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जल्द चुनाव कराने के फैसले के बाद एन्फा विवाद और मुकदमों के बीच क्यों फंसी है?

एन्फा अध्यक्ष पंकज विक्रम नेंबांग (दायाँ) और महासचिव किरण राई

तस्वीर स्रोत, ANFA

तीन माह पहले, पिछले पुष १६ तारीख को अखिल नेपाल फुटबॉल संघ (एन्फा) ने समय से पहले चुनाव कराने की घोषणा की, जिसके बाद नेपाली फुटबॉल क्षेत्र में विवादों की एक श्रृंखला शुरू हुई और अब भी जारी है।

एन्फा के जल्दी चुनाव कराने के निर्णय का विरोध तीन पक्ष कर रहे हैं।

इनमें एक है राष्ट्रीय खेलकूद परिषद (राखेप), दूसरा क्लब और तीसरा एन्फा के कुछ पदाधिकारी।

किसका क्या बयान?

किसी भी राष्ट्रीय खेल संघ का चुनाव कराने के लिए राखेप की अनुमति अनिवार्य होती है। एन्फा ने अनुमति लिए बिना चुनाव कराने की कोशिश की, इसलिए राखेप ने देश के कानून के विपरीत बताते हुए बार-बार चुनाव प्रक्रिया रोकने का निर्देश दिया है।

डिवीजन क्लब और एन्फा के कुछ पदाधिकारियों का कहना है कि जिला स्तर से लेकर विभिन्न स्तरों पर चुनाव कर के ही केंद्रीय चुनाव होना चाहिए, इसके विपरीत जल्दी चुनाव कराने का विरोध हो रहा है।

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