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तापमान वृद्धि के कारण अलास्का के हिमनद तेजी से पिघल रहे हैं

गर्मी के औसत तापमान में 1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि के कारण अलास्का के हिमनद पिघलने का समय लगभग तीन सप्ताह लंबा हो गया है, ऐसा एक अध्ययन में सामने आया है। वैज्ञानिक जर्नल ‘नेचर’ में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, शोधकर्ताओं ने 2016 से 2024 तक 3,000 से अधिक हिमनदों का विश्लेषण किया। तेज गर्मी के कारण हिमनद अपनी सुरक्षात्मक बर्फ की परत सामान्य वर्ष की तुलना में 28 प्रतिशत तक अधिक खो रहे हैं। 31 जेठ, काठमांडू।

विश्वव्यापी तापमान वृद्धि का सीधा प्रभाव अलास्का के हिमनदों पर गंभीर रूप से दिखने लगा है। ‘यूनिवर्सिटी ऑफ अलास्का फेयरबैंकस’ और ‘कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी’ के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए नवीन उपग्रह अध्ययन के अनुसार, औसत गर्मीयों के तापमान में प्रति 1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि से हिमनद पिघलने की प्रक्रिया लगभग तीन सप्ताह लंबी हो गई है। उन्होंने 2016 से 2024 तक अलास्का के 3,000 से अधिक हिमनदों के स्थल और उपग्रह डेटा का विश्लेषण किया।

इस अध्ययन के लिए यूरोप के ‘सेंटिनेल-1’ रडार उपग्रह से प्राप्त ‘सिंथेटिक अपरचर रडार’ तकनीक का उपयोग किया गया। यह तकनीक बादल, अंधकार या खराब मौसम में भी पृथ्वी की सतह की स्पष्ट तस्वीर लेने में सक्षम है। पारंपरिक रूप से प्रयुक्त ‘ऑप्टिकल’ तकनीक की तुलना में इस रडार ने हिमनद की ‘स्नोलाइन’ और पिघलने वाले दिनों का अधिक विश्वसनीय और निरंतर विवरण उपलब्ध कराया है, ये शोधकर्ताओं ने बताया।

अत्यधिक गर्मी के दौरान हिमनद सामान्य वर्षों की तुलना में अपने सुरक्षात्मक बर्फ की परत को 28 प्रतिशत तक अधिक खो देते हैं। सुरक्षात्मक बर्फ जल्दी समाप्त होने पर अंदरूनी मुख्य बर्फ खुल जाती है और सूर्य की सीधे संपर्क में आने से हिमनद पिघलने की दर तेज हो जाती है। शोध दल ने विशेष रूप से 2019 के जून 23 से जुलाई 10 के बीच अलास्का में आए विनाशकारी गर्मी की लहर का अध्ययन किया, जिस दौरान तापमान सामान्य से 20 से 30 डिग्री फेरनहाइट अधिक था। एंकोरेज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहली बार इतिहास में 90 डिग्री फेरनहाइट तापमान दर्ज हुआ।

इस अत्यधिक गर्मी के कारण हिमनद की स्नोलाइन सामान्य समय से लगभग दो महीने पहले लगभग 350 फीट ऊपर चली गई थी। यह मौसमी परिवर्तनों के प्रति हिमनदों की संवेदनशीलता को दर्शाता है। अध्ययन के मुख्य लेखक डॉ. अल्बिन वेल्स ने कहा कि तटीय क्षेत्र और आंतरिक हिमनदों के पिघलने की प्रक्रिया में कुछ भिन्नताएं हैं। तटीय हिमनदों में गर्मी के दौरान अधिक पिघलन और सर्दियों में अधिक बर्फ जमा होने की प्रवृत्ति होती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस नई रडार तकनीक की मदद से विश्वभर के हिमनदों के स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सटीक पूर्वानुमान करना आसान होगा।

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