
भूमिहीनों के जबरन निष्कासन पर अधिकारवादी संस्थाओं की रोक
ह्युमन राइट्स वॉच, एमनेस्टी इंटरनेशनल और इंटरनेशनल कमीशन ऑफ जुरिस्ट्स ने सरकार से अनौपचारिक बस्तियों में रहने वाले भूमिहीनों का जबरन निष्कासन न करने का आग्रह किया है। इन संस्थानों ने आवास के अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन न करने तथा मानवाधिकार संरक्षण के दीर्घकालीन अवसरों का सदुपयोग करने पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार को मानवाधिकार के १३ क्षेत्रीय मुद्दों पर काम करने की सलाह भी दी गई है। १८ वैशाख, काठमांडू।
चार प्रमुख अधिकारवादी संस्थाओं ने वर्तमान सरकार से कहा है कि वह अनौपचारिक बस्तियों में रह रहे भूमिहीनों को जबरन निकाला न जाए। ह्युमन राइट्स वॉच, एमनेस्टी इंटरनेशनल और इंटरनेशनल कमीशन ऑफ जुरिस्ट्स ने शुक्रवार को एक पत्र जारी कर यह बात कही। इन संस्थाओं ने आवास के अधिकार तथा अभिव्यक्ति और संघ संस्थाओं की स्वतंत्रता सहित अनौपचारिक बस्तियों से भूमिहीनों के जबरन निष्कासन में उचित प्रक्रिया का उल्लंघन न करने का आग्रह किया है।
उन्होंने मानवाधिकार और विधि के शासन की दीर्घकालीन रक्षा के अवसरों का उपयोग करने पर भी बल दिया है। परिवर्तन की मांगों की लहर में सत्ता में आए प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की सरकार को मानवाधिकार के १३ क्षेत्रीय मामलों पर काम करने का सुझाव दिया गया है। इनमें संक्रमणकालीन न्याय प्रक्रिया, महिलाओं और बालिकाओं के अधिकार, दलित और अन्य अल्पसंख्यकों के अधिकार, प्रवासी श्रमिकों के अधिकार, तथा लैंगिक और यौन अल्पसंख्यकों के अधिकार शामिल हैं।