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सर्वोच्च अदालत ने निर्वाचन आयोग से मतदाता नामावली पुनरावलोकन पर स्पष्टीकरण मांगा

१९ असोज, नई दिल्ली (राससएएफपी)। भारत की सर्वोच्च अदालत ने मतदाता नामावली के व्यापक पुनरावलोकन संबंधी फैसले पर सरकार और निर्वाचन आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है। अनियमितता के आरोप के बाद सोमवार को अदालत ने यह आदेश जारी किया। विपक्षी दल और अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस प्रक्रिया का विरोध किया है और भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के प्रमुख ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने की मांग की है। उनका आरोप है कि पुनरावलोकन के दौरान लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से अनुचित तरीके से हटाए गए हैं। आलोचक कुमार पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हिन्दू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी के दबाव में काम करने का आरोप लगा रहे हैं।

निर्वाचन आयोग ने अपने खिलाफ लगाए गए अनियमितता के आरोपों से इंकार किया है। भारत के संवैधानिक चुनाव निकाय द्वारा लिए गए फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सुनवाई की। इस दौरान सरकार, निर्वाचन आयोग और कुमार के नाम पर नोटिस जारी किया गया है। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होने की संभावना है। याचिका में चुनाव आयोग के फैसले की संवैधानिक संगतता की जांच के लिए आयोग के अभिलेख की मांग की गई है।

पिछले महीने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित रिपोर्ट के बाद भारत के कई शहरों में पुनरावलोकन प्रक्रिया के विरोध में प्रदर्शन शुरू हुए हैं। रिपोर्ट में निर्वाचन आयोग के तीन सदस्यों में से दो ने मतदाता नामावली पुनरावलोकन के महत्वपूर्ण निर्णयों के खिलाफ कम से कम १४ बार औपचारिक असहमति जताने का उल्लेख है। अदालत ने कहा कि समाचार सही या गलत हो सकता है, लेकिन तत्काल आदेश जारी नहीं किया जा सकता, इसलिए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया है। यदि कानून उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित निर्णय बदलने का प्रावधान भी अदालत ने रखा है।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, पिछले वर्ष शुरू की गई पुनरावलोकन प्रक्रिया का उद्देश्य नकली मतदाता पहचान करना और गैरकानूनी विदेशी प्रवासियों को मतदान से रोकना है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इस प्रक्रिया से सीमांत और अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर मुस्लिम समुदाय को असमान रूप से प्रभावित किया गया है। भारत के प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने मंगलवार को नई दिल्ली में निर्वाचन आयोग के कार्यालय तक विरोध मार्च का ऐलान किया है, जिसके बाद देशभर में ‘लोकतंत्र बचाओ’ रैलियां आयोजित करने की योजना है। विरोध प्रदर्शन में ‘ककरोच जनता पार्टी’ (CJP) के समर्थक भी शामिल हो रहे हैं। इस व्यंग्यात्मक राजनीतिक अभियान की शुरुआत मई में ऑनलाइन हुई थी, जिसने तत्कालीन शिक्षा मंत्री को पद से हटाने का प्रयास किया था। इस समूह ने शनिवार को राजधानी में बड़े पैमाने पर जनसंपर्क का आह्वान किया है। नए दिल्ली के जंतर मंतर के निकट, प्रशासन द्वारा निर्धारित प्रदर्शन स्थल के आसपास पुलिस ने बड़े पैमाने पर सुरक्षा बल तैनात किए हैं। सप्ताहांत में दर्जनों प्रदर्शनकारियों को कुछ समय के लिए हिरासत में भी लिया गया था।