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अर्थ मंत्रालय ने भुगतान रोकेपछि पूर्वाधार विकास कार्यालयमा ताला लगाइयो

समाचार सारांश

  • मधेस प्रदेश सरकार के आंतरिक कलह और बजट प्रबंधन में समन्वय की कमी के कारण लगभग एक अरब की विकास योजनाओं के भुगतान रुके हुए हैं।
  • अर्थ मंत्रालय द्वारा बजट प्रणाली में रोक लगाने के बाद, भौतिक पूर्वाधार मंत्रालय के अधीन ४८ योजनाओं का भुगतान असमंजस में पड़ गया है, जिससे निर्माण व्यवसायी तनावग्रस्त हैं।
  • धनुषा के निर्माण व्यवसायी संघ के महासचिव रुपेश सिंह ने कहा, ‘काम करवाने के बाद असार महीने के अंत में भुगतान रोकना कितना न्यायसंगत है?’ और सरकार की कार्यशैली पर आक्रोश जताया है।

१७ असार, जनकपुरधाम। चालू वित्तीय वर्ष के असार महीने का अंत नजदीक है, लेकिन मधेस सरकार में समस्याएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं। तीनदलीय गठबंधन सरकार में आंतरिक कलह और समन्वय की कमी के कारण कामकाज प्रभावित हो रहा है।

वर्तमान में निर्माण पूरा हो चुकी योजनाओं के भुगतान में परेशानी उत्पन्न हो गई है। भौतिक पूर्वाधार मंत्रालय के अधीन ४८ परियोजनाओं के लगभग एक अरब रुपये के भुगतान विवाद में हैं।

कार्यक्रम संचालित करने के लिए बजट व्यय प्रणाली (PLIMBS) में अर्थ मंत्रालय द्वारा पुनः बजट रोके जाने के बाद भुगतान की स्थिति अनिश्चित हो गई है। इसका असर निर्माण व्यवसायियों और उपभोक्ता समितियों पर पड़ा है।

असार महीने के अंत में कई निर्माण पूर्ण परियोजनाओं के भुगतान भी रुक जाने से व्यवसायी तनाव में हैं। भुगतान रोकने के कारण उन्होंने भौतिक पूर्वाधार मंत्रालय पर ताला लगाने की तैयारी की है। मंत्रालय के अंतर्गत पूर्वाधार विकास कार्यालय में ताला लगा दिया गया है।

धनुषा के निर्माण व्यवसायी संघ के महासचिव रुपेश सिंह ने कहा कि मधेस सरकार ने दर्जनों योजनाओं के बजट रोक कर सभी को तनाव में डाल दिया है।

उन्होंने कहा, ‘मंत्रालय ने टेंडर और अन्य प्रक्रिया पूरी कर योजनाओं को आगे बढ़ाया था। हमारी ओर से सभी कानूनी कार्य पूर्ण हुए। अब बजट रोकने के कारण भुगतान रोका गया है। काम सम्पन्न होने के बाद असार महीने के अंत में भुगतान रोकना कितना न्यायसंगत है?’

सरकार की मंशा सही नहीं होने और कई योजनाओं के निर्माण व्यवसायी तथा उपभोक्ता गम्भीर समस्याओं में होने के कारण मंत्रालय की ताला बंदी की गई है, उन्होंने बताया।

आर्थिक वर्ष २०८२/०८३ के साउन माह में अर्थ मंत्रालय द्वारा जारी खर्च मापदंड के अनुसार योजना कार्यान्वयन करते समय पूर्वस्वीकृति लेना अनिवार्य था।

वैशाख महीने के अंत तक अर्थ मंत्रालय ने PLIMBS प्रणाली में विकास बजट रोक रखा था। अंतिम सप्ताह में बजट खोलने के बाद मंत्रालयों ने कार्य आगे बढ़ाया और कुछ परियोजनाओं में अग्रिम भुगतान भी किया गया था।

लेकिन असार अंत में वापस हटते हुए अर्थ मंत्रालय ने फिर से बजट रुका दिया, जिससे भुगतान संबंधी समस्याएं और जटिल हो गई हैं।

भौतिक पूर्वाधार मंत्रालय के उपसचिव संजयकुमार साह ने कहा कि अर्थ मंत्रालय ने बजट खोलने का निर्णय लिया था, तभी निर्माण कार्य आगे बढ़ाया गया था, लेकिन बजट फिर रोकने से समस्या उत्पन्न हुई है।

उन्होंने कहा, ‘बजट खोलने के कारण ही निर्माण कार्य शुरू हुआ था, अब बजट रोकने से यह स्थिति आई है।’

खर्च मापदंड जारी करते समय अर्थ मंत्री नेपाली कांग्रेस के सुनिल यादव थे, जबकि वर्तमान मंत्री युवराज भट्टराई ने तत्कालीन निर्णय के अनुरूप मापदंड का पालन जरूरी बताया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय कैबिनेट के बिना नहीं बदला या रद्द किया जा सकता।

उन्होंने कहा, ‘११ महीने पहले जारी निर्देशिका के अनुसार बजट रोका गया है। योजना आगे बढ़ाने के लिए पूर्वस्वीकृति लेना आवश्यक है। मेरी सलाह है कि कैबिनेट में नया निर्णय लिया जाए।’

हालांकि तीनदलीय गठबंधन के भीतर चालू वर्ष में बजट रोकने और खर्च कटौती को लेकर विवाद चल रहा है। मधेस प्रदेश सरकार ने वित्तीय अनुशासन के लिए १० लाख से कम की योजनाओं का बजट रोकने और इंधन सहित अन्य शीर्षकों पर ३० से ५० प्रतिशत खर्च कटौती करने का निर्णय लिया था, जिससे मुख्यमंत्री, मंत्री और कर्मचारी असंतुष्ट हैं।

गत असार १३ की मंत्रिपरिषद् बैठक ने अर्थ मंत्रालय के निर्णय को उलटते हुए नया निर्णय किया था, लेकिन जिम्मेदारी पुनः अर्थ मंत्रालय को सौंपी गई है। यह प्रस्ताव अर्थ मंत्रालय से नहीं आया था और अर्थ मंत्री भट्टराई बैठक में अनुपस्थित थे, जिससे निर्णय की वैधता पर सवाल उठे हैं।

तीनदलीय गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री कांग्रेस के संसदीय दल के नेता कृष्णप्रसाद यादव हैं और अर्थ मंत्री नेकपा के दल के नेता युवराज भट्टराई हैं। मधेस सरकार में आंतरिक असंतोष के कारण कामकाज प्रभावित हो रहा है।

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