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तेल लेकर लौट रहे पानी जहाज के कप्तान अमृत झा ईरानी सेना के कब्जे में

समाचार सारांश

  • उदयपुर गाइघाट के 33 वर्षीय अमृत झा ईरानी सेना के नियंत्रण में हैं और तेल लेकर दुबई लौटने के दौरान पकड़े गए थे।
  • विदेश मंत्रालय ने कांसुलर एक्सेस के लिए पहल की है और नेपाली दूतावास दोहा के माध्यम से जानकारी लेने का प्रयास कर रहा है।
  • ईरान में चल रहे युद्ध के कारण नेपाली सुरक्षा की चिंता बढ़ी है, और उदयपुर की त्रियुगा नगरपालिका ने झा की रिहाई के लिए कूटनीतिक प्रयासों का अनुरोध किया है।

८ चैत, काठमांडू। उदयपुर गाइघाट के 33 वर्षीय अमृत झा ईरानी सेना के कब्जे में हैं।

ईरान में तेल लेकर लौटते समय, हर्मुज क्षेत्र के बंदर अब्बास बंदरगाह से ईरानी रिवोल्यूशन गार्ड ने फारसी की खाड़ी के होर्मुज स्ट्रेट में उन्हें गिरफ्तार किया।

इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने से पहले झा ईरान पहुंचे थे। दुबई की एक जलयान कंपनी में कप्तान के रूप में काम कर रहे उन्हें तेल लेकर दुबई लौटते समय पकड़ा गया।

उनके बड़े भाई सुनिल ठाकुर के अनुसार, झा ईरानी सुरक्षा अधिकारियों के कब्जे में हैं और कुछ दिनों से गिरफ्तारी की खबर परिवार को मिली है।

2-3 दिन पहले उन्होंने एक नए नंबर से व्हाट्सएप पर वॉयस मैसेज भेजा था, जिसमें कहा था, ‘मैं और दो भारतीयों को ईरानी सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार किया है, नेपाल सरकार को बचाव के लिए पहल करनी चाहिए।’ उसके बाद उस नंबर से संपर्क नहीं हो पाया।

ईरानी सेना द्वारा गिरफ्तारी की सूचना मिलने पर उनकी बहन पूजा झा ने कांसुलर सेवा विभाग में भाई के उद्धार हेतु आवेदन दिया था।

अमृत झा दो साल पहले वैदेशिक रोजगार के लिए दुबई गए थे। वहां वे ‘ब्लैक सी मरीन एलएलसी कंपनी’ के जहाज पर कप्तान थे। उन्होंने 12 जनवरी को घर फोन कर ईरान में होने की जानकारी दी और काम समाप्त होने के बाद नेपाल आने की बात कही।

भाई सुनिल ने बताया, ‘घर पर अच्छा संपर्क था, काम समाप्त होने के कारण नेपाल आने की बात कह रहे थे। उसी दौरान लौटते हुए पकड़े गए।’

आवेदन मिलने के बाद विदेश मंत्रालय ने झा की स्थिति पता लगाने का काम दोहा में स्थित नेपाली दूतावास को सौंपा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोकबहादुर पौडेल क्षेत्री ने कहा, ‘कांसुलर एक्सेस के लिए पहल हो रही है, हमने नेपाली दूतावास दोहा के माध्यम से मामले पर कार्रवाई शुरू कर दी है।’

दूतावास, मंत्रालय और ईरान में मौजूद कांसुलेट के माध्यम से भी जानकारी इकट्ठा की जा रही है।

उनसे संपर्क कर उनकी स्थिति जानने का प्रयास किया जा रहा है और इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है, हालांकि युद्ध के कारण सहज संपर्क नहीं हो पा रहा।

ईरान में नेपाली कांसुलेट फिलहाल तुर्की से संचालित हो रहा है, इसलिए दोहा स्थित नेपाली दूतावास और कांसुलेट के माध्यम से जानकारी साझा की जा रही है।

ईरानी सुरक्षा बलों के कब्जे में होने से उनके परिवार के सदस्य उदयपुर से काठमांडू आ गए हैं। उनके पिता हृदय रोगी हैं और अब तक बेटे के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।

उनकी सुरक्षित रिहाई के लिए उदयपुर की त्रियुगा नगरपालिका ने विदेश मंत्रालय को पत्र लिख कर तत्काल कूटनीतिक पहल करने का अनुरोध किया है।

वर्तमान में ईरान में 10 नेपाली हैं। पहले छह थे, अब चार और संपर्क में आए हैं, मंत्रालय की जानकारी के अनुसार सभी सुरक्षित हैं और उन्हें भारतीय दूतावास के माध्यम से भारतीय नागरिकों के बचाव वाले जहाज में लौटाया जाएगा।

इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच 22 दिन से जारी युद्ध ने मध्य पूर्व के देशों में स्थिति गंभीर बना दी है। ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन हमलों से निशाना बनाया है, जिससे वहां मौजूद नेपालीों की सुरक्षा चिंता बढ़ गई है।

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