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इतिहासको बहाब, जेनजी र लोकप्रियतावाद  – Online Khabar

इतिहास के प्रवाह, जनरेशन जेड और लोकप्रियतावाद

समाचार का सारांश व्यावसायिक दृष्टिकोण से समीक्षा किया गया है। आगामी राजनीति लंबे अवधि की बजाय छोटी अवधि की योजनाओं और लोकप्रिय नेतृत्व पर आधारित पॉपुलिस्ट होगी। इंटरनेट और सोशल मीडिया से उत्पन्न जनरेशन जेड ने पुराने राजनीतिक दलों और उनके विचारों को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया है। तकनीक, आवास परिवर्तन और ‘अप्राप्त आकांक्षाओं’ से जन्मी इस पीढ़ी की जागरूक पहल (एजेंटिफिकेशन) को राज्य न पहचान पाने के कारण सड़कों पर अनियंत्रित विद्रोह की संभावना बढ़ गई है। जनरेशन जेड आंदोलन के वैश्विक संदर्भ और नेपाल के परिप्रेक्ष्य में समाजशास्त्री चैतन्य मिश्र द्वारा लिखा गया यह विस्तृत विश्लेषण तीन भागों में पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। प्राध्यापक मिश्र नेपाल में समाजशास्त्र के औपचारिक अध्यापन करने वाली पहली पीढ़ी के शिक्षक हैं। उनके पुस्तकों में ‘पूंजीवाद और नेपाल’, ‘बदलता नेपाली समाज’, ‘एसेज ऑन द सोसियोलॉजी ऑफ नेपाल’, ‘लोकतंत्र और आज का मार्क्सवाद’ शामिल हैं। मिश्र ने समग्र समाज परिवर्तन का प्राज्ञिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करते हुए युवा पीढ़ी के तकनीक से उत्पन्न विद्रोह और इसके विविध परिणामों को स्पष्ट किया है। इस लेख का मुख्य उद्देश्य नेपाल में ‘जनरेशन जेड’ (Generation Z) के उदय और विश्वव्यापी प्रभाव सहित राष्ट्रीय राजनीतिक प्रणाली पर इसके प्रभावों की खोज करना है। यह तर्क किया गया है कि जनरेशन जेड जैसी पीढ़ियाँ जैविक वृद्ध‍ि का परिणाम नहीं हैं, बल्कि वे विशिष्ट सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक कालखंड एवं ऐतिहासिक प्रवाह की उपज हैं। इन्हें वैश्विक रूप में एक समान नहीं देखा जाना चाहिए; बल्कि इन्हें संबंधित क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय संदर्भों के आधार पर देखना आवश्यक है। विश्व उत्पादन और विनिमय के एकीकरण के बावजूद वैश्विक असमानता और विभाजन गहरे हैं, इसलिए स्थानीय विशिष्टताओं का सम्मान आवश्यक है। सामाजिक-ऐतिहासिक पीढ़ियों के तेजी से परिवर्तन ने पुराने वैचारिक और संरचनात्मक राजनीतिक दलों को प्रभावित किया है। आगामी राजनीतिक प्रणालियाँ छोटी अवधि की लोकप्रियतावादी (पॉपुलिस्ट) शैली की होंगी, जिनमें प्रमुख नेता और नागरिक अपेक्षाकृत लचीले होंगे और दीर्घकालीनता कम होगी। नेपाल जैसे सीमांत देशों में पॉपुलिस्ट राजनीति आंतरिक और बाह्य शक्तियों से विशेषकर साइबर सीमांत क्षेत्र से अधिक प्रभावित हो सकती है। संविधान संशोधन के प्रयासों से जुड़े तीन मुख्य प्रावधान आगामी राजनीतिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं। 8 और 9 सितंबर 2025 को काठमांडू में हुआ जनरेशन जेड आंदोलन दीर्घकालिक स्मृति के लिए महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। उम्मीद थी कि प्रत्यक्ष विरोध प्रदर्शन सीमित जनसंख्या तक सीमित रहेंगे, जो सोशल मीडिया प्रतिबंधों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएंगे। लेकिन विरोध प्रदर्शन व्यापक हो गया और भीड़ 20,000 तक पहुंच गई। पुलिस ने बैरिकेड तोड़ने पर हिंसक टकराव शुरू किया, जिससे भारी क्षति हुई। भीड़ संसद परिसर में घुसकर आग लगाई; पुलिस ने गोली चलाई; रातभर लाठी-चार्ज, आंसू गैस और रबर की गोलियाँ चलीं, जिनमें कई लोग मारे गए। दूसरे दिन सरकारी भवनों और निजी घरों में आगजनी हुई, और कई घायल और मृत हुए। 9 सितंबर को यह हिंसा थमी और राजनीतिक परिणाम सामने आने लगे। प्रतिनिधि सभा का विघटन हुआ। प्रधानमंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया बल्कि सुरक्षा बलों का नियंत्रण लेकर प्रदर्शन रोकने में विफल रहे। जांच आयोग मौन है। छह महीने के भीतर नए अंतरिम सरकार ने चुनाव कराए और स्थापित पार्टियों को कमजोर करते हुए काठमांडू के प्रतिष्ठित मेयर प्रभु प्रधानमंत्री बने। नया दल भारी बहुमत के साथ सत्ता पर आया, परंतु राजनीतिक भविष्य अनिश्चित है।

जनरेशन जेड केवल जैविक पीढ़ी नहीं है; यह वैश्वीकरण, तकनीक और तीव्र आवास परिवर्तन से उपजी सामाजिक-ऐतिहासिक पीढ़ी है। इसका उद्भव जैविक वृद्ध‍ि के बाद नहीं, बल्कि विशिष्ट सामाजिक परिवर्तनों से हुआ है। जैविक पीढ़ियाँ सामान्यतः 20-30 वर्षों में नवीनीकृत होती हैं, पर जनरेशन जेड जैसी पीढ़ियों को सामाजिक-ऐतिहासिक संदर्भों ने जन्म दिया है। सामाजिक परिवेश और इतिहास ही पीढ़ी निर्धारित करता है; जब आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन तीव्र होते हैं, तब नई पीढ़ी जन्म लेती है। दूरस्थ कृषि पर आधारित समाजों में पीढ़ियों के बीच अंतर कम होता है, जबकि व्यवसायिक और औद्योगिक समाजों में तीव्र सामाजिक परिवर्तन होते हैं। यहां तक कि भाई-बहन भी जीवन अवसरों और सामाजिक परिवेश के कारण अलग-अलग पीढ़ियों में आ सकते हैं। मानव जीवन केवल जैविक प्रक्रिया नहीं, बल्कि अधिकांशतः सामाजिक परिवेश द्वारा निर्देशित होता है। जन्म और मृत्यु को तकनीक एवं सामाजिक कारण प्रभावित करते हैं; नेपाल में प्रजनन दर और बाल मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है, जो मुख्यतः सामाजिक प्रगति और स्वास्थ्य सेवाओं का परिणाम है।

पुराने राजनीतिक दल तेजी से परिवर्तनशील समाज में प्रभावहीन होते जा रहे हैं। विश्व मानवता तीव्र परिवर्तन के दौर से गुजर रही है और नई पीढ़ी तेजी से बढ़ रही है। आगामी राजनीतिक स्वरूप छोटी अवधि के लोकप्रियतावादी (पॉपुलिस्ट) होने की संभावना है। यह लेख के पहले भाग का अंत है। इसका दूसरा भाग कल प्रकाशित होगा।

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