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६० वर्षों बाद लोप हुए माने जाने वाला पौधा अचानक ऑस्ट्रेलिया में मिला

वैज्ञानिकों ने ६० वर्षों बाद ऑस्ट्रेलिया के दूरस्थ क्षेत्र में लुप्तप्राय दुर्लभ पौधा ‘टिलोटस सेनारियस’ मिलने की पुष्टि की है। एरन बिन ने अपने मोबाइल से खींची गई तस्वीर ‘आईन्याचुरिस्ट’ प्लेटफ़ॉर्म पर अपलोड की, जिसके बाद वनस्पति विज्ञानी एंथोनी बिन ने इस पौधे की पहचान की। यह पौधा ‘अत्यंत संकटग्रस्त’ सूची में शामिल किया गया है और इसके संरक्षण के लिए विशेष बजट व योजनाएं बनाने की राह खुली है।

४ वैशाख, काठमांडू। वैज्ञानिकों ने लगभग ६० वर्षों से पूरी तरह विलुप्त समझे जाने वाले एक दुर्लभ पौधे को ऑस्ट्रेलिया के एक दूरस्थ क्षेत्र में पाया है। यह ऐतिहासिक पुनरुद्धार एक पक्षी अध्ययनकर्ता की उस मोबाइल से खींची गई तस्वीर के माध्यम से संभव हुआ, जिसे उन्होंने प्राकृतिक विशेषज्ञता वाली डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म ‘आईन्याचुरिस्ट’ पर अपलोड किया था। इस खोज ने आधुनिक जैव विविधता अनुसंधान और संरक्षण में आम जनता और स्मार्टफोन की भूमिका की बढ़ती अहमियत को प्रमाणित किया है।

एरन बिन नामक व्यावसायिक उद्यान विशेषज्ञ ऑस्ट्रेलिया के क्वीन्सलैंड के एक दूरस्थ आउटबैक क्षेत्र में पक्षियों के पैरों में पहचान पट्टा बांधने के कार्य में जुटे थे। इसी दौरान उन्होंने वहां एक विशिष्ट झाड़ी प्रजाति का पौधा देखा और तस्वीर खींची। बाद में मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध होते ही उन्होंने यह तस्वीर प्रकृति प्रेमियों की वेबसाइट ‘आईन्याचुरिस्ट’ पर साझा की। करोड़ों तस्वीरों के बीच क्वीन्सलैंड हर्बेरियम के वनस्पति विज्ञानी एंथोनी बिन की नजर उस फोटो पर पड़ी और उन्होंने इसे वैज्ञानिक जगत में ‘टिलोटस सेनारियस’ नामक दुर्लभ पौधा बताया।

यह पौधा वर्ष १९६७ से प्रकृति में कहीं नहीं देखा गया था और इसे पूरी तरह से विलुप्त माना गया था। दिलचस्प बात यह है कि वनस्पति वैज्ञानिक एंथोनी बिन ने खुद दस साल पहले पुराने संग्रहों के आधार पर इस प्रजाति का वैज्ञानिक नामकरण और विवरण लिखा था। ‘ऑस्ट्रेलियन जर्नल ऑफ़ बॉटनी’ में प्रकाशित इस पुनरुद्धार विवरण के अनुसार यह पौधा एक छोटा नाजुक झाड़ी है, जिसमें गुलाबी और बैंगनी रंग के फूल खिलते हैं। ये फूल अंतरिक्ष में छोटे आतिशबाजी की तरह दिखते हैं। यह पौधा ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी क्षेत्र के ‘गल्फ ऑफ कार्पेंटेरिया’ के दुर्गम और चट्टानी भूभाग में ही पाया जाता है।

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