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‘नारदमुनि की तरह अल्पकाल में किसी दूसरी जगह पहुंचना संभव है’ — क्वांटम तकनीक के द्वारा सूचना स्थानांतरण संभव

समाचार संक्षेप

समीक्षा कर तैयार।

  • अमेरिका की आईबीएम कंपनी में कार्यरत नेपाली वैज्ञानिक डॉ. यादवप्रसाद कँडेल क्वांटम फिजिक्स और कम्प्यूटिंग क्षेत्र में महत्वपूर्ण अनुसंधान कर रहे हैं।
  • डॉ. कँडेल ने क्वांटम चिप पर इलेक्ट्रॉन क्यूबिट को इन्टैंगल कर सूचना सफलतापूर्वक टेलीपोर्टेशन करने की तकनीक विकसित करने में अहम भूमिका निभाई है।
  • क्वांटम कंप्यूटर विकास के साथ भविष्य में जटिल बीमारियों की दवाओं की खोज और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में बड़े सुधार की उम्मीद है।

अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर हाल ही में प्रकाशित ‘40 से कम उम्र के 40’ सूची में शामिल डॉ. यादवप्रसाद कँडेल एक प्रसिद्ध क्वांटम वैज्ञानिक हैं। अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर से क्वांटम फिजिक्स में पीएचडी करने वाले वे विश्व की एक बड़ी तकनीकी कंपनी आईबीएम में वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं। क्वांटम विज्ञान क्या है और यह समाज पर वर्तमान तथा भविष्य में किस तरह असर डाल सकता है, इस विषय पर डॉ. कँडेल से हुई बातचीत प्रस्तुत है:

क्वांटम फिजिक्स क्या है? आम भाषा में समझाने का प्रयास करें।

क्वांटम फिजिक्स प्रकृति की सबसे सरल भाषा जैसी है। इसकी खोज लगभग सौ साल पहले हुई थी। प्रकृति अलग-अलग स्तरों पर अलग-अलग तरीके से काम करती है। हम सामान्यतः आकार, वजन और गति के आधार पर दुनिया को समझते हैं।

लेकिन इस ब्रह्मांड में हमसे बड़े वस्तुएं जैसे तारे और गैलेक्सी हैं। वहीं, अति सूक्ष्म कण जैसे अणु, परमाणु, इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन भी होते हैं। इन सूक्ष्म कणों का अजीब व्यवहार सामान्य विज्ञान और “न्यूटन के नियमों” से समझाया नहीं जा सकता। क्वांटम फिजिक्स उन सूक्ष्म कणों की ऊर्जा, अंतःक्रिया और व्यवहार को समझने वाली विज्ञान है।

जैसे मनुष्य अकेले और समूह में अलग तरह से व्यवहार करते हैं, वैसे ही अणु और परमाणु भी अकेले तथा समूह में अलग तरीके से व्यवहार करते हैं। प्रकृति की हर चीज सूक्ष्म कणों से बनी है और उनका आंतरिक स्वभाव समझने के लिए क्वांटम फिजिक्स आवश्यक है। यह प्रकाश और ध्वनि की सूक्ष्म तरंगों का अध्ययन करता है।

जैसे पौराणिक कथाओं में नारदमुनि एक जगह से दूसरी जगह अल्प समय में पहुंच जाते हैं, वैसे ही क्वांटम फिजिक्स में भी सूचना एक स्थान से दूसरे स्थान पर तुरंत पहुंच सकती है, जिसे क्वांटम टेलीपोर्टेशन कहा जाता है। लेकिन यहाँ कोई वस्तु या कण नहीं, केवल सूचना का स्थानांतरण होता है।

शास्त्रीय भौतिकी और क्वांटम फिजिक्स में क्या अंतर है?

भौतिकी को दो मुख्य भागों में बांटा जाता है — शास्त्रीय (क्लासिकल) भौतिकी और क्वांटम फिजिक्स। क्लासिकल फिजिक्स रोजमर्रा की वस्तुओं जैसे फलने-फूलने, बल वार्ता, गति आदि का अध्ययन करता है। परंतु क्वांटम फिजिक्स सूक्ष्म जगत की अनोखी और अद्भुत घटनाओं को समझाता है।

जैसे कि सूर्य का प्रकाश जिसे हम सामान्यत: देखते हैं, लेकिन लेजर की किरण का व्यवहार क्लासिकल फिजिक्स समझा नहीं पाता। आधुनिक तकनीकों को विकसित करने के लिए परमाणु स्तर पर पदार्थ की शुद्धता और मापन क्वांटम फिजिक्स ही संभव बनाता है।

आपकी क्वांटम फिजिक्स में रुचि कैसे विकसित हुई?

