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निर्वाचन स्थगित करने की कोशिश करने वाले राखेप को एन्फा का कड़ा जवाब

समाचार सारांश

संपादकीय तौर पर समीक्षा।

  • अखिल नेपाल फुटबल संघ (एन्फा) ने राष्ट्रीय खेलकूद परिषद् (राखेप) के निर्वाचन स्थगित करने के निर्देश को अस्वीकार करते हुए चैत १३ गते निर्वाचन करने वाला कड़ा जवाब भेजा है।
  • एन्फा ने राखेप के साथ आवश्यक समन्वय किया है और स्वीकृति लेने के बाद अपने विधान के अनुसार निर्वाचन करने का पूर्ण अधिकार होने का दावा किया है।
  • एन्फा ने फिफा और एएफसी से परामर्श कर चैत १३ गते के निर्वाचन को सुचारु बनाने हेतु राखेप से सहयोग का अनुरोध किया है।

९ चैत, काठमाडौं। अखिल नेपाल फुटबल संघ (एन्फा) ने राष्ट्रीय खेलकूद परिषद् (राखेप) के निर्वाचन स्थगित करने के निर्देश को अस्वीकार करते हुए चैत १३ गते निर्वाचन करने स्पष्ट जवाब भेजा है।

राखेप ने निर्वाचन के लिए स्वीकृति न होने का हवाला देकर निर्वाचन स्थगित करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद एन्फा ने अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया में इस पर कड़ा रुख दिखाया है।

एन्फा ने राखेप द्वारा बिना आवश्यक समन्वय निर्वाचन कार्यक्रम जारी करने के आरोप को खारिज करते हुए यह दावा किया कि यह आरोप गलत है।

निर्वाचन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए एन्फा ने राखेप को पहले से पूरी जानकारी दी है और आवश्यक स्वीकृति भी ले चुका है। इसके पहले भी राखेप द्वारा सुझाव सहित साधारण सभा और निर्वाचन की मंजूरी दी जा चुकी है।

एन्फा ने ध्यान दिलाया है कि वह एक स्वायत्त संस्था के रूप में अंतरराष्ट्रीय फुटबल निकाय फिफा और एएफसी से सम्बद्ध है और अपने विधान के अनुसार निर्वाचन करने का पूर्ण अधिकार रखता है। साथ ही उसने कहा कि उत्पीड़ित तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगने का जोखिम है।

चैत १३ गते निर्धारित तिथि पर निर्वाचन करने की स्पष्ट प्रतिबद्धता जताते हुए, एन्फा ने इस प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए राखेप से सहयोग मांगा है। पाटन उच्च अदालत ने एन्फा के निर्वाचन पर रोक लगाने का कोई आदेश नहीं दिया है, इसलिए निर्वाचन रोकने का कोई आधार नहीं है, यह भी एन्फा का दावा है।

एन्फा ने यह भी बताया कि विवाद समाधान के लिए फिर से फिफा और एएफसी से परामर्श जारी है। राखेप के निर्देश पत्र के बारे में इन निकायों को जानकारी दी गई है और सोमवार तक उस पत्र की प्राप्ति के साथ और जानकारी दी जाएगी।

इससे पहले, गत बिहीवार को राखेप ने एन्फा को निर्वाचन के लिए सहमति न होने का हवाला देते हुए निर्वाचन स्थगित करने का निर्देश दिया था।

पर एन्फा ने उस निर्देश को नजरअंदाज करते हुए अपनी साधारण सभा (एन्फा अर्डिनरी कांग्रेस) का औपचारिक आयोजन किया था।

निर्देश न मानने पर राखेप ने एन्फा को निलंबन की चेतावनी भी दी है। लेकिन एन्फा ने अपने निर्वाचन की योजना किसी भी हालत में आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिससे नेपाली फुटबाल और भी खराब स्थिति में पहुंच सकता है।

यदि एन्फा निर्वाचन कर देता है और राखेप वर्तमान समिति को निलंबित कर तदर्थ समिति बनाता है, तो नेपाली फुटबाल को फिफा से निलंबित किए जाने का खतरा हो सकता है।

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