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अर्थमंत्री के सचिवालय ने सुधार प्रक्रिया को लेकर गलत व्याख्या की

२६ जेठ, काठमाडौं । कर दर समायोजन मामले में अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम बाग्लेको सचिवालय ने सुधार प्रक्रिया को लेकर गलत व्याख्या की है।

‘आर्थिक विधेयक संशोधन के बारे में हकीकत’ शीर्षक से जारी विज्ञप्ति में सचिवालय ने कहा है, ‘संसद के दोनों सदनों में १५ जेठ को प्रस्तुत आर्थिक विधेयक में कुछ अस्पष्टताएँ और भाषा की गलतियाँ मिलने पर अर्थ मन्त्रालय ने १७ जेठ को उन त्रुटियों को सुधारने का निवेदन और संशोधित विषय संसद सचिवालय को भेजा था।’

संसद में प्रस्तुत संशोधन में अर्थमंत्री डॉ. बाग्लेको निवेदन एवं त्रुटि सुधार और स्पष्टता संबंधी बिंदु १ से ५ तक विस्तार से दिए गए हैं, जो विज्ञप्ति में भी उल्लिखित हैं।

संसद सचिवालय ने सभी सांसदों को संशोधित पृष्ठ विधेयक में शामिल कर वितरित किया, इसकी जानकारी अर्थ मंत्रालय को दी गई है।

संसद में पृष्ठ संख्याओं की व्यवस्था के दौरान पेज नंबर १६ घट जाने और बिना कोई शब्द परिवर्तन किए संसद को सूचित न करने का भी दावा किया गया है।

अर्थमंत्री के सचिवालय ने आगे कहा, ‘क्या त्रुटि सुधारना और भाषाई स्पष्टता करना संभव है या नहीं?’

आर्थिक विधेयक अन्य विधेयकों की तुलना में अधिक संवेदनशील होता है और संसद में प्रस्तुत होने के बाद कर दरें तुरंत लागू हो जाती हैं, इसलिए यहाँ दिखाई देने वाली त्रुटियों का तत्काल सुधार न होने पर बाजार और राजस्व पर असर पड़ने की संभावना है, यह बात विज्ञप्ति में उल्लेखित है।

‘संसद में प्रस्तुत विधेयक में कोई भाषाई त्रुटि हो या स्पष्टता आवश्यक हो तो अर्थमंत्री को त्रुटि सुधारने का संशोधन निवेदन संसद सचिवालय में प्रस्तुत करने का अधिकार है,’ विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘जैसे सांसदों को विधेयक में संशोधन का अवसर मिलता है, यह भी वैसी ही प्रक्रिया है। यह अर्थ मंत्रालय का पुराना अभ्यास भी है।’

सचिवालय के अनुसार विधेयक में त्रुटि होने पर सरकार उसे सुधार सकती है और यह प्रक्रिया उसी विधेयक में सांसदों द्वारा संशोधन प्रस्ताव देने के समय होती है।

विधेयक संसद में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया प्रतिनिधि सभा नियमावली के परिच्छेद १५ में दी गई है। इसके अनुसार विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए अनुमति मांगने का प्रस्ताव रखा जाना चाहिए, जिस पर सांसद आपत्ति जता सकते हैं और उपसत्र निर्णय लेता है।

इसके बाद सभाध्यक्ष के समक्ष विधेयक पर सामान्य चर्चा होती है। चर्चा के उपरांत विधेयक पर विचार करने का प्रस्ताव आता है, जिसे यदि सभागार स्वीकार करता है तो सांसद संशोधन प्रस्ताव दाखिल करने के लिए समय पाते हैं।

‘संशोधन प्रस्ताव दाखिल करना चाहने वाले किसी भी सदस्य को सामान्य चर्चा समाप्ति के ७२ घंटे के भीतर संशोधन का नोटिस सचिव को देना आवश्यक है,’ नियमावली के नियम ११२ में उल्लेख है।

लेकिन ये प्रक्रियाएं संसद में अभी पूरी नहीं हुई हैं और विधेयक ऐसी स्थिति में नहीं पहुंचा जहां सांसद संशोधन प्रस्ताव पेश कर सकें।

