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गैस सिलेंडर बिक्री में उद्योगपतियों का दबाव, निगम का क्या जवाब है?

सरकार द्वारा लागू की गई आधे सिलेंडर गैस बिक्री नीति से उद्योगपतियों और विक्रेताओं में आर्थिक संकट एवं आपूर्ति व्यवस्था में समस्या उत्पन्न हुई है। नेपाल आयल निगम ने अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण आधे सिलेंडर की बिक्री नीति जारी रखी है और तत्काल पूर्ण सिलेंडर बिक्री खोलने का कोई फैसला नहीं किया है। नेपाल एलपी गैस उद्योग संघ और विक्रेताओं ने बाजार में गैस की कमी न होने के बावजूद आधे सिलेंडर नीति से उद्योग संचालन खर्च दोगुना हो जाने की बात कही है और पूर्ण सिलेंडर बिक्री खोलने की मांग की है। ६ वैशाख, Kathmandu।

बाजार में महसूस हो रही गैस की कमी को दूर करने के लिए सरकार द्वारा लागू की गई ‘आधे सिलेंडर’ नीति उद्योगपतियों के लिए लाभकारी साबित नहीं हो रही है, ऐसा उद्योगी एवं व्यवसायी बता रहे हैं। उपभोक्ताओं में विद्युत चूल्हा (इंडक्शन) के उपयोग में वृद्धि और आधे टन के कारण सिलेंडर बाजार में रुके रहने से गैस उद्योग की स्थिति प्रभावित हुई है। २८ फागुन २०८२ से नेपाल आयल निगम ने ७.१ किलो के आधे सिलेंडर ही बेचने का निर्देश दिया था। परंतु इस नीति के कारण उद्योगों में खाली सिलेंडर की कमी बढ़ी है।

अमेरिका और इजरायल द्वारा इरान पर आक्रमण के जवाब में इरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ बंद कर दिया, जिससे विश्वव्यापी आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। इसे कारण बताते हुए निगम ने आधे सिलेंडर की बिक्री जारी रखी है। हालांकि, नेपाल एलपी गैस उद्योग संघ ने इस नियम को हटाकर पूर्ववत् १४.२ किलो के पूर्ण सिलेंडर बिक्री खोलने की मांग की है। संघ के अनुसार वर्तमान में सभी उद्योगों के बुलेट गैस पूरी तरह भरे हुए हैं और बाजार में पूर्ण क्षमता वाले सिलेंडर उपलब्ध कराने में कोई बाधा नहीं है।

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