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फिर्के खोला संरक्षण के लिए पोखरा महानगरपालिका की सक्रिय पहल

समाचार सारांश: पोखरा महानगरपालिकाने फिर्के खोला के खोलाघर के भीतर बनी अवैध संरचनाओं को हटाने के लिए २०८० कात्तिक १० को ३५ दिनों की सार्वजनिक सूचना जारी की थी। मेयर धनराज आचार्य ने फिर्के खोला को स्वच्छ, हराभरा और जीवंत सार्वजनिक कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की योजना बताई है। फिर्के खोला में सरकारी, अर्धसरकारी और निजी संरचनाओं ने खोले के मानदंडों का उल्लंघन किया है, जिससे फेवा ताल की जैविक स्थिति प्रभावित हुई है।

१० जेठ, पोखरा। सराङकोट के पुछार अँधेरीकुना से होकर बहने वाली फिर्के खोला पर्स्याङ फाँटका के ग्रामीणों के लिए जीवन का स्रोत थी। अँधेरीकुना से कुछ नीचे बांध बनाकर नहर में पानी लाकर धान बोया जाता था। फिर्के के पानी से भरे पर्स्याङ फाँट की धान की हरियाली ८७ वर्षीय हेरम्बप्रसाद अधिकारी के मन में आज भी ताजा है। ऊपरी हिस्से से कलकल बहते फिर्के के पानी को वे अञ्जुली बनाकर पीने की याद करते हैं। नीचे के भाग में लोग तैराकी करते थे। उस समय नदी में मलमूत्र करने का आचरण नहीं था और लोग नदी की पूजा करते थे। उस समय खोले के किनारे कोई घर नहीं था, वह बताते हैं।

‘अँधेरीपन से आई फिर्के के पानी को बांध कर नहर से पर्स्याङ लाया जाता था। इसलिए इसे ‘कुलोबाँधे’ कहा जाता था। फिर्के के पानी से उगे धान को पोखरा में बहुत स्वादिष्ट माना जाता था,’ हेरम्ब याद करते हैं, ‘पानी लाकर दही मथने पर बहुत घी निकलता था।’

पोखरा–१८ अँधेरीकुना से होकर पोखरा के विभिन्न हिस्सों से गुजरकर फेवा ताल में मिलने वाली फिर्के खोला का क्षरण कब शुरू हुआ? हेरम्ब कहते हैं, ‘पहले पोखरा बाज़ार की उपेक्षा हो चुकी थी, पर बाद में लोग आने लगे, बस्तियाँ फैलने लगीं। साथ ही लोगों को खोले के किनारे बसना शुरू हुआ।’ फिर्के के ऊपर अवैध बस्तियाँ बढ़ीं, ज़मीन की कीमत बढ़ने पर स्थानीय लोग अपनी ज़मीन बेचने लगे, परिवार बंटने पर कई लोग खोले के किनारे घर बनाने लगे जो बहुदलीय शासन के बाद और तेजी से बढ़ा।

पोखरा की जिंदगी से जुड़ी इस नदी का राजनीतिक दलों ने वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया, इस बात का उन्हें दुख है। ‘अब फिर्के खोला देखकर दया आती है। लोगों ने खोल और प्रकृति के साथ कितना अन्याय किया है,’ हेरम्ब कहते हैं।

पोखरा के अधिकांश लोगों ने इस खोले को पुराने स्वरूप में देखा है। पिछले दशकों में फिर्के मानवीय अतिक्रमण का शिकार बन गया। सरकारी उदासीनता के कारण खोल में कहीं भी संरचनाएँ बनाईं गई हैं। बाज़ार और घर खोलाघर के भीतर बनाए गए हैं। कई लोगों ने महानगर की अनुमति लेकर भी खोले में घर बनाए हैं। सरकारी कार्यालयों ने भी खोले के मानदंडों का उल्लंघन करते हुए सामुदायिक भवन, समाज घर, पुलिस चौकी और विद्यालय तक खोले के भीतर बनाए हैं।

फिर्के खोला सराङकोट अँधेरीकुना और गुरुकुल मार्ग से शुरू होकर पोखरा–५ के मध्यशहरी क्षेत्र से गुजरकर फेवा ताल में मिलता है। लगभग ८ किलोमीटर लंबा यह खोला दमनकारी विकास और विवादों के केंद्र में रहा है। राजनीतिक स्वार्थों के चलते फिर्के खोला में १६० से अधिक संरचनाएं बन चुकी हैं। यदि मात्र एक मीटर की मानदंड दी जाए तो ३०० से अधिक संरचनाएं आती हैं, ऐसा महानगर के अध्ययन ने दिखाया है। पोखरा की तीव्र शहरीकरण और जनसंख्या दबाव ने फिर्के खोला को दोहन का शिकार बनाया है और समस्या जटिल होती जा रही है।

डोजर घटना और राजनीतिक सहमति की कहानी: २०७५ साल असार १ को तत्कालीन मेयर मानबहादुर जीसी ने डोजर चलाकर फिर्के खोले की अवैध संरचनाएं तोड़ने का अभियान चलाया। इस अभियान में पत्रकार समेत पांच लोग घायल हुए। आधिकारिक रूप से फुटट्रैक बनाने की योजना थी, लेकिन वह अधूरा रह गया। २०७६ में हुए उपनिर्वाचन में नेकपा एमाले ने फिर्के खोल की मानदंड कम करने का लिखित समझौता किया था। यह समझौता तब हुआ जब स्वतंत्र उम्मीदवार सुनिल कोइराला ने मानदंड घटाने की मांग की और अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। महानगर के वरिष्ठ कानूनी अधिकारी नारायणप्रसाद शर्मा ने समझौते पर हस्ताक्षर किए, पर बाद में इसे गुप्त रहकर माफी मांगी।

