Skip to main content

बैंकों को कर्जा विस्तार से अधिक गुणवत्ता पर ध्यान देना आवश्यक है

बैंकों में तरलता बढ़ रही है और ब्याज दरें घट रही हैं, बावजूद इसके कर्जा विस्तार धीमा है। दूसरी ओर, कुछ कर्ज की वसूली न हो पाने के कारण बैंकों के खराब कर्जों की मात्रा भी बढ़ी है। डिजिटल कारोबार के विस्तार के साथ सुरक्षा चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं। इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सिद्धार्थ बैंक के सीईओ रामेश्वरप्रसाद बस्याल से बातचीत में उन्होंने कहा, “डिजिटल बैंकिंग ने अब व्यापकता हासिल कर ली है। बैंक भी डिजिटल बैंकिंग पर जोर दे रहे हैं।”

बस्याल ने आगे कहा, “नेपाल की युवा पीढ़ी डिजिटल बैंकिंग सेवाओं के सबसे गतिशील और जागरूक ग्राहक वर्ग में से एक है। उन्हें शाखा जाकर पारंपरिक बैंकिंग सेवा लेने की तुलना में तेज, सुरक्षित, सरल और किसी भी समय व स्थान से सेवा उपलब्ध होनी चाहिए।” इसलिए सिद्धार्थ बैंक डिजिटल बैंकिंग को मात्र एक वैकल्पिक माध्यम नहीं बल्कि बदलते बैंकिंग परिवेश में स्थायी बैंकिंग के लिए एक बुनियादी आवश्यकता मानता है।

सिद्धार्थ बैंक ने इजी बैंक, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, क्यूआर भुगतान, ऑनलाइन खाता खोलने की सुविधा, कार्ड सेवा, और डिजिटल भुगतान जैसी विभिन्न ग्राहक-केंद्रित सेवाओं का विकास, विस्तार और सतत सुधार किया है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य केवल डिजिटल कारोबार बढ़ाना नहीं बल्कि युवाओं के दैनिक वित्तीय जीवन को सरल, सुरक्षित और उत्पादक बनाना है।”

बस्याल ने कहा, “डिजिटल समाधान की सफलता का मूल्यांकन केवल एप्लिकेशन डाउनलोड या लेनदेन संख्या से नहीं किया जा सकता।” उन्होंने कहा, “ग्राहक के व्यापार मॉडल, ऋण संरचना, नकदी प्रवाह और प्रबंधन क्षमता के आधार पर स्थिति भिन्न होती है।” इस प्रकार, सिद्धार्थ बैंक वित्तीय समावेशन को केवल कितने खाते खोले गए इसकी सीमित संख्या में नहीं बल्कि व्यापक स्तर पर देखता है।