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जेन जी आन्दोलन की रिपोर्ट: केपी ओली, रमेश लेखक और पृथ्वी सुब्बा गुरुङ के निवेदन की वर्तमान स्थिति

जेन जी आन्दोलन से संबंधित जांच रिपोर्ट राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग द्वारा दो सप्ताह के भीतर उपलब्ध न कराने के बाद कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है, आयोग की सिफारिशों से असंतुष्ट पक्षों ने यह जानकारी दी है। भाद्र २३ और २४ को हुई घटनाओं की जांच के लिए गठित गौरीबहादुर कार्की की अध्यक्षता वाली आयोग की वैधता को पहले कुछ सवालों के दायरे में लाया गया था। हालांकि, उन सवालों के बाद भी उस घटना की जांच रिपोर्ट विवादित बनी हुई है।

जेठ १३ को उस रिपोर्ट की सिफारिशों को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी ओली, तत्कालीन गृहमंत्री रमेश लेखक और तत्कालीन संचार तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुङ ने आयोग में सवाल उठाते हुए निवेदन दर्ज कराया था। उन्होंने पूर्ण रिपोर्ट, आयोग के फैसले, बयानों और दस्तावेजों की प्रतिलिपि मांग की है।

रिपोर्ट से जुड़े सवालों के बाद जेन जी आन्दोलन के बाद आयोग ने सदस्य लिली थापा की अध्यक्षता में जांच समिति गठित कर रिपोर्ट प्रकाशित की थी। आयोग ने जेठ १२ को अपने फैसले और सिफारिशें करते हुए उनके कार्यान्वयन के लिए प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद को प्रस्तुत करने की बात कही थी। लगभग एक महीने बाद, गत शुक्रवार को तीनों नेताओं ने एक समान स्वरूप के निवेदन आयोग में प्रस्तुत किए हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री ओली की ओर से निवेदन दायर करने गए नेकपा एमाले के नेता महेश बर्तौला ने आयोग के जवाब का इंतजार कर रहे हैं और कहा, “यह निवेदन हमारी असहमति की अभिव्यक्ति है। मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप में केपी ओली समेत नेताओं पर मामला लगाकर पश्चातापी कानून बनाकर कार्रवाई करने की सिफारिश गलत है।”

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