नेपाल में क्वांटम फिजिक्स का सैद्धांतिक अध्ययन हो रहा है और मैं हमेशा नई ज्ञान की खोज में उत्सुक था। शुरुआती समय में मेरी रुचि एस्ट्रोनॉमी में थी, पर वहाँ भी अधिकतर चीज़ें क्लासिकल फिजिक्स से समझाई जाती थीं। लेकिन क्वांटम फिजिक्स ने ‘सुपरपोजिशन’, ‘इंटैंगलमेंट’, ‘टेलीपोर्टेशन’ जैसे अवधारणाएं दीं, जो मेरे लिए बहुत ही रोचक थीं।

मैंने अपने प्रयोगशाला में अध्ययन एवं सिमुलेशन कर इस क्षेत्र में अनुसंधान शुरू किया। फिर प्रयोगशाला में काम करके इस क्षेत्र को आगे बढ़ाया।

पीएचडी के अध्ययन में आपने क्या अनुसंधान किया? इससे क्या खुलासा हुआ?

पीएचडी में मेरा मुख्य कार्य क्वांटम चिप डिज़ाइन करना और उससे संबंधित हाइपोथेसिस का परीक्षण करना था। हमारी रोजमर्रा की डिजिटल कंप्यूटर से अलग क्वांटम कंप्यूटिंग में क्यूबिट बनाना और उसका अनुसंधान मेरी मुख्य विषयवस्तु था।

मेरे अनुसंधान का ध्यान इन्टैंगलमेंट और टेलीपोर्टेशन पर केंद्रित था। सिलिकॉन वेफर में मौजूद इलेक्ट्रॉन क्यूबिट के गुण पहचानना कठिन था, इसलिए मैंने ‘स्क्वायर ग्रिड’ का उपयोग कर इलेक्ट्रॉन को नियंत्रित करते हुए क्यूबिट को इंटैंगल करने का तरीका विकसित किया। टेलीपोर्टेशन तकनीक के माध्यम से एक क्यूबिट की सूचना दूसरे क्यूबिट में सफलतापूर्वक ट्रांसफर कि गई।

आपका पीएचडी अनुसंधान ‘नेचर’ जर्नल में प्रकाशित हुआ, और तकनीक विकसित हुई। इसका प्रभाव क्या होगा?

सामान्य कंप्यूटर में सूचना की स्थिति देखने पर कोई परिवर्तन नहीं होता, लेकिन क्वांटम कंप्यूटर में क्यूबिट की स्थिति मापते समय डिकोहेरेन्स होता है। इसलिए क्वांटम सूचना सीधे तारों से नहीं भेजी जा सकती, और ‘नो-क्लोनिंग थ्योरम’ की वजह से उसकी कॉपी भी नहीं हो सकती। ऐसे में इंटैंगल्ड कणों का उपयोग करके सूचना को नष्ट न होने वाले तरीके से टेलीपोर्ट किया जाता है। यह तकनीक नए क्वांटम कंप्यूटरों में डेटा ट्रांसफर का आधार बनेगी।

अभी बने क्वांटम कंप्यूटर क्या कार्य कर रहे हैं और भविष्य में संभावनाएं क्या हैं?

डिजिटल कंप्यूटर दैनिक कार्यों के लिए पर्याप्त हैं, लेकिन भारी कैलकुलेशन और गहरे शोध के लिए क्वांटम कंप्यूटर आवश्यक है। यह जटिल रासायनिक प्रक्रियाओं का सिमुलेशन कर सकता है और जलवायु परिवर्तन के अध्ययन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सुपर कंप्यूटर जो केवल अनुमान लगा सकते हैं, उन समस्याओं का क्वांटम कंप्यूटर बेहतर हल निकाल रहा है। 118 परमाणुओं में केवल हाइड्रोजन के गुण ठीक से जाने गए हैं, अन्य के लिए क्वांटम कंप्यूटर दवा विकास और नए पदार्थों के निर्माण में सहायक होगा।

अभी क्वांटम कंप्यूटर को डिजिटल कंप्यूटर का विकल्प नहीं, बल्कि मुश्किल कार्यों के समाधान के लिए उपयोग किया जाता है।

मेरा विश्वास है कि इसका पहला व्यावहारिक उपयोग नई दवाओं के विकास में होगा। यह साइबर सुरक्षा, वित्तीय बाजार और व्यापार को प्रभावित करेगा।

आप आईबीएम में वर्तमान में किस प्रकार के शोध कर रहे हैं?

