गाँजा सेवन करने वाले किशोरों में गंभीर मानसिक समस्याओं का जोखिम दोगुना
किशोरावस्था में गाँजा सेवन करने पर युवावस्था में साइकोटिक और बाइपोलर डिसऑर्डर जैसे गंभीर मानसिक रोगों का खतरा दोगुना हो जाता है, ऐसा एक अध्ययन में पाया गया है। क्यालिफोर्निया के शोधकर्ताओं ने 4,63,396 किशोरों पर 26 वर्षों तक किए गए अध्ययन से गाँजे की लत और मानसिक स्वास्थ्य के बीच गहरा संबंध साबित किया है। अध्ययन की लेखिका डॉ. केली योङ-वुल्फ ने अभिभावकों और बच्चों को गाँजे के हानिकारक प्रभावों के बारे में तथ्यात्मक जानकारी देना आवश्यक बताया है। 14 असार, काठमांडू।
किशोरावस्था में गाँजा (कैनाबिस) का सेवन युवावस्था में गंभीर मानसिक रोगों के जोखिम को बढ़ाता है, यह बात एक अध्ययन में सामने आई है। ‘जामा हेल्थ फोरम’ जर्नल में प्रकाशित इस शोध ने प्रदर्शित किया कि गाँजा सेवन करने वाले किशोरों में मानसिक असंतुलन (साइकोटिक डिसऑर्डर) और ‘बाइपोलर डिसऑर्डर’ जैसी गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम लगभग दोगुना हो जाता है। कैजर पर्मोनेन्टे पब्लिक हेल्थ इंस्टिट्यूट के ‘गेटिंग इट राइट फ्रॉम द स्टार्ट’ कार्यक्रम, क्यालिफोर्निया विश्वविद्यालय सान फ्रांसिस्को और क्यालिफोर्निया साउथर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने संयुक्त रूप से यह अध्ययन किया है।
इस अध्ययन में 13 से 17 वर्ष आयु समूह में शामिल 4,63,396 किशोरों के स्वास्थ्य की 26 वर्षों तक गंभीरता से निगरानी की गई। यह शोध नेशनल इंस्टिट्यूट ऑन ड्रग एब्यूज के वित्तीय सहयोग से 2016 से 2023 तक के बाल स्वास्थ्य परीक्षणों के इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्डों के विश्लेषण के माध्यम से तैयार किया गया है। शोध के दौरान गाँजा सेवन की सूचना मिलने पर औसतन 1.7 से 2.3 वर्ष बाद किशोरों में मानसिक रोग के लक्षण प्रकट होने लगे। यह दीर्घकालीन अध्ययन किशोरावस्था में गाँजा उपयोग से बाद में मानसिक रोगों के विकसित होने का ठोस प्रमाण प्रदान करता है।