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उपचार गरेबापत नागरिकसँग पैसा असुल्दै सरकार – Online Khabar

सरकार ने निजी अस्पतालों में उपचार के दौरान 3 प्रतिशत स्वास्थ्य समता शुल्क लागू करने की घोषणा की

सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष के बजट में निजी अस्पतालों द्वारा प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर तीन प्रतिशत स्वास्थ्य समता शुल्क लगाने की घोषणा की है। स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों ने कहा है कि सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली को पर्याप्त सशक्त बनाए बिना निजी अस्पतालों के मरीजों से अतिरिक्त शुल्क लेना व्यावहारिक नहीं है। निजी अस्पताल संचालकों ने इस निर्णय पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार अस्पतालों को कर वसूली का एजेंट बनाने का प्रयास कर रही है। १७ जेठ, काठमाडौं।

देश भर के सरकारी अस्पतालों के आकस्मिक कक्षों में भरे पड़े मरीज निजी अस्पतालों की ओर जाने को मजबूर हैं। इसका मुख्य कारण है, आकस्मिक कक्ष में बेड की कमी, लंबी प्रतीक्षा और जटिल सेवा। सस्ती और गुणवत्तापूर्ण सेवा की तलाश में आए ये मरीज तत्काल जीवन रक्षक उपचार के लिए निजी अस्पताल पहुंचते हैं। लेकिन सरकार ने इन नागरिकों पर अतिरिक्त उपचार शुल्क लगाने की घोषणा की है। अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम बाग्ले द्वारा प्रस्तुत बजट में कहा गया है, ‘दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य पूर्वाधार विकास तथा सेवा विस्तार के लिए सहायता हेतु निजी क्षेत्र में प्रदान की जाने वाली शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर न्यूनतम दर पर समता शुल्क लगाया जाएगा।’

सरकार के इस आर्थिक प्रस्ताव को लागू करने के लिए तैयार विधेयक के धारा १७ में उल्लेख है कि स्वास्थ्य समता शुल्क उस निजी क्षेत्र के स्वास्थ्य सेवा संचालकों द्वारा मरीजों से लिए जाने वाले सभी सेवा शुल्कों पर तीन प्रतिशत दर से लगाया जाएगा। यह राशि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने और स्वास्थ्य से जुड़ी पूर्वाधार निर्माण में खर्च की जाएगी। इस कारण निजी अस्पतालों में उपचार के दौरान सेवा के मूल्य में अतिरिक्त ३ प्रतिशत कर लगेगा।

विशेषज्ञ चिकित्सकों, प्रयोगशाला सेवा, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी सुविधाओं की नियमित उपलब्धता न होने वाले सरकारी अस्पतालों में नागरिकों से अतिरिक्त कर वसूलना न्यायसंगत नहीं है, यह बात विशेषज्ञों ने बताई है। उपभोक्ता अधिकार अनुसंधान मंच के अध्यक्ष माधव तिमिल्सेन ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा नागरिकों का मौलिक अधिकार है और इसे कर के दायरे में लाना गलत है। समान स्वास्थ्य सेवा की पहुंच सुनिश्चित करना और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों को सुदृढ़ बनाना तो आवश्यक है, परन्तु इसके लिए चुनी गई कर प्रणाली गलत है, इस विषय पर डॉ. पांडे सहित अन्य विशेषज्ञों ने चर्चा की है।

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