आईबीएम में मैं विश्वविद्यालय के प्रयोगशालाओं जैसी रिसर्च करता हूँ। बड़ी तकनीकी कंपनियां भविष्य की तकनीकों की खोज करती हैं। मैं क्वांटम कम्प्यूटिंग की चुनौतियों और आवश्यक तकनीकों में भौतिकी स्तर पर अनुसंधान करता हूँ।

क्या आपने पीएचडी का अनुसंधान यहीं जारी रखा है?

हां, वही अनुसंधान का विस्तार है। मैं अभी प्रोडक्ट डेवलपमेंट नहीं कर रहा, बल्कि बुनियादी अनुसंधान में लगा हूँ, जो भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों के लिए मार्गदर्शक होगा।

क्वांटम कम्प्यूटिंग में सरकारी और निजी क्षेत्र का निवेश कैसा है?

क्वांटम अनुसंधान 1990 के दशक से शुरू हुआ। शुरुआत में सरकारी और विश्वविद्यालय निवेश करते थे। अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा है। अमेरिका, चीन, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया बड़े बजट आवंटित कर चुके हैं। आईबीएम अगले पांच वर्षों में 10 अरब डॉलर खर्च करने का ऐलान कर चुका है।

क्वांटम कम्प्यूटिंग की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है?

सबसे बड़ी उपलब्धि रसायनों के सिमुलेशन की क्षमता है। डिजिटल सुपर कंप्यूटर जो हल नहीं कर पाते, उसमें क्वांटम कंप्यूटर ने वृद्धि की है। इससे जटिल बीमारियों के उपचार खोजने और नई तकनीकों के विकास में मदद मिलेगी।

यह स्वास्थ्य सेवा और अर्थव्यवस्था में किस प्रकार योगदान देगा?

आर्थिक और रणनीतिक महत्व के कारण विश्व की महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा शुरू हो चुकी है। प्रौद्योगिकी निर्यात पर नियंत्रण बढ़ा है। 1960 के चंद्र मिशन जैसे अब पहला पूर्ण क्वांटम कंप्यूटर बनाने की होड़ लगी है।

यह नई आर्थिक संरचना और प्रौद्योगिकी निर्माण में एक बड़ा क्रांति होगी। एआई जैसे क्वांटम कम्प्यूटिंग भी भविष्य में बड़ा प्रभाव डालेगा।

पूर्ण व्यावहारिक रूप कब आएगा?

आईबीएम की योजना के अनुसार 2029 में नमूना कंप्यूटर बनेगा जो पर्यावरणीय प्रभावों से डेटा को सुरक्षित रखेगा। 2033 तक पूर्ण क्षमता वाले बड़े क्वांटम कंप्यूटर विकसित होंगे।

क्या आप उसी रोडमैप पर काम कर रहे हैं?

हां, मैं बुनियादी भौतिकी अनुसंधान टीम से जुड़ा हूँ। 2019 में Google ने क्वांटम सुप्रीमसी का दावा किया था, अब उद्योग क्वांटम एडवांटेज की ओर बढ़ रहा है।

क्या क्वांटम कम्प्यूटिंग से लाभ मिलने लगे हैं?

हाँ, अब लाभ लेना शुरू हो गया है। आईबीएम के क्वांटम प्रोसेसर क्लाउड से उपलब्ध हैं। 2033 तक हजारों क्यूबिट प्रणाली विकसित होंगी।

आईबीएम प्रयोगशाला का माहौल कैसा है?

टीजे वाटसन रिसर्च सेंटर का पुराना और समृद्ध इतिहास है। यहां से डेबिट क्रेडिट कार्ड के ‘मैग्नेटिक स्वाइप’ और डिजिटल कंप्यूटिंग के शुरुआती उपकरण विकसित हुए हैं। रिसर्च में परिणामों को जल्दबाजी नहीं होती, पर नई खोजों के प्रति उत्साह रहता है।

क्वांटम कम्प्यूटिंग में अब तक कौन-कौन सी अनोखी घटनाएं मिली हैं?

