
रूबी खान १८ दिनों से आमरण अनशन पर, न्याय की मांग जारी
अधिकारकर्मी रूबी खान १८ दिनों से बाँके में निर्मला कुर्मी मामले सहित विभिन्न महिला हिंसा मामलों में न्याय की मांग करते हुए आमरण अनशन पर हैं। पुलिस ने वैशाख १५ को धरने पर बैठी महिला अधिकारकर्मियों को जबरन उठाकर हिरासत में ले लिया था। रूबी ने ९ बिंदुओं की मांग रखते हुए न्याय के लिए आंदोलन किया है और उनकी स्वास्थ्य स्थिति कमज़ोर होती जा रही है।
१ जेठ, काठमांडू। १८ दिनों से अधिकारकर्मी रूबी खान आमरण अनशन पर बनी हुई हैं। निर्मला कुर्मी सहित विभिन्न महिला हिंसा मामलों में न्याय की मांग करते हुए शांतिपूर्ण धरना देती हुईं वह और अन्य अधिकारकर्मी पुलिस द्वारा जिले प्रशासन बाँके कार्यालय के सामने से जबरन उठाकर हिरासत में लिए जाने के विरोध में वैशाख १५ से आमरण अनशन शुरू कर चुकी हैं।
महिला अधिकार मंच की केंद्रीय सदस्य और बाँके जिला अध्यक्ष सकिना साह के अनुसार, महिला अधिकारकर्मी वैशाख १२ से रोजाना दोपहर ३ बजे से ५ बजे तक जिला प्रशासन कार्यालय के सामने धरना दे रही थीं। उन्होंने बताया कि पुलिस ने १५ तारीख को बैनर हटा लिया, धरना न देने को कहा तथा उन्हें हिरासत में ले लिया। उसी दिन इन महिलाओं के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया।
गिरफ्तारी वारंट में उल्लेख है, ‘आप पर सार्वजनिक शांति भंग करने का अपराध होने के कारण तत्काल गिरफ्तारी आवश्यक है इसलिए यह गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है।’ लेकिन उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई उपद्रव नहीं किया था। ‘हम लोग शांतिपूर्वक धरने पर थे, कोई हिंसा नहीं हुई,’ साह ने कहा, ‘फिर भी शांति व्यवस्था भंग करने का आरोप लगाया गया है।’
रूबी के गिरफ्तारी वारंट जारी होने पर सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना हो रही है। पूर्वपत्रकार और व्यापक नागरिक आंदोलन के कार्यकर्ता नारायण वाग्ले ने सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री बालेन शाह को निशाना बनाते हुए कहा कि संसद को न सुनने के बाद अब सड़क को भी दबाने की कोशिश की जा रही है, जो रूबी की गिरफ्तारी का विरोध है।
‘नागरिक अधिकारकर्मी रूबी खान पर गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ है। उन पर सार्वजनिक शांति के खिलाफ होने का आरोप है। नेपालगंज की यह अधिकारकर्मी पिछले वर्षों से पुलिस की छानबीन की मांग करते आ रही हैं, क्या उनकी गिरफ्तारी से न्याय की मांग खत्म हो जाएगी?’ उन्होंने फेसबुक पर पूछा, ‘संसद को न सुनो, और अब क्या सड़कों को भी दबाओ?’
अनशनरत रूबी खान का स्वास्थ्य क्रमशः खराब हो रहा है। फोन संपर्क में रहने वाली खान ने भी कहा कि अनशन के कारण उनकी सेहत कमजोर हो रही है।
सकिना साह के अनुसार, इस मुद्दे पर रूबी सहित महिलाएँ अब तक छठी बार आंदोलन में उतरी हैं और यह उनका चौथा आमरण अनशन है। पूर्व के आंदोलनों के बाद सरकार कई बार समझौता कर चुकी है, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया, इसलिए इस बार रूबी ने पुनः आमरण अनशन का रास्ता चुना है।