंपन इन स्टैटोलिथ कणों को हिलाते हैं, जिससे बीज को संकेत मिलता है कि पर्याप्त पानी आने की संभावना है और पर्यावरण अंकुरण के लिए अनुकूल है। इसी कारण से बीज तेजी से अंकुरित होने लगते हैं। शोधकर्ताओं ने इस खोज को प्रमाणित करने के लिए लगभग 8 हजार प्रकार के धान के बीजों पर परीक्षण किया था।

कुछ बीजों को साधारण ठंडे और नम वातावरण में रखा गया जबकि कुछ पर वर्षा जैसी आवाज़ और बूंदों का असर पैदा किया गया। इसके परिणाम बहुत रोचक रहे। जिन बीजों को वर्षा की आवाज़ सुनाई गई, वे 30-40 प्रतिशत तेजी से अंकुरित हुए। वैज्ञानिकों के अनुसार पानी में ध्वनि तरंगें बेहतर फैलती हैं, इसलिए पानी या ठंडी मिट्टी में मौजूद बीज इस आवाज़ को बेहतर महसूस कर पाते हैं।

यह अध्ययन इस बात को दर्शाता है कि पौधे हमारी सोच से कहीं अधिक बुद्धिमान और संवेदनशील हैं तथा वे केवल प्रकाश, पानी और मिट्टी पर निर्भर नहीं करते, बल्कि आवाज़ और कंपन को भी महसूस कर सकते हैं। याद रहे, इससे पहले के शोधों ने भी यह पाया था कि कुछ पौधे सुन सकते हैं। उदाहरण के लिए कुछ पौधे कीड़ों के पत्ते खाने की आवाज सुन कर अपने पत्तों में विषाक्त रसायन पैदा करते हैं। कुछ पौधे छूने पर बंद हो जाते हैं, कुछ गंध के प्रति प्रतिक्रिया करते हैं। अब इसमें वर्षा की आवाज़ भी जुड़ गई है। इसलिए वर्षा की टप-टप की आवाज़ केवल हमारे मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि मिट्टी के नीचे छिपे बीजों के लिए जीवन का संदेश भी है।

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