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नीट प्रश्नपत्र चुहाव के बाद मोदी सरकार झुकी, शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, कक्रोच जनता पार्टी की प्रतिक्रिया क्या है?

समाचार सारांश

सम्पादकीय समीक्षा पश्चात तैयार किया गया।

  • नीट प्रश्नपत्र चुहावट प्रकरण में भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को इस्तीफा सौंपा है।
  • कक्रोच जनता पार्टी की अगुवाई में दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक महीने से जारी आंदोलन के बाद मंत्री प्रधान ने इस्तीफा दिया।
  • प्रश्नपत्र चुहावट में शामिल होने के आरोप में शुक्रवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के ४७ अधिकारी बर्खास्त किए गए थे।

९ सावन, काठमांडू। भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। उनके खिलाफ लगभग एक माह से दिल्ली के जंतर-मंतर पर कक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन चल रहा था।

नीट प्रश्नपत्र चुहावट के मामले ने पूरे देश में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को हवा दी थी।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा क्या?

धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा भेज दिया है, हालांकि अभी उनका इस्तीफा मंजूर होना बाकी है।

उन्होंने लिखा, ‘जंतर-मंतर और देश की परिस्थिति ऐसी बनी कि राष्ट्रविरोधी ताकतें इसका लाभ न उठा सकें, देश की एकता बनी रहे, किसी भी छात्र का भविष्य कानूनी उलझनों में न फंसे और हमारे बच्चे पढ़ाई पर ध्यान दे सकें, इसलिए मैंने सम्माननीय प्रधानमंत्री जी को अपना इस्तीफा भेजा है।’

उन्होंने आगे लिखा, ‘मैं पिछले ४ दशक से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित हूँ। मेरा विश्वास है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही राष्ट्र की नींव है।’

प्रधान ने कहा, ‘मैं देश के युवाओं की आकांक्षा, भावना और न्यायसंगत अपेक्षा का गहरा सम्मान करता हूँ। युवाओं के सपनों को पूरा करना हम सबकी नैतिक प्रतिबद्धता है। माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में देश की सेवा करने का अवसर पाकर मैं आभारी हूँ।’

नीट प्रश्नपत्र चुहावट पर उन्होंने कहा, ‘पहले दिन से ही मैंने जिम्मेदारी ली और स्थिति से कभी नहीं हटे। मेधावी छात्रों के भविष्य को परीक्षा माफिया के कारण खराब होने और अन्याय होने से बचाना मेरी प्रतिबद्धता थी। हालांकि बीच में कई ने बाधाएं डालीं, जिससे मुझे बहुत दुख हुआ।’

कक्रोच जनता पार्टी ने क्या कहा?

कक्रोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा, ‘हमने कर दिखाया। धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया।’

दीपके ने जोड़ा, “प्रधान मंत्री के राजीनामे के बाद भी स्पष्ट हो गया कि घबराना नहीं चाहिए, इस सरकार के सामने झुककर ही राजीनामा कराया जा सकता है। लोकतंत्र में डरना जरूरी नहीं।”

इससे पहले कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल भी प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए थे।

जंतर-मंतर आंदोलन

देश के १०० प्रमुख लेखक, कलाकार और बुद्धिजीवियों ने सार्वजनिक परीक्षा में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में संयुक्त बयान जारी किया था।

बयान में कहा गया था कि प्रश्नपत्र चुहावट और परीक्षा प्रक्रिया में लगातार अनियमितता ने सार्वजनिक संस्थानों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा किया है।

शुक्रवार को दिल्ली में कक्रोच जनता पार्टी और केंद्र सरकार के बीच करीब २ घंटे तक वार्ता हुई थी। सीजेपी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर डटकर बने रहने का संकेत दिया था।

सरकार की ओर से शामिल जेपी नड्डा ने इस्तीफा मांग पर चर्चा के बाद पुनः बातचीत करने का आश्वासन दिया था। शनिवार को भी सरकार से तीसरे दौर की वार्ता से पहले प्रधान के इस्तीफे की मांग ‘नॉन-नेगोशिएबल’ मानी जा रही थी।

