
कानूनी सुधार एवं पूर्वाधार निर्माण में तेजी लाने की नीति
समाचार सारांश
संपादकीय समीक्षा के तहत।
- सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष 2083/84 में पूर्वाधार विकास को तेज करने के लिए कानूनी सुधार और निर्माण कार्यों को तेजी से पूरा करने की नीति अपनाई है।
- हुलाकी, पुष्पलाल, उत्तर–दक्षिण राजमार्गों की स्तरोन्नति और राष्ट्रीय सड़क नेटवर्क के विस्तार को प्राथमिकता दी जाएगी।
- सड़क दुर्घटना कम करने के लिए GPS ट्रैकिंग, AI आधारित ट्रैफिक कैमरे और डिजिटल जुर्माना प्रणाली लागू करने की योजना है।
28 वैशाख, काठमांडू – सरकार ने पूर्वाधार विकास में तेजी लाने हेतु कानूनी सुधारों और निर्माण कार्यों में तेजी लाने की नीति अपनाई है।
राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने सोमवार को संघीय संसद की संयुक्त बैठक में आगामी आर्थिक वर्ष 2083/84 की नीति तथा कार्यक्रम प्रस्तुत करते हुए इस दिशा में स्पष्ट संकेत दिए।
नीति एवं कार्यक्रम में पूर्वाधार विकास को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री डिलिवरी यूनिट को मजबूत कर मिशन मोड में क्रियान्वयन करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सार्वजनिक परिवहन और सड़क संबंधित कानूनों में संशोधन करने का निर्णय लिया गया है।
बड़े परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए संपूर्ण प्रणाली और इंजीनियरिंग मानकों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा, जो नीति एवं कार्यक्रम में भी उल्लेखित है।
सरकार सड़क, रेल, जल, रोपवे और हवाई यातायात सहित एकीकृत राष्ट्रीय यातायात गुरुयोजना तैयार करने में लगा है। इसी के साथ पूर्वाधार से जुड़े विवादों का त्वरित निराकरण करने के लिए ‘लगानी एक्सप्रेस’ अवधारणा के अनुरूप व्यवस्था की जाएगी।
बड़े सड़क पूर्वाधार पर विशेष ध्यान
आगामी वर्ष में बड़े सड़क पूर्वाधार परियोजनाओं को गति देने की तैयारी है। हुलाकी, पुष्पलाल, उत्तर–दक्षिण राजमार्गों के स्तरोन्नति और राष्ट्रीय सड़क नेटवर्क के विस्तार को तीव्र किया जाएगा।
काठमांडू-मधेस द्रुतमार्ग और इससे जुड़ी लिंक सड़क जल्द पूरा करने का लक्ष्य नीति एवं कार्यक्रम में रखा गया है। सभी स्थानीय इकाइयों को पूरे वर्ष संचालित किए जा सकने वाले सड़क नेटवर्क से जोड़ने की योजना भी राष्ट्रपति पौडेल ने बताई।
सरकार हवाई पूर्वाधार का विस्तार करेगी और अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डों का पूर्ण संचालन तथा आधुनिकीकरण कर विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी हवाई सेवाएँ प्रदान करने की योजना बना रही है।
बड़ी रेलमार्ग परियोजनाएं जारी
नीति एवं कार्यक्रम में बड़ी रेलमार्ग परियोजनाओं को भी शामिल किया गया है। पूर्व-पश्चिम विद्युत रेलमार्ग निर्माण जारी रखा जाएगा तथा केरूंग-काठमांडू और रक्सौल-काठमांडू रेल मार्ग के निवेश मॉडल का अध्ययन आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार दिगो और प्रतिस्पर्धी यातायात प्रणाली विकसित करना चाहती है।
सड़क दुर्घटना कम करने में तकनीकी उपाय
सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए GPS ट्रैकिंग, AI आधारित ट्रैफिक कैमरे, डिजिटल जुर्माना प्रणाली और गति नियंत्रण कड़े तरीके से लागू करने की नीति लागू की जाएगी। पैदल चलने वालों और साइकिल सवारों के लिए सुरक्षित पूर्वाधार बनाए जाने और सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करने का प्रावधान भी है।
काठमांडू में बस रैपिड ट्रांजिट (BRT) के विस्तृत डिजाइन को तैयार कर कार्यान्वयन शुरू करने की भी योजना नीति में शामिल है।
विद्युतीय मास ट्रांजिट प्रणाली विकास
सरकार ने सार्वजनिक यातायात सुधार हेतु विद्युतीय मास ट्रांजिट प्रणाली का विकास करने की भी योजना प्रस्तुत की है। पर्यटन क्षेत्रों में सड़क पहुंच, राजमार्ग स्तरोन्नति, वैकल्पिक मार्ग और सेवा केंद्र विकसित कर स्थानीय आर्थिक मजबूती को बढ़ावा देने की घोषणा भी की गई है।
शहरी पूर्वाधार पर जोर
सरकार कमजोर सूचकांक वाले नगरपालिकाओं को प्राथमिकता देते हुए वृहत शहरी विकास कार्यक्रम लागू करने की योजना बना रही है।
एकीकृत कूड़ा प्रबंधन प्रणाली विकसित कर कूड़ा संग्रह, प्रसंस्करण और पुन: उपयोग के लिए आवश्यक नीतिगत और कानूनी व्यवस्थाएं की जाएंगी। मध्य पहाड़ी लोकमार्ग के आसपास नए शहरों को पहचानयुक्त शहर के रूप में विकसित करने के लिए भू-उपयोग, पूर्वाधार तथा स्थानीय आर्थिक संभावनाओं के साथ जोड़ने की योजना भी बनाई गई है।

आवास वंचित, सीमांत और विपन्न तथा आपदा प्रभावित समुदायों के लिए किफायती और सुविधाजनक आवास योजना कार्यान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है।
क्षतिग्रस्त संरचनाओं के पुनर्निर्माण पर ध्यान
सरकार ने जेनेरिक आंदोलन और जाजरकोट भूकंप से प्रभावित संरचनाओं के पुनर्निर्माण को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। राष्ट्रीय भवन संहिता को सभी नए निर्माणों में अनिवार्य किया जाएगा, जिसमें भूकंपरोधी, अग्नि सुरक्षा तथा आधुनिक पूर्वाधार मानक सम्मिलित होंगे।
छिटपुट और जोखिम वाले बस्तियों का संगठित प्रबंधन भू-उपयोग, पूर्वाधार और सामुदायिक सेवाओं सहित एकीकृत परियोजना रूप में नीति तथा कार्यक्रम में सम्मिलित है।
पीने के पानी की योजनाएं
सरकार ने बड़े और अधूरे पेयजल परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने पर जोर दिया है। 2087 साल तक सभी नागरिकों को स्वच्छ जल और बुनियादी स्वच्छता सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
तराई-मधेस इलाकों में आर्सेनिक मुक्त पानी, डिप बोरिंग एवं सतही जल प्रणाली का विकास नीति एवं कार्यक्रम में उल्लेखित है। नदियों और नालों को साफ करने के लिए गंदा पानी प्रबंधन प्रणाली लागू करने की योजना भी है।
स्रोतों का प्रभावी प्रबंधन
पूर्वाधार के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने हेतु वैकल्पिक विकास वित्त, प्रवासी पूंजी और निजी निवेश को परिचालित कर नया पूर्वाधार वित्त मॉडल लागू करने की योजना है।
विदेशी सहायता, ऋण और निजी क्षेत्र के निवेश को उच्च लाभ देने वाली परियोजनाओं पर केंद्रित करने की नीति भी शामिल है। परिवर्तनकारी परियोजनाओं को स्पष्ट लक्ष्य, सुनिश्चित बजट और कड़ी समय सीमा के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।