
विपत्ति के दौरान आयल निगम और उद्योगियों के सहयोग से एलपी गैस के दाम बढ़े
कृष्णभिर के भूस्खलन से पृथ्वी राजमार्ग अवरुद्ध होने के कारण काठमांडू उपत्यका में खाना पकाने के लिए उपयोग होने वाली एलपी गैस की कीमत प्रति सिलेंडर 1,005 रुपये 38 पैसे बढ़ाई गई है। उद्योग संघ के निर्णय के अनुसार अब काठमांडू उपत्यका में गैस की कीमत प्रति सिलेंडर 2,165 रुपये 38 पैसे होगी। उद्योगियों ने बताया कि तराई क्षेत्र में रिफिल कर वैकल्पिक मार्ग से गैस लाने के कारण ढुलाई लागत बढ़ गई है, जिससे उपभोक्ताओं को कुछ अतिरिक्त भार उठाना पड़ रहा है। (18 भदौ, काठमांडू)
कृष्णभिर में हुए भूस्खलन से पृथ्वी राजमार्ग अवरुद्ध होने के बाद वैकल्पिक ढुलाई महंगी होने के कारण नेपाल आयल निगम की सहमति से उद्योगियों ने खाना पकाने वाली एलपी गैस के दाम बढ़ाए हैं। नेपाल आयल निगम ने एलपी गैस की कीमत प्रति सिलेंडर 2,060 रुपये निर्धारित की थी, लेकिन उद्योगियों ने ढुलाई भाड़ा जोड़ने के कारण कीमत प्रति सिलेंडर 105 रुपये 38 पैसे बढ़ाई है। 18 भदौ को हुई वार्षिक साधारण सभा के निर्णय के अनुसार, काठमांडू उपत्यका में एलपी गैस के दाम बढ़ाने की जानकारी संघ ने विज्ञप्ति द्वारा दी है।
उद्योग संघ के निर्णय के अनुसार अब काठमांडू उपत्यका में गैस की कीमत प्रति सिलेंडर 2,165 रुपये 38 पैसे होगी। कृष्णभिर के भूस्खलन के कारण वैकल्पिक मार्ग से गैस लाने में लागत बढ़ने से उपभोक्ताओं को अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ रहा है, यह निर्णय इसलिए लिया गया है, संघ के पूर्व अध्यक्ष शिवप्रसाद घिमिरे ने बताया। उन्होंने कहा, ‘पहले बुलेट से गैस ढुलाई होती थी, एक बुलेट में 1,250 सिलेंडर आता था, लेकिन तराई में बोतलिंग कर वैकल्पिक माध्यम से ढुलाई महंगी पड़ रही है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘ढुलाई भाड़ा 180 रुपये प्रति सिलेंडर है, जिसमें उपभोक्ताओं को 105 रुपये अतिरिक्त भुगतान करना होगा।’
आयल निगम के साथ सहमति के अनुसार गैस के दाम बढ़ाए गए हैं, ऐसा उद्योगियों ने दावा किया है। काठमांडू उपत्यका में स्थित गैस उद्योगों को तराई क्षेत्र के उद्योगों से रिफिल कराकर गैस लाने की बाध्यता होने के कारण ढुलाई भाड़ा बढ़ाया गया है, संघ ने बताया। गैस के खरीद मूल्य में वृद्धि नहीं हुई है, केवल ढुलाई लागत बढ़ने की वजह से उपभोक्ता मूल्य बढ़ा है, नेपाल गैस उद्योग के संचालक गोकुल भंडारी ने कहा है। उन्होंने कहा, ‘आयल निगम हमें काठमांडू तक का भाड़ा नहीं देता, केवल तराई तक का ही देता है।’ संचालक भंडारी ने कहा, ’50 किलोमीटर से अधिक दूरी पर गैस ढुलाई के लिए अतिरिक्त भाड़ा लेने की व्यवस्था निगम के नियमों और सहमति के तहत हमें मिली है, इसलिए प्रति सिलेंडर 105 रुपये वृद्धि की गई है।’
उनके अनुसार उद्योगियों का वास्तविक खर्च 200 रुपये से अधिक है, लेकिन निगम के नियमों के अनुसार 105 रुपये से अधिक भाड़ा लेना संभव नहीं है। उन्होंने कहा, ‘इसलिए घाटा सहन करते हुए भी हमें गैस लानी पड़ती है।’ गैस की कीमत वृद्धि पर आयल निगम के प्रवक्ता मनोज ठाकुर ने कहा कि खाना पकाने वाली एलपी गैस की कीमत उद्योग क्षेत्र से 50 किलोमीटर दूर तक के लिए निर्धारित की गई है। ठाकुर के अनुसार, 50 किलोमीटर से अधिक दूरी पर गैस ढुलाई के लिए उद्योगी स्वतंत्र रूप से ढुलाई भाड़ा जोड़ सकते हैं। ‘निगम द्वारा निर्धारित मूल्य उद्योग से 50 किलोमीटर दूरी तक के लिए होता है, उससे आगे उद्योगी अपने अनुसार ढुलाई भाड़ा भी जोड़ सकते हैं,’ ठाकुर ने कहा।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उद्योगी बिना निगम की सहमति के ढुलाई भाड़ा बढ़ा सकते हैं, तो ठाकुर ने बताया कि यह कोई नई व्यवस्था नहीं बल्कि पुराने नियम हैं। ‘यह कोई नई बात नहीं है, यह नियम लंबे समय से लागू है,’ उन्होंने बताया। ‘जैसे विराटनगर के उद्योग 50 किलोमीटर से अधिक दूरी पर गैस भेजते हैं, वे ढुलाई भाड़ा अपनी जिम्मेदारी में जोड़ते हैं।’