कक्रोच जनता पार्टी जून २० से दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रश्नपत्र चुहावट के विरोध में प्रदर्शन कर रही थी। लद्दाख के शिक्षाविद सोनम वांगचुक भी आंदोलन में अनशन पर बैठे थे। फिल्म, शिक्षा, कला, खेल-कूद समेत कई क्षेत्रों के लोगों ने सीजेपी के आंदोलन का समर्थन किया।

सरकार पर राजनीतिक दबाव

जंतर-मंतर आंदोलन के कारण ही नहीं, बल्कि देश के कई हिस्सों में भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर युवा सड़कों पर उतरे थे। संसद के अंदर और बाहर विपक्षी दलों ने सरकार पर दबाव बनाया था।

शनिवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि मेट्रो, दुकानें, इंटरनेट, सड़कें, खाना सब बंद कर दिया लेकिन प्रश्नपत्र चुहाव को रोक न सके।

जंतर-मंतर आंदोलन के बीच राहुल गांधी ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर लिखा, ‘मेट्रो बंद कर दो, सड़कें बंद करो, दुकानें बंद करो, इंटरनेट बंद करो, खाना बंद करो। लेकिन छात्रों की आवाज दबाने के लिए सरकार ने ये कड़े कदम उठाए। आश्चर्यजनक बात है कि मोदीजी ने कहा कि प्रश्नपत्र चुहावट रोक नहीं पाए।’

शनिवार को दिल्ली में सुबह साढ़े सात बजे से १८ मेट्रो स्टेशन बंद थे। कक्रोच जनता पार्टी और समर्थक प्रदर्शन स्थलों के आसपास इंटरनेट अवरुद्ध होने का दावा कर रहे थे।

‘कक्रोच एक बार भीतर आ जाए तो निकलता नहीं’

जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके ने कहा, ‘मंत्री का इस्तीफा हो गया, लेकिन हमारे दो और मांगें बाकी हैं। हम वहां से नहीं जाएंगे। कक्रोच एक बार अंदर पहुंच जाए तो निकलता नहीं। आत्महत्या करने वाले बच्चों के परिवारों को १ करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए और पुलिस के खिलाफ भी कार्रवाई हो।’

दीपके ने कहा, ‘दिल्ली पुलिस याद रखे, वे कक्रोच से लड़ रहे हैं। हमने एक मंत्री का इस्तीफा तो ले लिया, तो आप क्या कहेंगे? छात्रों पर लगे आरोप वापस लेने चाहिए। लोकतंत्र है, हम एक महीने से क्या कर रहे हैं, सब जानते हैं। सरकार को तानाशाही कहा जाता था लेकिन हमने कर दिखाया।’

प्रधान का इस्तीफा सामने आने पर दीपके खुशी से घुटने टेककर जश्न मनाने लगे।

भागवत के बयान के बाद ४ घंटे में प्रधान ने दिया इस्तीफा

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार सुबह दिल्ली में कहा, ‘हम मनमानी होकर सभी के मालिक नहीं बन सकते।’

भागवत ने कहा, ‘आज की पीढ़ी बहुत सवाल पूछती है। आदेश देने के बजाय उनसे संवाद करना चाहिए। उन्हें तर्क समझाकर सही रास्ता दिखाना चाहिए।’

भागवत के इस जवाब के ४ घंटे के अंदर धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया।

पहले नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के ४७ अधिकारी बर्खास्त

शुक्रवार रात नीट प्रश्नपत्र चुहावट मामले में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के ४७ अधिकारी बर्खास्त किए गए थे। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की भी तैयारी चल रही है।

अधिकारियों के अनुसार एनटीए की संरचना में जल्द ही सुधार के लिए और कदम उठाए जाएंगे। सरकार ने कुछ दिन पहले शिक्षा मंत्रालय के दो सचिवों का भी तबादला किया है।

आउटसोर्सिंग प्रणाली में परिवर्तन किया जाएगा और तकनीकी सुधार लागू होंगे, जिससे परीक्षा प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित बनेगी।

एनटीए चार वरिष्ठ जनरल मैनेजर और यूपीएससी के ‘प्रतिभा सेतु’ पोर्टल के माध्यम से १६ युवा पेशेवरों की नियुक्ति करेगा।

(भारतीय समाचार माध्यमों के सहयोग से)