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नर्वे में नेपालगंज मैराथन को एम्स सामाजिक पुरस्कार से सम्मानित

समाचार सारांश

Generated by OK AI. Editorially reviewed.

  • एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल मैराथन एंड डिस्टेंस रेस (एम्स) ने नेपाल के नेपालगंज मैराथन को ‘एम्स सोशल अवार्ड 2026’ से सम्मानित किया है।
  • एम्स के अध्यक्ष पाको बोराओ ने नॉर्वे के ट्रोम्सो में आयोजित 25वें वर्ल्ड कांग्रेस में नेपालगंज मैराथन के संस्थापक टीएस ठकुरी को यह पुरस्कार प्रदान किया।
  • व्यापक शांति समझौते की याद में २०७२ साल से शुरू हुए नेपालगंज मैराथन ने सामाजिक सद्भाव, जलवायु परिवर्तन एवं खेल के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है, जिसके कारण यह पुरस्कार मिला।

5 असार, काठमांडू। विश्वभर के धावकों का साझा संगठन एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल मैराथन एंड डिस्टेंस रेस (एम्स) ने नेपाल के नेपालगंज मैराथन को ‘‘एम्स सोशल अवार्ड 2026’’ से सम्मानित किया है।

नॉर्वे में आयोजित एम्स के 25वें विश्व सम्मेलन में शुक्रवार रात एक विशेष समारोह में यह पुरस्कार दिया गया। एम्स के अध्यक्ष पाको बोराओ ने नेपालगंज मैराथन के संस्थापक टीएस ठकुरी को पुरस्कार प्रदान किया।

विश्वव्यापी दौड़ आयोजकों में से एक को दिया जाने वाला ‘‘एम्स सोशल अवार्ड’’ बेहद प्रतिष्ठित माना जाता है। इस संगठन में दुनिया भर से लगभग पांच सौ से अधिक दौड़ आयोजक सदस्य शामिल हैं।

इनमें से अधिकांश सदस्य नॉर्वे के ट्रोम्सो में एकत्रित हुए थे। बर्लिन मैराथन की संस्थापक व एम्स की सह-संस्थापक 90 वर्षीय हर्स्ट मिल्डे भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थीं। प्रतिष्ठित मैराथन आयोजकों के बीच पुरस्कार पाकर नेपालगंज मैराथन के संस्थापक टीएस ठकुड़ी ने खुशी जताई।

‘‘यह मेरे लिए अप्रत्याशित उपलब्धि है, अब नेपाल में मैराथन का विस्तार और प्रतिष्ठा और बढ़ेगी,’’ संस्थापक ठकुरी ने कहा, ‘‘यह सम्मान केवल नेपालगंज मैराथन को ही नहीं, पूरे देश को मिला है क्योंकि यह एम्स का एकमात्र सामाजिक पुरस्कार है।’

इससे पहले 2013 में ग्रेट इथियोपियन रन (इथियोपिया), 2014 में टोकियो मैराथन (जापान), 2015 में मैराथन इंटरनेशनल लाला (मैक्सिको), 2016 में म्यूनिख मैराथन (जर्मनी), 2017 में मैराथन दि लास फ्लोरेस मेडेलिन (कोलम्बिया), 2018 में बेलग्रेड मैराथन (सर्बिया), 2019 में हार्मनी जेनेवा मैराथन फॉर यूनिसेफ (स्विट्जरलैंड) को यह पुरस्कार दिया गया था। कुछ वर्षों के अंतराल के बाद यह पुरस्कार इस वर्ष फिर से जारी किया गया है।

नेपालगंज मैराथन के संस्थापक ठकुरी के अनुसार, निरंतरता, विभिन्न विशेष अवधारणाओं पर दौड़ का आयोजन, जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता फैलाना एवं कोविड काल में भी टोकियो ओलम्पिक के लिए खिलाड़ी चयन प्रतियोगिता आयोजित करने जैसे कारणों से इस मैराथन को यह पुरस्कार मिला है।

नेपालगंज मैराथन 2015 से निरंतर आयोजित हो रहा है। कोविड काल में भी सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों का पालन कर टोकियो ओलम्पिक के लिए खिलाड़ी चयन नेपालगंज मैराथन ने किया है।

साल 2072 से व्यापक शांति समझौते की याद में 5 मंसिर 2063 से नेपालगंज में यह मैराथन शुरू हुई, जो शांति, सद्भाव और एकता का प्रतीक बन चुकी है। नेपालगंज में बहुजातीय और बहुधार्मिक समाज आधारित है, इसलिए इस मैराथन के माध्यम से सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा दिया गया है। अब तक करीब एक दर्जन से अधिक अन्य इवेंट भी आयोजित किए जा रहे हैं।

बालक-बालिकाओं को जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक और अनुकूल बनाने के उद्देश्य से गौघाट ग्रीन रन और राप्तीसोनारी नेचर रन पिछले दो वर्षों से लगातार जारी हैं।

रात में सुरक्षा का अनुभव कराने हेतु नेपालगंज 10 के नाइट रन के दो संस्करण भी आयोजित किए गए हैं। साथ ही विश्व नेपाली विरासत के प्रचार के लिए काठमांडू 25 कि.मी. हेरिटेज रेस पिछले वर्ष से शुरू हुई है। कर्णाली प्रदेश में भी कर्णाली हाफ मैराथन प्रारंभ हो चुकी है। लोकतंत्र में संवाद आवश्यक मानते हुए नेपालगंज डिस्कोर्स श्रृंखला के 6 संस्करण भी संपन्न हो चुके हैं।

पिछले वर्ष एम्स के बोर्ड बैठक के साथ नेपाल इंटरनेशनल रनिंग कांफ्रेंस भी आयोजित किया गया था, जिसमें 18 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इस वर्ष से वन ग्लोबल माइल के तहत कोहलपुर माइल और काठमांडू माइल शुरू किया जाना है। नेपाल रनिंग मैगजीन भी लगातार प्रकाशित हो रही है, जो दौड़ के क्षेत्र में योगदान दे रही है।

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