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‘व्यवसायियों की मनमानी, सरकार के रहते गवाह’: आपदा के बाद बढ़ी महंगाई और काला बाजारी नियंत्रण में सरकार नाकाम?

गैस संकट

तस्वीर स्रोत, RSS

राजधानी काठमांडू में एलपी गैस मिलना अत्यंत कठिन हो गया है, चावल और दाल के दाम दुकानों के अनुसार अलग-अलग हैं, चीनी खोजने के लिए कई जगह घूमना पड़ता है और महंगा होने की वजह से कई उपभोक्ता शिकायत कर रहे हैं। सब्ज़ियों के दाम भी रोज बढ़ रहे हैं।

“ये रोजमर्रा की अत्यावश्यक वस्तुएं हैं जिनमें सरकार को आसानी से दखल देना चाहिए। उपभोक्ताओं का दैनिक जीवन असहज होता जा रहा है,” उपभोक्ता संगठन कन्ज़्यूमर आई नेपाल की अध्यक्ष विमला खनाल कहती हैं।

“ऐसे हालात में सरकार को पूर्व तैयारी से वैकल्पिक रणनीति बनानी चाहिए थी। जनता आपदा की पीड़ा में है और खाना पकाना भी कठिन हो गया है। युवाओं में ऊर्जा और जनता की बड़ी शक्ति होने के कारण सरकार से ऐसी उम्मीद थी।”

वाणिज्य, आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण विभाग के महानिदेशक मोतीराम सापकोटा कहते हैं, “आपदा के कारण कुछ आपूर्ति में असुविधा आई है” और त्योहारी सीजन के नजदीक आने से उपभोक्ता वस्तुओं की मांग पर “अधिक दबाव” पड़ रहा है।

वे कहते हैं, “कृत्रिम मूल्य वृद्धि की शिकायतें बढ़ी हैं। हमने राजधानी में ही निगरानी तेज कर दी है, 11 टीमें परिचालित कर दी हैं। देशभर में बाजार निगरानी बढ़ाई गई है।”