
भ्रष्टाचार नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय रणनीतिक योजना के मसौदे में सेना, न्यायपालिका और कूटनीतिक निकायों को शामिल करने का प्रस्ताव
नई सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ राष्ट्रीय रणनीतिक योजना का मसौदा प्रस्तुत किया है, जिसमें नेपाली सेना, न्यायालय और कूटनीतिक कार्यालयों को भी भ्रष्टाचार और गैरकानूनी संपत्ति अर्जन के आरोपों की जांच के दायरे में लाने हेतु कानून संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। इस प्रस्तावित मसौदा दस्तावेज में अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ऐन २०४८ और सैनिक ऐन २०६३ सहित लगभग दो दर्जन कानूनों के संशोधन का प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है।
साथ ही, स्वार्थ के द्वंद्व संबंधी कानून, गैर सरकारी और निजी क्षेत्रों में होने वाले भ्रष्टाचारजन्य कार्य नियंत्रण से जुड़े कानून सहित आठ नए कानून लाने का उल्लेख भी किया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने हाल ही में नागरिकों से राय सुझाव माँगे गए इस मसौदा दस्तावेज को मन्त्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित किया जाएगा और उसके अनुसार सरकार के भ्रष्टाचार नियंत्रण संबंधी प्रयास आगे बढ़ेंगे, यह भी बताया है।
अख्तियार और विदेशी कूटनीतिज्ञों को देश निकाले जाने सहित के मुद्दों को समेटते हुए नेपाल में वर्तमान में भ्रष्टाचार निवारण क्षेत्र में कार्यरत १३ संघ संस्थाएं हैं, जिनके कार्यक्षेत्र में भ्रष्टाचार तथा संपत्ति शुद्धिकरण की जांच और अभियोजन के साथ-साथ संबंधित अभियोगों का समाधान करने की जिम्मेदारियां शामिल हैं। नागरिकों से प्राप्त राय के आधार पर अब मन्त्रिपरिषद अंतिम रूप देगा और उक्त राष्ट्रीय कार्य योजना में ऐसे अपराधों को नियंत्रण के लिए उठाए जाने वाले नीतिगत कदम, जिम्मेदार निकाय और समयावधि का भी उल्लेख होगा।
इस रणनीतिक कार्ययोजना के मसौदे में अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ऐन २०४८ में संशोधन करते हुए नीतिगत भ्रष्टाचार और नेपाल में स्थित विदेशी संघ संस्थाओं के पदाधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों को भी जांच के दायरे में लाने का उल्लेख किया गया है। कानून, न्याय तथा संसदीय व्यवस्था मंत्रालय और अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग को विधायी संशोधन के लिए प्रधानमंत्री और मन्त्रिपरिषद कार्यालय से सहयोग व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं और इस प्रक्रिया को एक वर्ष के भीतर पूरा करने का समय सीमा निर्धारित की गई है।