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सरकार लगभग साढ़े 11 हजार अस्थायी पदों की पुनर्समीक्षा करने जा रही है

समाचार सारांश

  • सरकार ने संगठन और प्रबंधन सर्वेक्षण किए बिना दो साल पहले जोड़े गए 11,495 अस्थायी पदों की पुनर्समीक्षा करने का निर्णय लिया है।
  • महालेखा परीक्षक की 63वीं वार्षिक रिपोर्ट ने संघीय स्तर पर कर्मचारी पदों की विस्तार से पुनर्समीक्षा करने और सेवा प्रदान करने वाले स्थानों पर उचित प्रबंधन का सुझाव दिया है।
  • सरकार 22 से 18 मंत्रालयों की संख्या घटाकर विभिन्न एजेंसियों में सचिव और सह सचिव स्तर के पदों की पुनर्समीक्षा करने की तैयारी कर रही है।

10 जेठ, काठमांडू। सरकार संगठन और प्रबंधन सर्वेक्षण किए बिना ही दो साल पहले जोड़े गए लगभग 11,495 अस्थायी कर्मचारी पदों की पुनर्समीक्षा करने जा रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय इन पदों की आवश्यकता पर जांच कर रहा है।

निजामती लेखाकार खाते की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, देश में तीन स्तरों पर कुल 86,485 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से लगभग आधे अर्थात 41,330 कर्मचारी संघीय स्तर पर कार्यरत हैं।

प्रदेश स्तर पर 13,115 और स्थानीय स्तर पर 32,075 कर्मचारी कार्यरत हैं। पिछले पांच वर्षों में इन तीनों स्तरों पर कर्मचारी संख्या 2,000 से घटने के बावजूद संघीय स्तर पर कर्मचारी संख्या लगभग स्थिर बनी हुई है।

वर्ष 2075 में कर्मचारी समायोजन के समय संघीय स्तर पर 48,500 कर्मचारी पद थे। पिछले सात वर्षों में संघीय स्तर पर पदों की संख्या में 3,175 की वृद्धि हुई है।

सिर्फ यही नहीं, लगभग 11,000 अस्थायी पद भी जोड़े गए हैं, जिन्हें महालेखा परीक्षक ने प्रक्रियागत रूप से अनुचित बताया है।

‘मंत्रालय ने निजामती सेवा अधिनियम के तहत संगठन और प्रबंधन सर्वेक्षण किए बिना आर्थिक वर्ष 2081/82 में 11,495 अस्थायी पद स्वीकृत किए हैं,’ महालेखा परीक्षक ने कहा, ‘तीनों स्तरों के लिए पदों की बढ़ोतरी या कमी के लिए सुव्यवस्थित प्रक्रिया आवश्यक है।’

सरकार ने हाल ही में मंत्रालयों की संख्या 22 से घटाकर 18 कर दी है, लेकिन सचिव से लेकर उपसचिव स्तर तक के कर्मचारियों की संख्या में कमी नहीं आई है। कर्मचारी प्रबंधन के लिए एक ही मंत्रालय में दो प्रशासनिक महाशाखाओं का होना जरूरी हो गया है।

प्रधानमंत्री बालेन शाह के सचिवालय के एक कर्मचारी ने कहा, ‘शुरुआत में एक मंत्रालय में दो सचिव रखने का विचार था। बाद में कुछ को प्रदेश स्तर पर भेजने पर भी विचार हुआ। अगले तीन महीनों में 7-8 सचिव सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जिनके स्थानांतरण या पदस्थापन पर निर्णय लेना होगा। इस सप्ताह कुछ निर्णय हो सकता है।’

सरकार गठन के बाद जारी 100 बिंदु कार्ययोजना में एक महीने में मंत्रालयों की संख्या कम करने और पद प्रबंधन का प्रावधान था।

इसके लिए सरकार ने पुनर्संरचना प्रबंधन सचिवालय स्थापन का निर्णय लिया और कार्यदल बनाकर काम जारी रखा है।

प्रधानमंत्री कार्यालय के सचिव किरणराज शर्मा के नेतृत्व वाले कार्यदल की रिपोर्ट के आधार पर कुछ सार्वजनिक निकायों के विलय और परिसमापन की प्रक्रिया जारी है। उद्योग एवं पर्यटन समेत कई मंत्रालयों के अंतर्गत एजेंसियों का भी प्रबंधन किया जा रहा है।

