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स्वास्थ्य मन्त्रालय में वरिष्ठ कर्मचारियों के पदस्थापन और नई नियुक्तियां

स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मन्त्रालय ने एघारौं स्तर के वरिष्ठ कर्मचारियों के पदस्थापन, नियुक्ति और काज वापसी की प्रक्रिया शुरू की है। स्वास्थ्यमन्त्री निशा मेहताले तीन मुख्य महाशाखाओं के प्रमुखों का पुन: संयोजन कर कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। काज प्रणाली के दुरुपयोग को रोकने के लिए २०५३ के ऐन के अनुसार एक माह से अधिक समय तक काज पर रखने पर प्रतिबंध लगाया गया है। ३ वैशाख, काठमाडौं।

स्वास्थ्य मन्त्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, एघारौं स्तर के शीर्ष कर्मचारियों के पदस्थापन, नियुक्ति और काज वापसी का कार्य किया गया है। स्वास्थ्यमन्त्री निशा मेहताले मन्त्रिस्तरीय निर्णय के तहत तीन प्रमुख महाशाखा के निदेशकों को आवंटित किया है। इन महाशाखाओं में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रशिक्षण केन्द्र की निदेशक यशोदा अर्याल, महामारी विज्ञान तथा रोग नियंत्रण महाशाखा के निदेशक डा. रोशन न्यौपाने और हाल ही में एघारौं स्तर पर प्रमोशन पाए डा. गुणनिधि शर्मा शामिल हैं। अभी तक इनके कार्यस्थलों के बारे में औपचारिक निर्णय जारी होना बाकी है, मन्त्रालय सूत्रों ने जानकारी दी है।

सरुवा प्रक्रिया के तहत मंत्रालय में कार्यरत कुछ वरिष्ठ चिकित्सकों को विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में काज वापसी के लिए भेजा गया है। नीति तथा योजना महाशाखा में कार्यरत डा. चुमनलाल दास को नारायणी अस्पताल, पर्सा में काज वापस किया गया है। स्वास्थ्य समन्वय महाशाखा के डा. भीम सापकोटा को हेटौँडा स्थित कीटजन्य प्रयोगशाला में तैनात किया गया है। इससे भी, गुणवत्ता मापन और निरीक्षण महाशाखा के प्रमुख डा. सरोज शर्मा को वीर अस्पताल में काज वापसी दी गई है। स्वास्थ्य बीमा बोर्ड के कार्यकारी निर्देशक डा. कृष्णप्रसाद पौडेल को काज वापसी के बाद गजेन्द्र नारायण सिंह अस्पताल में स्थानांतरित किया गया था, लेकिन चूंकि वे वर्तमान में बोर्ड के कार्यकारी प्रमुख हैं, इसलिए उन्हें तत्काल बोर्ड में ही कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।

मन्त्रालय ने कार्यसम्पादन को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। पहले कागजी नियुक्तियों को भी सशक्त पदों पर स्थापित कर सेवा विस्तार किया जाता था। कर्मचारी अपने सत्ता और पहुंच का दुरुपयोग करते हुए काज प्रणाली का व्यापक रूप से अपव्यवহার करते रहे हैं। कार्यालयों पर लंबे समय तक कब्जा बनाए रखने की प्रवृत्ति भी प्रचलित थी। स्वास्थ्य सेवा ऐन २०५३ में एक माह से अधिक समय तक काज पर रहने पर प्रतिबंध रखा गया है, लेकिन पिछले स्वास्थ्य मंत्रियों द्वारा इस प्रावधान का उल्लंघन होता रहा है।

“किसी भी कर्मचारी को एक वर्ष के भीतर ३० दिनों से अधिक किसी कार्यालय में काज पर तैनात नहीं किया जा सकता,” ऐन में स्पष्ट रूप से कहा गया है, “यदि कर्मचारी को निर्धारित समय से अधिक काज पर रखा गया तो उसे दिए गए वेतन-भत्ते की राशि पदाधिकारी के वेतन-भत्ते से कटौती कर भरनी होगी।” वहीं, ऐन में कुछ विशेष परिस्थितियाँ दी गई हैं जिनमें काज समय सीमा से अधिक हो सकती है: (क) प्राकृतिक आपदा या संक्रामक रोग उपचार के लिए सरकार के आदेशानुसार प्रशिक्षण, संगोष्ठी, कार्यशाला या राष्ट्रीय कार्यक्रमों में भागीदारी; (ख) किसी नियुक्ति पद पर स्थायी नियुक्ति आवश्यक हो; (ग) कार्यालय प्रमुख या इकाई कार्यालय प्रमुख के रिक्त पदों को तुरंत भरना संभव न हो।

मंत्रालय के पूर्व अधिकारियों के अनुसार, इस प्रणाली के दुरुपयोग की शुरुआत राजेन्द्र महतो के स्वास्थ्य मंत्री कार्यकाल से हुई थी। उनके कार्यकाल के दौरान काज प्रणाली को व्यवहार में लाने का प्रयास हुआ था और उसके बाद के सभी मंत्रियों ने इसे जारी रखा। दुरुपयोग के कारण ‘सही व्यक्ति को सही नौकरी’ के सिद्धांत में बाधा आई। लेकिन मेहताजी के ‘साहसिक’ कदम से योग्य स्वास्थ्यकर्मियों को पदों पर उचित कार्य का अवसर मिलने की संभावना बढ़ी है।

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