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युद्ध में उपयोग हुए ड्रोन के तार से पक्षी ने बनाया घोंसला

सामान्यतया युद्ध का मतलब होता है विनाश। धुंए से आकाश ढका हुआ, बमों से जमीन चीर चुकी, बस्तियाँ उजड़ी हुईं और भविष्य अनिश्चित बनी हुई। जहां युद्ध होता है, वहां जीवन की संभावनाएं धीरे-धीरे घटती हैं। लेकिन यह मान्यता एक सूक्ष्म जीव ने गलत साबित कर दी है। यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र में कुछ दिन पहले मिला एक पक्षी का घोंसला आज दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

पहली नजर में यह एक सामान्य घोंसले जैसा लगता है। लेकिन करीब से देखने पर पता चलता है कि इसकी भीतरी संरचना में हरे घास और सूखे पत्ते के साथ-साथ चमकीले, पतले फाइबर-ऑप्टिक तार भी बुने हुए हैं।

यह तार किसी संचार कंपनी के नहीं हैं, न ही किसी घर की बिजली लाइनों के। यह युद्ध में इस्तेमाल हुए फाइबर-ऑप्टिक एफपीवी ड्रोन के तार हैं।

यानि, मनुष्य ने एक-दूसरे को मारने के लिए बनाई तकनीक के अवशेषों का पक्षी ने अपने संतान की परवरिश के लिए इस्तेमाल किया है।

यह केवल एक घोंसला नहीं है, बल्कि यह युद्ध और जीवन के बीच की सबसे गहरी बातचीत है।

एक तस्वीर, जिसने दुनिया को थामा

23 जून, 2026। यूक्रेनी भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता ओलेना ट्रेगुब ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर की। तस्वीर में एक पक्षी का घोंसला था। शुरू में बहुतों ने इसे सामान्य तस्वीर समझा, लेकिन ध्यान से देखने पर सबका ध्यान एक ही बात पर गया कि घोंसले में घास के साथ फाइबर-ऑप्टिक तार जुड़े हुए थे।

यह कोई कलात्मक सजावट नहीं थी। ये तार युद्ध में उपयोग हुए ड्रोन के केबल थे। ट्रेगुब ने लिखा, ‘युद्ध सब कुछ नष्ट करने की कोशिश करता है, लेकिन जीवन उसी विनाश से भी नई शुरुआत करता है।’

इज़राइल के “द जेरुसलम पोस्ट” के अनुसार उनकी पोस्ट कुछ ही घंटों में हजारों बार साझा की गई।

कई लोगों ने इसे ‘Life Finds The Way’ अर्थात् ‘जीवन रास्ता खोज लेता है’ के संदेश से जोड़ा। यह वाक्यांश हॉलीवुड की फिल्म जुरासिक पार्क से लोकप्रिय हुआ है, जिसका मर्म है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी कठिन हों, जीवन जीवित रहने का रास्ता ढूंढता है।

डोनबास का वह छोटा सा घोंसला इस कथन को हकीकत में बदलता दिखता है।

इस घोंसले को बनाने वाले पक्षी की प्रजाति का आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन पक्षी विशेषज्ञों का मानना है कि यह संभवतः युरेशियन चाफिंच या इसके समान छोटे गीतकार पक्षी की प्रजाति का हो सकता है।

युद्ध के भग्नावशेष में मिला घर

इस घोंसले को खोजने वाले व्यक्ति यूक्रेनी शोधकर्ता और सैनिक ओलेह मालचेंको थे।

वे डोनबास के अग्रिम मोर्चे पर तैनात थे। हाल ही में एक रूसी ग्लाइड बम हमले के बाद एक बड़ा पेड़ गिरा था। विस्फोट के बाद निरीक्षण के दौरान मालचेंको की नजर एक पेड़ की टहनियों में बंधे छोटे से घोंसले पर पड़ी।

पहले तो वह सामान्य लग रहा था, पर करीब से देखने पर वे स्वयं भी आश्चर्यचकित रह गए। घास, सूखे पत्ते, लकड़ी के रेशे और बीच में चमकते फाइबर-ऑप्टिक केबल। मानव ने युद्ध के लिए बनाए तार को पक्षी ने जीवन के लिए प्रयोग किया था।

