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मुद्दा चल रहे आधार पर बैंक संचालक और सीईओ को जिम्मेदारी छोड़नी नहीं चाहिए

समाचार सारांश

AI द्वारा तैयार किया गया। संपादकीय समीक्षा की गई।

  • बाफिया के अनुसार आपराधिक आरोप लगे होने के आधार पर बैंक संचालक और सीईओ को पद छोड़ना आवश्यक नहीं है, यह नेपाल राष्ट्र बैंक ने स्पष्ट किया है।
  • स्मार्ट टेलिकॉम की धरोहर बिक्री से ४ अरब ६० करोड़ रुपये वसूली के मामले में सरकार ने नेपाल इन्वेस्टमेंट मेगा बैंक के संचालकों और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ काठमांडू जिला अदालत में मुकदमा दायर किया है।
  • राष्ट्र बैंक के अधिकारियों के अनुसार बाफिया में दोष साबित होकर सजाय होने तक संचालक और सीईओ को अयोग्य नहीं माना जाएगा।

२ भाद्र, काठमांडू। नेपाल इन्वेस्टमेंट मेगा बैंक (एनआईएमबी) के अध्यक्ष सहित अधिकांश संचालक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी समेत कुछ कर्मचारियों पर सरकार द्वारा मुकदमों के बाद उनकी पदस्थिति को लेकर चर्चा चल रही है।

हालांकि, बैंक तथा वित्तीय संस्था सम्बन्धी अधिनियम २०७३ और नेपाल राष्ट्र बैंक के निर्देशों के अनुसार अदालत में मुकदमा चलने के आधार पर संचालक या सीईओ को निलंबित या पदमुक्त नहीं किया जाना चाहिए।

स्मार्ट टेलिकॉम की धरोहर विक्रय से ४ अरब ६० करोड़ रुपये वसूल करने के मामले में सरकार ने नेपाल इन्वेस्टमेंट मेगा बैंक के संचालक और उच्च अधिकारियों के खिलाफ काठमांडू जिला अदालत में मुकदमा दायर किया है।

बैंक तथा वित्तीय संस्था सम्बन्धी अधिनियम (बाफिया) की धारा १६, १७, १८ और १९ में बैंक और वित्तीय संस्थाओं के संचालकों की योग्यता, अयोग्यता और पद पर बने रहने की स्थितियों का प्रावधान है।

उसी अधिनियम की धारा १०२ में संचालक समिति को निलंबित करने की स्थिति वर्णित है, लेकिन किसी भी धारा में चल रहे आपराधिक मामले के आधार पर संचालक समिति या किसी संचालक को निलंबित या पदमुक्त करने का प्रावधान नहीं है।

दरअसल, ‘चोरी, धोखाधड़ी, जालसाजी, भ्रष्टाचार जैसे अपराध प्रमाणित और सजाय प्राप्त न हुए १० वर्ष न गुज़रे व्यक्ति संचालक बनने के लिए अयोग्य होंगे’, यह प्रावधान धारा १८ की उपधारा १ (ठ) में वर्णित है। इसके अनुसार केवल मुकदमा दर्ज होने पर नहीं, दोषी ठहराए जाने और सजाय मिलने तक संचालक पद पर बने रहने में कोई अयोग्यता नहीं होती।

बाफिया की धारा २९ में कार्यकारी प्रमुख की नियुक्ति और सेवा शर्तों का उल्लेख है। चूंकि सीईओ भी धारा १८ की उपधारा १ के अनुसार अयोग्य नहीं होना चाहिए, इसलिए मुकदमा चलने के आधार पर सीईओ को पदमुक्त या निलंबित नहीं किया जा सकता, नेपाल राष्ट्र बैंक के एक अधिकारी ने बताया।

बैंक तथा वित्तीय संस्थाओं के संचालक समिति को निलंबित करने का अधिकार केवल नेपाल राष्ट्र बैंक के पास है, जो धारा १०२ में वर्णित है। इसके तहत भी चल रहे मुकदमे के आधार पर निलंबन संभव नहीं है।

‘यदि कोई अनुमति प्राप्त संस्था नियमों का उल्लंघन करे, दायित्व पूरा न करे, संचालन न करे या शेयरधारक एवं जमाकर्ताओं को नुकसान पहुँचाए, तो राष्ट्र बैंक अधिकतम तीन साल तक निलंबन और नियंत्रण कर सकता है,’ उसी धारा में लिखा है। लेकिन अदालत में मामला चल रहे होने पर निलंबन का प्रावधान नहीं है।

इसलिए, किसी भी आरोप पर अदालत में मामला चल रहा है, इस आधार पर बैंक संचालक और सीईओ को पदमुक्त या निलंबित करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है, नेपाल राष्ट्र बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया। ‘आपराधिक दोष साबित होने पर ही पद पर बने रहना संभव नहीं है,’ उन्होंने कहा।

बैंक ने भी आवश्यक कानूनी सलाह लेकर यह निष्कर्ष निकाला है कि बैंक संचालक और सीईओ को जिम्मेदारी से हटने की आवश्यकता नहीं है। ‘संचालक समिति और सीईओ नियमित रूप से कार्यरत हैं और किसी प्रकार की अनिश्चितता नहीं है,’ उस अधिकारी ने जोड़ा।