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सुझन लामा के नेतृत्व वाले एनआरएनए को पुर्तगाल में सरकारी मान्यता प्राप्त


२३ जेठ, लिस्बन। पुर्तगाल में स्थापित तीन गैर-आवासीय नेपाली संघ (एनआरएनए) में से सुझन लामा के नेतृत्व वाली कार्यसमिति को सरकारी मान्यता मिल गई है। एक साल पहले तीन समितियाँ बनी थीं और सभी एनआरएनए समानांतर रूप से गतिविधियाँ चला रहे थे।

एक साल पहले सुझन लामाले अपने नेतृत्व वाली समिति को वैधानिक और कानूनी मान्यता दिलाने के लिए पुर्तगाल सरकार को अवगत कराया था। एनआरएनए सचिव सुरज भण्डारी ने शुक्रवार को जारी बयान में बताया कि लामा अध्यक्ष समिति को सरकारी निकाय द्वारा मान्यता दी गई है।

सन् २०२५ के अक्टूबर में पुर्तगाल के न्याय मंत्रालय के अधीन रजिस्ट्रेशन और नोटरी संस्था (आइआरएन) में लामा ने गैर-आवासीय नेपाली संघ राष्ट्रीय समन्वय परिषद, पुर्तगाल को मान्यता एवं सरकारी अभिलेखों में नवीनीकरण हेतु आवेदन दिया था।

उसी आवेदन पर आइआरएन ने शुक्रवार को निर्णय जारी कर लामा नेतृत्व समिति को सरकारी संरचना में अपडेट करते हुए प्रमाणपत्र प्रदान किया। इसके साथ ही लामा नेतृत्व वाली एनआरएनए को पुर्तगाल में आधिकारिकता और कानूनी मान्यता प्राप्त हुई है। ‘आइआरएन से न्यायसंगत निर्णय आया है, हमें आधिकारिकता मिली है,’ लामा ने कहा, ‘हमारी मुख्य चिंता यह सुनिश्चित करना है कि मानव तस्करों और भ्रष्टाचारियों को गैर-आवासीय नेपाली संघ के नाम पर गलत कार्य करने से रोका जाए।’ पुर्तगाल के कानून के अनुसार मान्यता मिलने के बाद अन्य समूहों द्वारा एनआरएनए के नाम पर गतिविधियाँ अवैध होंगी, उन्होंने बताया।

कंपनी तथा संघ संस्थाओं के रजिस्ट्रेशन और विवाद निपटान के सरकारी निकाय आइआरएन द्वारा लामा नेतृत्व समिति को मान्यता मिलने पर अन्य समूहों ने भी आश्चर्य व्यक्त किया है। पुर्तगाल में एनआरएनए के तमाम समूहों में बमबहादुर जिसी और दीपा काफ्ले के अध्यक्षत्व में दो अन्य समितियाँ हैं, जिनकी लेखा जांच करने वाली कंपनी एक ही है।

सन् २०२३ से पुर्तगाल में एनआरएनए की आधिकारिकता विवाद के कारण सरकारी अभिलेखों को अपडेट नहीं किया जा सका था।

सन् २००६ में स्थापित पुर्तगाल की गैर-आवासीय नेपाली संघ २०२३ से विभाजित हो गई थी। रविन अधिकारी के नेतृत्व में शुरू हुए विवाद ने २०२३ में दो समितियाँ बना दीं और २०२५ तक एक और समानांतर समिति जुड़कर कुल तीन एनआरएनए हो गए।

एकता की कोशिशें जारी हैं, यह खबर आई, काफ्ले ने बताया

एनआरएनए पुर्तगाल की अन्य अध्यक्ष दीपा काफ्ले ने बताया कि एकता प्रक्रियाओं के बीच ऐसे समाचार आने पर वे हैरान हैं।

शुक्रवार दोपहर को उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि सोशल मीडिया पर संस्था की आधिकारिकता लामा नेतृत्व वाली समिति के नाम आने की जानकारी मिली है। ‘बमबहादुर दाई और मैं दो समितियों को एकजुट करने के लिए लंबे समय से बातचीत में हैं। वर्तमान समाचार के अनुसार ऐसा प्रतीत होता है कि कागजों पर दो अलग-अलग व्यक्ति के नाम संस्था हैं। इस पर हम अभी भी बातचीत कर रहे हैं,’ काफ्ले ने कहा, ‘जहाँ तक मेरी और बमबहादुर दाई की समिति का सवाल है, दोनों संस्थाओं के खाता परीक्षक एक हैं, हम साथ में काम कर रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि लामा समिति को कैसे कागजात और आइआरएन से मान्यता मिली।’

उन्होंने बताया कि जिसी और मैं सहमत होने पर लामा से एकता का प्रस्ताव रखने को तैयार हूं। काफ्ले ने कहा कि पुर्तगाल के कानून के अनुसार लामा के माध्यम से संस्था का नवीनीकरण हुआ हो सकता है, और अब तक किसी समिति ने आधिकारिकता का दावा नहीं किया था।

इस बारे प्रतिक्रिया मांगने पर जिसी ने संपर्क करने से मना कर दिया।

४६ लाख से अधिक रुपये की गबन का आरोप

एनआरएनए सचिव सुरज भण्डारी ने शुक्रवार को जारी बयान में बताया कि संस्था के बैंक खाते से ४६ लाख से अधिक नेपाली रुपए की चोरी हुई है। सरकारी निकाय द्वारा प्रमाणपत्र मिलने के बाद कुछ ही देर में उन्होंने बैंक विवरण प्राप्त किए, जिनसे पता चला कि अन्य समूह के पदाधिकारियों ने २६,६५७ यूरो का गबन किया है।

सचिव भण्डारी के अनुसार, यह राशि आधिकारिक भुगतान के तहत इकट्ठा कर बैंक खाते में जमा की गई थी, लेकिन वर्तमान में बैंक खाते में केवल ३२४ यूरो ही मौजूद हैं। उन्होंने संस्था के नाम पर संग्रहित धन को संस्था के खाते में रखने का आग्रह किया है।

सभी को मिलाकर आगे बढ़ने का संकल्प: लामा

एनआरएनए पुर्तगाल के अध्यक्ष सुझन लामाले एकता, पारदर्शिता और आपसी सम्मान के साथ आगे बढ़ने का संकल्प जताया है। शुक्रवार शाम संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘लहरें आने पर पहाड़ भी गिर जाते हैं, इसलिए अतीत को छोड़कर सभी के साथ सहयोग कर आगे बढ़ने का प्रयास करूंगा।’

तीन वर्षों से गैर-आवासीय नेपाली संघ को पुर्तगाल में कानूनी मान्यता न मिलने से उत्पन्न भ्रम समाप्त हो गया है और अब समुदाय के लिए उचित तथा विधिसम्मत संरचना तैयार हो गई है। उन्होंने कहा, ‘गैर-आवासीय नेपाली लोगों के हित में बहुत काम करने हैं। इसलिए सरकारी मान्यता मिलने के बाद संतुष्ट नहीं होना चाहिए, बल्कि अधिक जिम्मेदारी के साथ सेवा के लिए तैयार हूं।’

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