मालचेंको ने इस घोंसले को सावधानी से कैमरे में कैद किया। उन्होंने बाद में कहा, ‘हम यहां हर रोज मौत देखते हैं, लेकिन यहां एक पक्षी प्राकृतिक जीवन की मौजूदगी का उदाहरण दे रहा है।’

डोनबास: आकाश में ड्रोन, जमीन पर विस्फोट

पूर्वी यूक्रेन का डोनबास क्षेत्र आज विश्व के सबसे तीव्र युद्धक्षेत्रों में से एक है।

पहले हरियाली जंगल, गेहूं के खेत और गांवों से भरा यह क्षेत्र आज विशाल खाई, ध्वस्त इमारतों और जले हुए पेड़ों का दृश्य बन चुका है।

यहां दिन-रात बमों के धमाकों की आवाज सुनाई देती है। आकाश में हेलीकॉप्टर से अधिक ड्रोन उड़ रहे हैं। जमीन पर सैनिकों से अधिक विस्फोट के अवशेष बिखरे हुए हैं। युद्ध न केवल पर्यावरण को बदल रहा है, बल्कि जीवों के आवास को भी पूरी तरह से परिवर्तित कर रहा है।

लेकिन इसी बदले हुए संसार में एक पक्षी ने नया विकल्प खोजा।

घास समाप्त हो गई, पेड़ों की टहनियां टूट गईं, पर युद्ध के अवशेष रूप में पड़े फाइबर-ऑप्टिक तार काफी उपलब्ध थे। इसलिए उसने उन्हीं का उपयोग किया।

पक्षी ऐसे सामग्रियों का चयन क्यों करते हैं?

पक्षी अत्यंत अनुकूलनीय जीव माने जाते हैं।

अध्ययनों के अनुसार पक्षी अपने आसपास उपलब्ध सामग्रियों से घोंसले बनाते हैं। कहीं प्लास्टिक के धागे, कहीं मछली पकड़ने के जाल, कभी कागज के टुकड़े और कभी तार।

शहरों में रहने वाले कई पक्षियों ने सिगरेट के छोड़े हुए टुकड़े, कपड़े के धागे और प्लास्टिक तक का उपयोग करते देखा गया है। लेकिन फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन के तारों का उपयोग होना बेहद दुर्लभ घटना है।

इसके कई कारण हैं। ये तार बहुत हल्के और लचीले होते हैं। पानी उन्हें जल्दी खराब नहीं करता। और इन्हें आसानी से बुना जा सकता है। पक्षी की दृष्टि से ये घोंसले को मजबूत बनाने में मददगार सामग्री हैं। जबकि मनुष्यों के लिए ये युद्ध के अवशेष हैं।

फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन : अब युद्ध का नया हथियार

रूस-यूक्रेन युद्ध ने आधुनिक युद्ध के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। पहले युद्ध में टैंक, तोप और लड़ाकू विमान निर्णायक माना जाता था। आज इसका स्थान ड्रोन ने ले लिया है।

सामान्य ड्रोन रेडियो सिग्नल से संचालित होते हैं, इसलिए इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग प्रणाली उन्हें रोक सकती है। परन्तु फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन अलग हैं। इनमें हजारों मीटर लंबे अत्यंत पतले फाइबर-ऑप्टिक तार जुड़े होते हैं।

उड़ान भरते समय इन तारों से नियंत्रण सिग्नल भेजे और प्राप्त किए जाते हैं, इसलिए रेडियो जैमिंग का कोई प्रभाव नहीं होता। जब ड्रोन लक्ष्य पर पहुंचकर विस्फोट करता है या गिरता है, तो ये तार जमीन पर फैल जाते हैं।

डोनबास के जंगल, खेत और सड़कें अब ऐसी हजारों केबल से भर गई हैं। और पक्षी इन्हीं सामग्रियों को अपने छोटे संसार में ला रहे हैं।

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