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आयुक्त डा. जानकी तुलाधर का निर्वाचन प्रक्रिया में समावेशी दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्धता

निर्वाचन आयुक्त डा. जानकी तुलाधर ने आगामी मतदान प्रक्रिया को लैंगिक, अपाङ्गता तथा समावेशी दृष्टिकोण से सुदृढ़ बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। २६ जेठ, काठमाडौं। निर्वाचन आयोग की आयुक्त डा. जानकी तुलाधर ने कहा कि आने वाले दिनों में मतदान प्रक्रिया में लैंगिक, अपाङ्गता एवं समावेशी दृष्टिकोण को और अधिक मजबूत किया जाएगा। वर्तमान में प्रतिनिधि सभा में विचाराधीन निर्वाचन विधेयक के कानूनी रूप से लागू हो जाने के बाद कई कमजोरियों में सुधार होगा, उन्होंने बताया।

महिला, कानून और विकास मंच (एफडब्लुएलडी) ने सोमवार को प्रतिनिधि सभा सदस्य निर्वाचन २०८२ के लैंगिक, अपाङ्गता तथा समावेशी दृष्टिकोण से निर्वाचन पर्यवेक्षण प्रतिवेदन विमोचन कार्यक्रम आयोजित किया था। उक्त कार्यक्रम में डा. तुलाधर ने इस प्रतिबद्धता को व्यक्त किया था। उन्होंने कहा कि समय के साथ तकनीक के उपयोग को बढ़ाया जाएगा, निर्वाचन में लगे कर्मचारियों और स्वयंसेवकों के लिए लैंगिक, अपाङ्गता तथा समावेशीकरण संबंधी प्रशिक्षण संस्थागत रूप से प्रदान किए जाएंगे और लैंगिक, अपाङ्गता तथा समावेशी सूचकांक के आधार पर वर्गीकृत निर्वाचन आंकड़ों के संग्रह, विश्लेषण तथा प्रकाशन को और सुदृढ़ किया जाएगा।

महिला, युवा, अपाङ्गता वाले व्यक्ति, दुर्गम क्षेत्र के नागरिक तथा अन्य सीमांत समुदायों को लक्षित विशेष मतदाता शिक्षा कार्यक्रम का विस्तार किया जाएगा, उन्होंने स्पष्ट किया। एफडब्लुएलडी के नेतृत्व में १५ गैरसरकारी संस्थाओं द्वारा तैयार निर्वाचन पर्यवेक्षण प्रतिवेदन में अधिवक्ता सागर पाठक ने प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि निर्वाचन आयोग द्वारा बनाई गई निर्देशिका के अनुसार कार्य नहीं किया गया और मतदान केन्द्रों के विषय में और विश्लेषण की आवश्यकता है।

निर्वाचन शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष रहे, इसके बावजूद लैंगिक, अपाङ्गता तथा समावेशीमैत्री प्रक्रियाओं के पहलुओं में अभी भी सुधार की आवश्यकता है, उन्होंने उल्लेख किया। मतदान स्थल, मतदान काल और मतगणना की स्थिति को जेड–सी (लैंगिक समानता, अपाङ्गता और सामाजिक समावेशीकरण) प्रावधानों के तहत पर्यवेक्षण कर प्रतिवेदन तैयार किया गया है। सात प्रदेशों के २३ जिलों के ५५ स्थानीय तहों के ४६ निर्वाचन क्षेत्रों में १५६ मतदान केन्द्रों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया गया था।

कार्यक्रम की सभापति मीरा ढुंगाना, मुख्य अतिथि डा. तुलाधर, एफडब्लुएलडी के कार्यकारी निर्देशक अधिवक्ता सविन श्रेष्ठ और अर्पणा श्रेष्ठ ने संयुक्त रूप से प्रतिवेदन का अनावरण किया। निर्देशक श्रेष्ठ ने बताया कि मतदान केन्द्रों में पर्याप्त सूचना का अभाव है, जिसके सुधार की उम्मीद अगली बार निर्वाचन आयोग द्वारा की जाएगी। अधिकांश मतदान केंद्रों में पुरुष और महिला के लिए अलग-अलग लाइन थी, परन्तु अन्य समूहों की उपेक्षा की गई तथा प्राथमिक उपचार, पेयजल, स्तनपान कक्ष और आराम कक्ष की कमी थी, मतदान स्थल अपाङ्गता-अनुकूल नहीं था। मतदान के बाद लौटने वाले मार्ग पर वृद्धों और अशक्तों पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया, यह जानकारी भी कार्यकारी निर्देशक श्रेष्ठ ने दी। आगामी दिनों में निर्वाचन आयोग इन मुद्दों पर ध्यान देगा, इसका विश्वास व्यक्त किया गया। अधिवक्ता रोजिना श्रेष्ठ द्वारा संचालित इस कार्यक्रम में निर्वाचन पर्यवेक्षण में सहयोग करने वाले विभिन्न गैरसरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अनुभव की गई समस्याओं और समाधान के सुझाव साझा किए।

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