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वास्तविक सुकुमवासीको यसरी हुनेछ व्यवस्थापन – Online Khabar

सुकुमवासी समुदाय के समुचित प्रबंधन के लिए सरकार की योजना प्रगति पर

समाचार सारांश सरकार ने काठमांडू उपत्यका की नदियों के किनारे बसने वाले सुकुमवासी लोगों को प्रमाणित कर व्यवस्थित रूप से प्रबंधन करने की योजना आगे बढ़ाई है। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने प्रमाणित सुकुमवासियों को शीघ्र ही ज़मीन वितरण प्रक्रिया में आगे बढ़ाने की जानकारी दी है। भूमि समस्या समाधान आयोग ने प्रमाणित सुकुमवासियों को चार आना से साढ़े ६ कठ्ठा तक जमीन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। ११ वैशाख, काठमांडू। सरकार ने काठमांडू उपत्यका के भीतर नदी के किनारे रहने वाले सुकुमवासियों को संगठित ढंग से प्रबंधित करने की योजना शुरू कर दी है। सरकार ने विस्तृत योजना तैयार की है जिसमें ‘प्रमाणीकरण कैंप की स्थापना, फोटो के साथ परिचय पत्र वितरण तथा प्रमाणीकरण ना होने वाले व्यक्तियों को क्रमशः उन स्थानों से हटाने’ का उल्लेख है।

प्रमाणित सुकुमवासियों के लिए क्या प्रावधान होंगे? प्रधानमंत्री बालेन्द्र (बालेन) शाह ने सामाजिक मीडिया फेसबुक पर कहा, ‘देशभर के वास्तविक सुकुमवासियों को यथाशीघ्र प्रक्रिया पूरी कर ज़मीन वितरण किया जाएगा।’ भूमि संबंधित कानून भूमिहीन दलित और भूमिहीन सुकुमवासियों को एक बार ज़मीन उपलब्ध कराने तथा अव्यवस्थित बसे लोगों को व्यवस्थित करने का प्रावधान करता है। इस उद्देश्य के लिए सरकार ने भूमि समस्या समाधान आयोग गठित किया है। नेपाल राज्य में जिनके नाम या परिवार के नाम पर ज़मीन नहीं है एवं जिनका अपनी या परिवार की आय से ज़मीन खरीदना संभव नहीं, उन्हें कानून ‘भूमिहीन सुकुमवासी’ मानता है।

इसी तरह, राष्ट्रीय दलित आयोग सूचीबद्ध जातियों के भूमिहीन सुकुमवासियों को ‘भूमिहीन दलित’ के रूप में वर्गीकृत करता है। सरकारी, ऐलानी या सार्वजनिक वन क्षेत्र होते हुए भी कम से कम १८ वर्षों से घर-बसाये व्यक्ति और परिवार के सदस्यों को ‘अव्यवस्थित बासिन्दा’ कहा जाता है। प्रमाणित सुकुमवासियों को ज़मीन वितरण की प्रक्रिया भूमि समस्या समाधान आयोग के माध्यम से होगी, ऐसा काठमांडू महानगरपालिका के प्रवक्ता नविन मानन्धर ने बताया। उन्होंने कहा, ‘वास्तविक सुकुमवासियों के साथ अन्याय न हो, इसलिए कानून अनुसार ज़मीन वितरण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।’

सरकार ने स्थानीय तहों के सहयोग से तथ्यांक संग्रह, प्रविष्टि, जांच और प्रमाणीकरण की व्यवस्था की है। प्रमाणीकरण के आधार पर नक्शा तैयार करने का कार्य भी शुरू होगा। नक्शा बनने के बाद उसका परीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। जांच, सूचना प्रकाशन, दस्तुर, स्थानीय तह की सिफारिश, विवरण सार्वजनिक एवं हकदावी प्रक्रियाएं पूर्ण होने पर भूमि समस्या समाधान आयोग जिला स्तर पर निर्णय कर आयोग के केंद्र को भेजेगा। भूमिहीन दलित, भूमिहीन सुकुमवासी एवं अव्यवस्थित बासिंदों को ज़मीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया २०८१ की कार्यविधि अनुसार जिला समिति प्रमाणित ज़मीनधारक प्रमाणपत्र आयोग को सभी विवरण के साथ लिखित रूप में सूचित करेगी, उसके बाद संबंधित ज़मीनधारक को ज़मीन उपलब्ध कराई जाएगी।

सुनिश्चित प्रमाणित सुकुमवासियों को शहर में चार आना और आवास तथा खेती के लिए साढ़े छह कठ्ठा तक ज़मीन देने का प्रावधान भूमि समस्या समाधान आयोग के अध्यक्ष हरिप्रसाद रिजाल ने बताया। अव्यवस्थित बासिंदों के प्रबंधन में आर्थिक स्थिति, आवासीय परिस्थिति, ज़मीन की प्रकृति, क्षेत्रफल, मूल्यांकन, अधिकार अवधि के आधार पर वर्गीकरण कर दस्तुर लेकर ज़मीन के स्वामित्व का हस्तांतरण किया जा सकता है, ऐसा अधिनियम में उल्लेख है। ज़मीन स्वामित्व हस्तांतरण में दस्तुर चुकाने को तैयार होने पर भी २९ रोपनी और १५ धुर से अधिक ज़मीन हस्तांतरण नहीं होगी, आयोग अध्यक्ष रिजाल ने बताया। संभवतः बसे उन्हीं स्थानों पर प्रबंधन किया जाएगा, लेकिन यदि नदी किनारे, वन क्षेत्र, प्राकृतिक जोखिम वाले स्थलों या धनिपुर्जा किसी और के नाम निजी या सार्वजनिक ज़मीन पर बसे लोगों को वहीं ज़मीन नहीं दी जाएगी। ऐसे लोगों के लिए भूमिहीन दलित और भूमिहीन सुकुमवासियों को उपलब्ध कराई जाने वाली ज़मीन स्थानीय, प्रदेश एवं संघीय सरकार संयुक्त रूप से प्रबंधित करेंगे। संबंधित स्थानीय तह से न मिलने पर संबंधित प्रदेश के भीतर ज़मीन उपलब्ध कराने का प्रावधान भी है। मिली ज़मीन को कम से कम १० वर्षों तक बेचने पर रोक रहेगी।

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