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नेपाल का मानसून: हवा पश्चिम से पूर्व की ओर बहने लगी, क्या मानसून समाप्त होने वाला है?

लगातार तीन दिनों की बारिश और एक सप्ताह बीतने के साथ ही नेपाल में मानसून निष्क्रिय होने के कई मानदंड पूरे हो चुके हैं, अधिकारियों ने कहा है। नेपाल में औसतन मानसून 2 अक्टूबर के आसपास समाप्त होता है। पिछले वर्ष यह 10 अक्टूबर तक जारी रहा था, लेकिन इस वर्ष मानसून कितने दिनों तक सक्रिय रहेगा इसका अभी आधिकारिक घोषणा बाकी है। जल तथा मौसम विज्ञान विभाग की प्रवक्ता विभूति पोखरेल ने मौसमी प्रणाली, हवाओं में जलवाष्प की स्थिति और पश्चिमी हवाओं के प्रभाव की निरंतर निगरानी और विश्लेषण हो रहा है, साथ ही आगामी सप्ताह में मानसून समाप्ति की औपचारिक घोषणा की जानकारी दी। उन्होंने कहा, “हमारे वायुमंडल में जलवाष्प थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बची हुई है, इसलिए लगातार निगरानी कर रहे हैं।”
भारतीय मौसम विभाग ने नेपाल के पूर्वी क्षेत्रों में 10 अक्टूबर से मानसून निष्क्रिय होने का प्राथमिक पूर्वानुमान प्रस्तुत किया है। इसके साथ ही दक्षिण और पूर्वी भारत में 15 अक्टूबर तक मानसून कायम रहने का प्रारंभिक अनुमान जारी किया गया है। त्रिभुवन विश्वविद्यालय के जल तथा मौसम विज्ञान विभाग के सहप्राध्यापक मदन सिग्देल ने बताया कि नेपाल के मानसून में पश्चिमी हवा का प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “भारत के दिल्ली तक मानसून समाप्त हो चुका है। पूर्व से पश्चिम की ओर आने वाली हवा कमजोर हो गई है जबकि पश्चिम से पूर्व की ओर हवा मजबूत हो रही है। पूर्वी क्षेत्रों में नई मौसमी प्रणाली के विकसित होने के संकेत नहीं हैं।”
मानसून समाप्ति के संकेत क्या हैं? बारिश में कमी मुख्य संकेत है कि मानसून समाप्त हो रहा है। लेकिन जल तथा मौसम विज्ञान विभाग के मौसमविद् अशोक बखरेल के अनुसार मानसून में वायुमंडल की आर्द्रता, हवा की दिशा और दिन-रात के तापमान का भी संबंध होता है। उन्होंने कहा, “हमारे क्षेत्र में आर्द्रता घट रही है, जो पूर्व की ओर बढ़ रही है। साथ ही हवा की दिशा भी बदल रही है। मानसून के दौरान हवा पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है, अब यह पश्चिम से पूर्व की दिशा में लौटने लगी है।” नेपाल में मानसून पश्चिमी हिस्सों से कमजोर होकर धीरे-धीरे पूर्वी हिस्सों से निष्क्रिय हो रहा है।
बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न होने वाली जलवाष्पयुक्त हवा नेपाल के निकट मानसून के दौरान भारी वर्षा लाती है। लेकिन सर्दियों में बंगाल की खाड़ी में जलवाष्प बनने की प्रक्रिया कमजोर हो जाती है और भूमध्य सागर, कास्पियन सागर तथा अरब सागर की ओर से आने वाली हवाएं प्रभावशाली होती हैं, जिसकी वजह से नेपाल में वर्षा कम होती है, मौसमविद् बताते हैं। सहप्राध्यापक सिग्देल कहते हैं, “किसी भी जलवायु प्रणाली के लिए सूर्य मुख्य संकेतक होता है। सूर्य के तापमान में वृद्धि या कमी और दिन के समय की लंबाई वाष्पीकरण को प्रभावित करती है।”
मानसून का अंत केवल पश्चिमी हवा के फैलाने से नहीं होता, बंगाल की खाड़ी से आने वाला जलवाष्प भी कमजोर होना आवश्यक है। जब मानसून नेपाल से बाहर निकलता है, तब पश्चिमी हवा नेपाल पर अधिक प्रभाव नहीं डालती क्योंकि यह हवा तो दबाव डालती है लेकिन उसमें आर्द्रता कम होती है। नेपाल में दिसंबर से पश्चिमी हवा सक्रिय होती है, जिसे हम सर्दी कहते हैं। अक्टूबर और नवंबर को हामी ‘पोस्ट मानसून’ भी कहते हैं। इस दौरान बंगाल की खाड़ी से आने वाली जलवाष्पयुक्त हवा कम होने के बावजूद पश्चिमी हवा पूरी तरह सक्रिय नहीं होती। मौसमविद् बखरेल के अनुसार मानसून समाप्ति पर दिन और रात के तापमान में भी अंतर कम होने लगता है।
पश्चिमी समुद्र से आने वाली हवा जब नेपाल पहुँचती है तो वह ठंडी हो चुकी होती है और ठंडी हवा में कम जलवाष्प होता है। “मानसून समाप्ति के समय सूखी हवा आती है। यह हवा दूर से आती है और जलवाष्प साथ नहीं लाती। जब यहां की अन्य मौसमी प्रणालियां बंद हो जाती हैं, तभी बारिश में कमी आती है,” मौसमविद् अशोक बखरेल ने कहा। “हम बंगाल की खाड़ी के करीब होने के कारण मानसून में बारिश होती है। यदि हम अरब सागर के करीब होते तो ठंडे मौसम में अधिक बारिश होती।”
लेकिन पश्चिमी समुद्र से आई हवा कुछ न कुछ जलवाष्प जमा करते हुए धीरे-धीरे विकसित होती मौसमी प्रणाली से सर्दियों में भी नेपाल में वर्षा करती है। पिछले वर्ष सर्दियों में भारत से प्रत्यक्ष प्रभावित नेपाल इस वर्ष धूप वाला दशहरा मनाने की संभावना है, मौसमविद् बताते हैं। इस वर्ष मानसून पिछले छह वर्षों की तुलना में देर से आया था, 19 जून को बस नेपाल में दाखिल हुआ था। प्रशांत महासागर में विकसित हुए एल निन्यो प्रणाली के कारण मानसून कम वर्षा करेगा, जबकि वर्षा की माप अभी बाकी है, विभाग ने बताया। सामान्यतया मानसून सक्रिय रहने पर 1,500 से 1,600 मिलीमीटर वर्षा होती है। नेपाल में मानसून शुरू और समाप्ति का समय हमेशा स्थिर नहीं रहता है। कुछ वर्षों में मानसून की अवधि छोटी भी रही है। वर्ष 1979 में 24 जून को शुरू हुआ मानसून 73 दिन बाद 4 सितंबर को समाप्त हुआ था जबकि वर्ष 2022 में 5 जून को शुरू हुआ मानसून 134 दिन बाद 16 अक्टूबर को समाप्त हुआ। इस वर्ष मानसून की समाप्ति बंगाल की खाड़ी में विकसित प्रणाली के कारण कुछ दिनों तक देश के विभिन्न हिस्सों में वर्षा हुई।