
वैद्यखाना अब ‘जीएमपी’ मानक के अनुसार औषधि उत्पादन की तैयारी में
सिंहदरबार स्थित वैद्यखाना इस वर्ष शिलाजित और मिमियाल जैसी आयुर्वेदिक औषधियों का उत्पादन विश्व स्वास्थ्य संगठन के जीएमपी मानकों के अनुसार करने की तैयारी कर रहा है। वैद्यखाना चालू आर्थिक वर्ष में १०३ प्रकार की औषधियां उत्पादित कर रहा है, जो योजना से अधिक है, ऐसा कार्यकारी निदेशक डॉ. प्रदीप केसी ने बताया। पिछले पांच वर्षों से घाटे में चल रहे वैद्यखाना को औषधि उत्पादन बढ़ाकर लाभ में लाया गया है तथा वार्षिक ५५ हजार किलो कच्चे माल से औषधि उत्पादन हो रहा है। २ वैशाख, काठमाडौं।
सिंहदरबार वैद्यखाना से उत्पादित होने वाली आयुर्वेदिक औषधियों को विश्व स्वास्थ्य संगठन के कुशल उत्पादन अभ्यास (जीएमपी) मानकों के अनुरूप बनाने की तैयारी की जा रही है। समिति के कार्यकारी निदेशक डॉ. प्रदीप केसी ने बताया कि शीघ्र ही वैद्यखाना से उत्पादित औषधि जीएमपी मानकों के अंतर्गत तैयार की जाएगी। उनके अनुसार इस वर्ष शिलाजित, मिमियाल आदि औषधियों का निर्माण जीएमपी मानकों के तहत किया जाएगा। आगामी आर्थिक वर्ष से चूर्ण और टैबलेट का भी जीएमपी मानकों के अनुसार उत्पादन होगा।
कार्यकारी निदेशक केसी ने बताया कि जब से वे समिति के अध्यक्ष बने हैं, तब से औषधि उत्पादन में वृद्धि हुई है। वे कहते हैं कि वर्तमान में १०३ प्रकार की औषधियां उत्पादित हो रही हैं। “हम लक्ष्य से अधिक औषधि का उत्पादन कर रहे हैं। चालू वर्ष में ८४ औषधियां बनाना लक्ष्य था, लेकिन हमने १०३ प्रकार की औषधियां उत्पादन की हैं,” उन्होंने कहा, “सभी के सहयोग से वैद्यखाना में औषधि उत्पादन बढ़ाया गया है।” वित्त वर्ष २०८१/८२ में ७७ औषधियां बनाने का लक्ष्य था, लेकिन ४० प्रकार ही उत्पादित हो पाई थीं। इसी प्रकार, वित्त वर्ष २०८०/८१ में १४ प्रकार, २०७९/२०८० और २०७८/२०७९ में १५ प्रकार तथा २०७७/०७८ में २५ प्रकार की औषधियां उत्पादन में थीं। कार्यकारी निदेशक केसी ने यह भी बताया कि पिछले पांच वर्षों के घाटे के बाद वैद्यखाना को उत्पादन बढ़ाकर लाभ में लाया गया है। वर्तमान आर्थिक वर्ष में वार्षिक ५५ हजार किलो कच्चे माल से औषधि बनाई जा रही है। वैद्यखाना ने अब तक १०१ खरीद आदेश पर अनुबंध किया है और ८५ कार्य पूर्ण कर चुका है।