क्वांटम फिजिक्स के मूलभूत सिद्धांत अनोखे हैं। उदाहरण के लिए, डिजिटल कंप्यूटर में स्टोर किया गया ‘वन’ हमेशा वैसा ही रहता है, जबकि क्वांटम क्यूबिट की स्थिति मापने पर बदल जाती है।

इसी तरह क्वांटम कणों में तरंग और कण दोनों के गुण होते हैं, जिससे इलेक्ट्रॉन विद्युत क्षेत्र की बाधा को टनलिंग कर पार कर सकता है।

और जैसा कि पौराणिक कथा बताती है, किसी सूचना को बिना तार या भौतिक माध्यम से तुरंत एक जगह से दूसरी जगह भेजा जा सकता है, जिसे क्वांटम टेलीपोर्टेशन कहा जाता है।

विज्ञान और तकनीक में कोई भौगोलिक या राजनीतिक सीमा नहीं होती। नेपाली वैज्ञानिक और तकनीकी कार्यकर्ता विश्व स्तरीय अग्रणी तकनीक और क्वांटम कम्प्यूटिंग में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

इंटैंगल्ड दो सूक्ष्म कणों को विश्व के दो अलग कोनों में रखा जाए, तब भी बिना किसी तार या भौतिक माध्यम के सूचना स्थानांतरण संभव है। यह ब्लूटूथ या वाईफाई जैसा नहीं है, क्योंकि क्वांटम टेलीपोर्टेशन में बीच का कोई माध्यम नहीं होता और कोई अशांति नहीं होती।

नेपाल में आधारभूत से उच्चतम अनुसंधान तक विद्यार्थी और वैज्ञानिकों की स्थिति कैसी है?

विज्ञान और तकनीक में कोई राजनीतिक सीमा नहीं है। नेपाली वैज्ञानिक विश्वस्तरीय तकनीक और उच्च अनुसंधान में बड़ा योगदान दे रहे हैं।

नेपाल में उच्च जोखिम और निवेश वाले अनुसंधान की क्षमता न होने से अधिकांश वैज्ञानिक विदेश में हैं। पर वर्तमान में नेपाल मूल के वैज्ञानिक विश्व मंच पर गर्व करने के योग्य भूमिका निभा रहे हैं।

पूर्ण विकास के बाद आर्थिक और अवसंरचना कमजोर देश नेपाल इस तकनीक से कैसे लाभ उठा सकता है?

कोई भी तकनीक दो पक्षों में होती है — एक निर्माताओं का समूह और दूसरा उपयोगकर्ताओं का। नेपाल हार्डवेयर निर्माण नहीं करता, पर विश्वविद्यालयों में सैद्धांतिक अध्ययन और सॉफ्टवेयर विकास कर सकता है। क्लाउड के जरिए तकनीक उपलब्ध होने से नेपाल में ही अनुसंधान व विकास संभव होगा, जो देश के लिए बड़ा लाभ होगा।

तो क्या अभी विश्वविद्यालयों को तैयारी करनी चाहिए?

हां, अगर अभी तैयारी नहीं होगी तो विलंब होगा और तकनीक पकड़ने में समय लगेगा।

व्यक्तिगत या संस्थागत तौर पर नेपाल में योगदान देने की कोई योजना है?

आईबीएम में रहते हुए मैं सीधे नहीं, बल्कि कंपनी और अनुसंधान संस्थाओं के साथ सहयोग से संयुक्त प्रयास कर सकता हूँ। क्लाउड पर क्वांटम कंप्यूटर के उपयोग में शुल्क लगता है, पर अनुसंधानकर्ताओं को फंडिंग से मुफ्त उपयोग का अवसर मिल सकता है। इस तरह नेपाल के अनुसंधानकर्ताओं को पहुँच दिलाने और मदद करने की पहल हो सकती है।

भविष्य में नेपाली समाज को योगदान देने की क्या योजना है?

अभी मैं प्रयोगात्मक अनुसंधान में लगा हूँ। 5 से 10 वर्षों में विशेषज्ञता लेकर नेपाल लौटने का विचार है। अनुसंधान केंद्र खोलने, विश्वविद्यालय में प्रोफेसर या सहयोगी के रूप में नई पीढ़ी तैयार करने की योजना है।

हम जब पढ़ते थे तो प्रोफेसरों के अनुभव सुनकर प्रेरणा मिलती थी। मैं नेपाल आकर नई पीढ़ी को मार्गदर्शन देना चाहता हूँ।