हालांकि मंत्रालयों की संख्या कम हुई है, लेकिन संघीय स्तर पर निजामती कर्मचारियों की संख्या घटाने का ठोस कदम अभी तक नहीं उठाया गया है। कर्मचारियों के नेतृत्व में कार्यदल को इस कार्य में जटिलता आ रही है और राजनीतिक स्तर पर निर्णय आवश्यक माना जा रहा है।

पिछले सप्ताह जारी महालेखा परीक्षक की 63वीं वार्षिक रिपोर्ट ने सुझाव दिया कि संघीय स्तर के कर्मचारियों का समुचित और समानुपातिक पुनर्समीक्षा कर सेवा प्रदान करने के स्थानों पर उचित प्रबंधन किया जाए।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘संघीय स्तर पर अत्यधिक कर्मचारी होने के कारण सेवा और जनशक्ति के संतुलन के लिए वार्षिक पदों की विस्तृत पुनर्समीक्षा आवश्यक है।’

यदि किसी स्तर या सेवा में कर्मचारी संख्या अधिशेष हो तो सेवा क्षेत्र परिवर्तन कर अन्यत्र स्थानांतरण करने के कानूनी प्रावधान किए जाने चाहिए, यह भी रिपोर्ट में उल्लेखित है।

सार्वजनिक संस्थाओं, आयोगों, बोर्डों और प्रतिष्ठानों की जनशक्ति को अधिक कुशल और तकनीकी अनुकूल बनाने के सुझाव भी दिये गए हैं।

महालेखा परीक्षक ने सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से ‘फेसलेस ब्यूरोक्रेसी’ विकसित करने पर बल दिया है। विद्युतीय शासन और एकल सेवा केंद्र के मॉडल को लागू करने की आवश्यकता बताई गई है।

सेवाग्राही के समय और लागत को ध्यान में रखकर सेवाओं को डिज़ाइन करना और प्रमाणित दस्तावेजों की प्रारंभिक प्रक्रिया निःशुल्क करने की सलाह भी दी गई है।

कर्मचारी कटौती के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन नेपाल ट्रस्ट, सार्वजनिक खरीद निगरानी कार्यालय और सतर्कता केंद्र जैसे संस्थानों में सचिव स्तर की पदों की पुनर्समीक्षा की जा रही है। कुछ छोटे क्षेत्रीय एजेंसियों में भी सचिव पद हैं, जिन्हें सहसचिव के नेतृत्व में पुनर्गठित किया जाएगा।

वित्त मंत्रालय में अर्थ और राजस्व संबंधी दो सचिव हैं, जबकि महालेखा नियंत्रक कार्यालय में भी एक अलग सचिव पद है। स्वास्थ्य मंत्रालय में स्वास्थ्य और प्रशासन के लिए सचिव पद प्रबंधित किया गया है।

मंत्रालय के अलावा विभिन्न आयोगों, संस्थाओं और संवैधानिक अंगों में एक से अधिक सचिव भी हैं। जल एवं ऊर्जा आयोग, अख्तियार, निर्वाचन आयोग और लोक सेवा आयोग जैसी संस्थाओं में भी सचिव के पद मौजूद हैं।

महालेखा परीक्षक कार्यालय, महान्यायाधिवक्ता कार्यालय और संघीय संसद सचिवालय में चार-चार सचिव हैं। इन संस्थाओं की तुलना में कार्यपालिका के अधीन निकायों में पद पुनर्समीक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।

संघीय स्तर पर वर्तमान में 63 और सात प्रदेशों में प्रमुख सचिव सहित कुल 70 सचिव पद हैं। प्रदेशों में तैनात प्रमुख सचिव भी संघीय निजामती सेवा से हैं। स्वास्थ्य सेवा में सचिव के समकक्ष 12वें स्तर के चार अधिकारी तैनात हैं।

पदों के अनुसार सहसचिवों की संख्या लगभग साढ़े 600 है। सरकार संगठन और प्रबंधन सर्वेक्षण कर इन पदों में कटौती करने की योजना बना रही है।

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