
चैते धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य के बावजूद किसान ठगे गए
२८ जेठ, काठमाडौं। सरकार द्वारा इस वर्ष समय पर चैते धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारित करने के बाद देशभर के किसानों में उम्मीद जगी थी – ‘इस बार उचित मूल्य मिलेगा!’ पिछले वर्षों में धान की कटाई हो जाने या सस्ते दाम पर व्यापारी को बेचने के बाद ही मूल्य निर्धारित किया जाता था, लेकिन इस बार सरकार ने चैत के अंतिम सप्ताह में ही मूल्य तय कर दिया। हालांकि, जब किसान अपने उपजाए हुए धान को बाजार में बेचने पहुंचे, तो उनकी उम्मीदें निराशा में बदल गईं। सरकार द्वारा तय मूल्य केवल कागजों तक सीमित रह गया और पूर्वी सिराह से लेकर मध्य नेपाल के चितवन और पश्चिमी कैलाली तक के किसान पुराने हालात से जूझने पर मजबूर हैं। वे अपनी मेहनत के फल को दलालों की मर्जी पर कौड़ी के भाव बेचने को मजबूर हैं।
समय पर मूल्य तय हुआ, पर लागू नहीं हुआ – कृषि, वन तथा वातावरण मंत्री गीता चौधरी की पहल से गत चैत के अंतिम सप्ताह में चालू आर्थिक वर्ष के लिए चैते धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रति क्विंटल २,८५६.४९ रुपए निर्धारित किया गया था। यह पिछले वर्ष के २,८०० रुपए से ५५.८४ रुपए अधिक है। सरकार ने मूल्य निर्धारण के समय १८ प्रतिशत नमी वाला धान मापदंड मान लिया था। यदि धान में नमी १८ प्रतिशत से अधिक होती है तो प्रति क्विंटल १ किलो २०० ग्राम के अनुसार वजन घटा कर मूल्य निर्धारित करने का तकनीकी प्रावधान भी किया गया है। लेकिन मूल्य तय होने के बावजूद खरीद के प्रभावी संयंत्र और निगरानी नहीं होने के कारण किसान तय मूल्य प्राप्त नहीं कर पाए हैं।
पिछले वर्षों में भी किसान इसी प्रकार की समस्या से दोچار थे। चैते धान को जेठ और असार की बारिश से पहले भंडारण करना होता है, इसलिए किसान धान को ठीक से सुखा नहीं पाते। इस “अधिक नमी” को ठिकाना बनाने के बहाने से व्यापारी और राइस मिल संचालक सरकारी मूल्य से बहुत सस्ते दाम पर धान खरीदते और बेचते रहते हैं, जो इस वर्ष भी जारी है। सरकार समर्थन मूल्य तय करती है, लेकिन सरकारी संस्थान जैसे खाद्य व्यवस्था तथा व्यापार कंपनी ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर खरीद नहीं करते, जिससे किसान स्थानीय व्यापारी को सस्ते भाव में धान बेचने को मजबूर हैं।