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भारत में 30 लाख से अधिक कर्मचारी परिचालित होते हुए ‘महान जनगणना’ शुरू

18 चैत्र, काठमाडौं। विश्व की सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश भारत में आज बुधवार से ‘महान जनगणना’ की शुरुआत हो गई है। यह प्रक्रिया जो 2021 में होनी थी, कोविड-19 महामारी के कारण टलकर 2026 में शुरू हुई है। एक वर्ष तक चलने वाली इस जनगणना में भारत भर में 30 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी और गणक नियुक्त किए गए हैं। इस जनगणना से भारत की कल्याणकारी योजनाओं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के नक्शे में बदलाव की उम्मीद की जा रही है।

पहले चरण में आगामी एक माह तक परिवारों के विवरण, निवास की स्थिति और भौतिक पूर्वाधार का आंकलन किया जाएगा। आधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाते हुए इस बार निवासियों को स्मार्टफोन एप के माध्यम से ऑनलाइन विवरण भरने की सुविधा भी दी गई है। इस वर्ष की जनगणना का सबसे विवादित पक्ष ‘जातीय विवरण’ का संकलन है। सितंबर से शुरू होने वाले दूसरे चरण में सामाजिक, आर्थिक और जातीय स्थिति पर विस्तृत सर्वेक्षण किया जाएगा।

भारत में 1931 के बाद पहली बार इतनी व्यापक रूप से जातीय आंकड़ा संकलित किया जा रहा है। पूर्व की सरकारें जातीय गणना से सामाजिक तनाव बढ़ने की आशंका के कारण इसे रोकती थीं। लेकिन अब समर्थक वर्ग यह तर्क दे रहे हैं कि लक्षित वर्गों को सरकारी सुविधाएं पहुँचाने और आरक्षण के सही कार्यान्वयन के लिए यह आंकड़ा आवश्यक है। आलोचक इसे विश्व शक्ति बनने की राह पर अग्रसर देश में जातीय विभाजन को बढ़ावा देने वाला मानते हैं।

जनगणना के परिणामों से भारत की लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों की संख्या में बदलाव हो सकता है। 2023 के कानून के अनुसार विधानसभा में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, इसलिए सीटों की संख्या बढ़ने पर महिला प्रतिनिधित्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। 2011 की अंतिम जनगणना में भारत की जनसंख्या 121 करोड़ थी। वर्तमान में भारत की जनसंख्या 140 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है, जिससे भारत चीन को पछाड़कर विश्व का सबसे जनसंख्या वाला देश बन चुका है।

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