
मलेशिया से म्यांमार के नागरिकों को स्वदेश लौटाया जा रहा है
१३ असोज, क्वालालम्पुर (रासस/एएफपी)। मलेशिया ने मंगलवार को लगभग एक हजार ५ सौ म्यांमार के नागरिकों को स्वदेश लौटाने की प्रक्रिया शुरू की। यह म्यांमार के पाँच हजार नागरिकों को स्वदेश भेजने की योजना का पहला चरण है। मलेशियाई सरकार ने बताया है कि वे इन्हें स्वेच्छा से स्वदेश लौटने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। हालांकि, मानवाधिकार और प्रवासी अधिकारों से संबंधित संस्थाएं हिरासत केंद्रों में मौजूद कड़ी परिस्थितियों के कारण इन नागरिकों को स्वदेश लौटने के लिए बाध्य किया जा सकता है, इस चिंता का इजहार कर रही हैं।
म्यांमार में २०२१ से जारी सशस्त्र संघर्ष के कारण सुरक्षा स्थिति अभी भी अस्थिर बनी हुई है और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि स्वदेश लौटाये जाने वाले व्यक्ति जोखिम में हो सकते हैं। मंगलवार को पुलिस सुरक्षा में दर्जनों बसें लुमूट स्थित एक स्टेडियम पर पहुँचीं। वहां आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें नजदीकी नौसैनिक केंद्र में ले जाया जाएगा और जहाज के माध्यम से म्यांमार भेजा जाएगा।
पहले समूह में कितने रोहिंग्या शामिल हैं, इस बारे में मलेशिया और म्यांमार ने अभी तक स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, मलेशिया में लगभग एक लाख ९० हजार म्यांमार के शरणार्थी और शरण मांगने वाले हैं, जिनमें से लगभग दो तिहाई रोहिंग्या समुदाय के हैं। रोहिंग्या समुदाय को म्यांमार में लंबे समय से उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। २०१७ में हुई सैन्य कार्रवाई के बाद लाखों रोहिंग्या म्यांमार से विस्थापित हो गए थे। मलेशिया १९५१ के शरणार्थी कन्वेंशन का पक्षकार नहीं है और वहां शरणार्थियों को औपचारिक कानूनी मान्यता नहीं मिली है। मानवाधिकार संगठनों ने म्यांमार की वर्तमान सुरक्षा स्थिति के मद्देनजर स्वदेश वापसी की प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की है।