फिर्के खोला की मानदंड और संरचना को लेकर राजनीतिक सौदा चल रहा है, जिससे समस्या बनी हुई है, सभी राजनीतिक दल इस पर सहमत हैं।

मापदंड विवाद और सीमा निर्धारण: फिर्के खोला के मानदंड निर्धारण को लेकर पोखरा उपत्यका नगर विकास समिति, महानगर और स्थानीय निवासियों के बीच लंबा विवाद चला है। २०७२ के भूकंप के बाद केंद्र सरकार ने खोले की सुरक्षा क्षेत्र विस्तार का निर्देश दिया। इसके अनुसार, २०७५ में तत्कालीन मेयर जीसी के कार्यकाल में फिर्के, बुलौंडी और बगादी खोले के किनारे १० मीटर का मानदंड तय किया गया। पर मेयर जीसी के दौरान बनी तकनीकी समिति ने सुविधा के लिए ‘राइट ऑफ वे’ के तौर पर ५ मीटर मानदंड रखा। २०७४ चैत से महानगर ने फिर्के खोला की नापजोख शुरू की। समस्या के कारण १० मीटर मानदंड लागू करने पर कई संरचनाएं गिर सकती थीं, इसलिए २०८० में ६ मीटर मानदंड तय किया गया।

महानगर ने फिर्के खोला के दोनों तरफ ५८८ पिलर लगाए हैं, जो ६ मीटर मानदंड की सीमा तय करते हैं। सरकारी और निजी घरों से लेकर संस्थागत भवनों तक फिर्के की मानदंड का उल्लंघन कर अवैध निर्माण किए गए हैं। सामान्य नागरिकों के साथ-साथ सरकारी निकाय और सामाजिक संस्थाएं भी खोले में अतिक्रमण कर रही हैं।

फिर्के की सुरक्षा जिम्मेदारी वाली सशस्त्र प्रहरी बल प्रशिक्षण केंद्र, पोखरा इंजीनियरिंग कॉलेज, लिटिल स्टेप स्कूल सहित कई सरकारी एवं अर्धसरकारी संस्थाएं खोले में संरचना बना चुकी हैं। बराल समाज घर, पुन मगर समाज घर, कुँवर समाज घर, सोपाल समाज घर, गिरी समाज घर, फिर्के तमु समाज और विभिन्न आश्रम, मंदिर तथा किरियापुत्री भवन खोले में पक्के भवन और कम्पाउंड बना चुके हैं।

खोलाघर अतिक्रमण से बने गैर कानूनी गेराज, ऑटो पार्ट्स, लॉन्ड्री और ढल निकासी फेवा ताल के जैविक संरचना पर बड़ा प्रभाव डाल रहे हैं। प्लास्टिक कचरा, विषैले रसायनों के कारण फेवा ताल का क्षेत्रफल भी कम हो रहा है। नापी कार्यालय के अनुसार २०६० से जमा हुए कचरे से ११ रोपनी ४ आना क्षेत्र गैघाट इलाके में चौर जैसा हो गया है।

मेयर धनराज आचार्य का फिर्के संरक्षण योजना: मेयर धनराज आचार्य ने फिर्के खोले के खुला क्षेत्र में बनी अवैध संरचनाओं को हटाने के लिए २०८० कात्तिक १० को ३५ दिनों की सार्वजनिक सूचना जारी की थी। हालांकि इस सूचना के खिलाफ फिर्के तमु समाज समेत १३ आवेदकों ने उच्च अदालत पोखरा में अंतरिम आदेश प्राप्त किया था। बाद में अदालत ने संरचनाएं हटाने की अनुमति दी, जिसके बाद मेयर ने अभियान तेज करने की तैयारी की।

बालेन शाह नेतृत्व वाली संघीय सरकार ने भी सरकारी जमीन पर बने अवैध निर्माण हटाने का निर्देश दिया, जिससे मेयर आचार्य को अतिरिक्त समर्थन मिला। आचार्य ने जेठ ६ से फिर्के खोला से अवैध निर्माण हटाने की चर्चा की और ९ से डोजर चलाने अभियान शुरू किया। मेयर ने कहा कि खोलाघर की संरचनाओं को हटाएंगे और फिर फिर्के कॉरिडोर परियोजना पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा, ‘पहले चरण में खोलाघर खाली किया जाएगा, फिर योजनाबद्ध विकास होगा। खोला निजी संपत्ति नहीं हो सकता, सभी को इस बात को गंभीरता से समझना चाहिए।’

मेयर आचार्य ने दक्षिण कोरिया के सियोल में ‘चेओङ्गग्येचोन स्ट्रीम’ पुनर्जीवन परियोजना से प्रेरणा लेकर फिर्के खोला को स्वच्छ, हरा-भरा और जीवंत सार्वजनिक कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। यह योजना पोखरा के दीर्घकालीन शहरी विकास, पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन संवर्द्धन से जुड़ा महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। उन्होंने सामाजिक मीडिया पर फिर्के कॉरिडोर को नई शहरी पहचान दिलाने के लक्ष्य से आगे बढ़ाने की बात कही है।

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