अर्थमंत्री द्वारा संसद में प्रस्तुत विधेयक संसद सचिवालय और अर्थ मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध था। अर्थ मंत्रालय ने बार-बार विवरणों को संशोधित करते हुए वेबसाइट पर हटाने और पुनः डालने का काम किया।

हालांकि १७ जेठ को त्रुटि सुधारने के लिए संसद सचिवालय को पत्र भेजा गया था। परंतु संसद में प्रस्तुत विधेयक में त्रुटि सुधार का दावा करते हुए संसद सचिवालय में पत्र दर्ज कराना उचित नहीं है, ऐसा सचिवालय के कर्मचारी बताते हैं।

वहीं, संसद में प्रस्तुत विधेयक में अर्थमंत्री बाग्ले ने मनमर्जी से कर नीतियों और दरों में संशोधन किया, लेकिन सचिवालय ने इसे सिर्फ सामान्य भाषाई त्रुटि तक सीमित कर दिया।

पूर्व वित्त मंत्रियों ने भी लगातार बजट पेश करते हुए इसी तरह आर्थिक विधेयक की त्रुटियां सुधारी थीं, और वर्तमान अर्थमंत्री भी ऐसा कर रहे हैं, सचिवालय ने यह स्पष्ट किया है। ‘कांग्रेस और एमाले की संयुक्त सरकार ने पिछले वर्ष के आर्थिक विधेयक में ५ बिंदुओं में ७३ उपशीर्षक वस्तुओं के कर दरों को बदला था,’ विज्ञप्ति में कहा गया है।

लेकिन संसद सचिवालय के पूर्व अधिकारी ने कहा, ‘ऐसे प्रक्रियाओं को दरकिनार करके संसद में प्रस्तुत विधेयक में संशोधन करने का विरोध हमने पहले भी किया है। यह गलत है। वर्तमान अर्थमंत्री का ‘‘दूसरों ने जो किया मैं भी कर रहा हूँ’’ कहना चौंकाने वाला है।’

सचिवालय के अनुसार अर्थमंत्री ने त्रुटि सुधार पत्र १७ जेठ को संसद सचिवालय में भेजा था।

लेकिन संसद में प्रस्तुत विधेयक में संशोधन प्रस्ताव दर्ज नहीं हो सकता इसलिए सचिवालय ने इसे दर्ज नहीं किया।

हालांकि, विधेयक को पार करने के लिए अर्थ मंत्रालय ने कर दरों में मनमर्जी संशोधन किया, यह खबरें आने के बाद मंत्री बाग्ले ने संशोधन दर्ज करने का दबाव बनाया, जिससे संसद सचिवालय के स्रोत ने बताया।

‘अर्थमंत्री ने त्रुटि सुधार पत्र भेजा था, लेकिन संसद में प्रस्तुत विधेयक में संशोधन प्रस्ताव दर्ज नहीं किया जा सकता। कर्मचारी इसी कारण से प्रस्ताव दर्ज करने से मना कर चुके थे,’ स्रोत ने कहा, ‘लेकिन २० जेठ बुधवार को महासचिव पदमप्रसाद पांडेय के निर्देश के बाद संशोधन दर्ता किया गया और अंत में विधेयक पुनः अपलोड किया गया।’

इस प्रकार संसद में प्रस्तुत विधेयक को सरकार द्वारा मनमर्जी से संशोधित कर सचिवालय को पत्र भेजना संसदीय प्रक्रिया और विधायिकी के मूल तत्वों का उल्लंघन माना जा रहा है और विपक्षी दल इस पर सवाल उठा रहे हैं।

राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और श्रम संस्कृति पार्टी ने अर्थमंत्री के इस्तीफे की मांग भी कर दी है।

इस्तीफे की मांग के बाद सचिवालय ने विज्ञप्ति जारी कर त्रुटि सुधार की बात कही है, लेकिन विधेयक में संशोधन करने का सही समय न आने के बावजूद संसद सचिवालय को पत्र भेजे जाने की घटना को गलत व्याख्या कर सफाई दी जा रही है।

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