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सभामुखले सुरक्षा निकायलाई गोली प्रहार रोक्न आदेश दिने व्यवस्था छैन – Online Khabar

सभामुख को सुरक्षा एजेंसियों को गोली चलाने से रोकने का कानूनी अधिकार नहीं है

फाइल तस्वीर


समाचार सारांश

  • विघटित प्रतिनिधिसभा के सभामुख देवराज घिमिरे ने कहा है कि सभामुख के पास प्रधानमंत्री, गृह मंत्री या सुरक्षा एजेंसियों को गोली चलाने से रोकने के लिए सीधे आदेश देने का कानूनी अधिकार नहीं है।
  • घिमिरे ने सुझाव दिया है कि संघीय संसद भवन की सुरक्षा के लिए सिंगल कमांड प्रणाली पर आधारित थ्रेट एनालिसिस के अनुसार स्पष्ट प्रोटोकॉल के साथ आवश्यक संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएं।
  • घिमिरे ने भाद्र 23 और 24 की जनजी आंदोलन की घटना पर किसी ने जोखिम का अनुमान नहीं लगाया और सुरक्षा सर्तकता अपर्याप्त रही।

११ चैत, काठमांडू । विघटित प्रतिनिधिसभा के सभामुख देवराज घिमिरे ने कहा है कि सभामुख के पास प्रधानमंत्री, गृह मंत्री या सुरक्षा एजेंसी को गोली चलाने से रोकने हेतु सीधे आदेश देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

यह बयान जांच आयोग की रिपोर्ट में शामिल है। आयोग को दिए बयान में घिमिरे ने कहा कि संघीय संसद भवन की सुरक्षा के लिए सिंगल कमांड प्रणाली पर आधारित थ्रेट एनालिसिस के अनुरूप स्पष्ट प्रोटोकॉल के साथ आवश्यक संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात करना अनिवार्य है।

जनजी आंदोलन के दौरान संघीय संसद की बैठक चल रही थी और नई बानेश्वर में स्थित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में तोड़फोड़ व आगजनी हुई थी।

आयोग में बयान देते हुए घिमिरे ने बताया कि भाद्र २३ को वह संसद सचिवालय सिंहदरबार में संसदीय सुनवाई समिति के अध्यक्ष पद की शपथ और विधेयक प्रमाणीकरण में व्यस्त थे।

भाद्र २४ को वह बालुवाटार में अपने निवास पर थे। उन्होंने कहा, ‘संघीय संसद भवन की सुरक्षा गृह मंत्रालय के अधीन सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी है, सभामुख का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।’

उन्होंने कहा कि भाद्र २३ और २४ के आंदोलन की जोखिम किसी ने नहीं जानी और सुरक्षा तैयारी भी पर्याप्त नहीं थी।

घिमिरे ने बयान में कहा, ‘आगामी अधिवेशन से पहले सामान्य चर्चा जरूर हुई थी, लेकिन जनजी आंदोलन के इतना बड़े खतरे का किसी ने अनुमान नहीं लगाया था, मुझे भी कोई विशेष सूचना नहीं मिली थी।’

भाद्र २३ को कुछ प्रदर्शनकारी संसद भवन परिसर के अंदर प्रवेश करने में सफल रहे। सुरक्षा एजेंसीयों को उम्मीद से अधिक संख्या में और अलग किस्म की भीड़ के कारण सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं हो पाई।

सुरक्षा एजेंसियों के बीच प्रभावकारी समन्वय का अभाव भी एक कारण था, उन्होंने उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, ‘संसद भवन की दीवार, गेट और संरचनात्मक कमजोरियों के कारण सुरक्षा चुनौती बढ़ गई है। हालांकि, ऐसे संरचनात्मक सुधार और सुरक्षा इन्फ्रास्ट्रक्चर की जिम्मेदारी कार्यपालिका और गृह मंत्रालय के अधीन है, इसलिए मैंने सभामुख के रूप में पहले कोई विशेष पहल नहीं की।’

भाद्र २३ को संसद परिसर में गोलीबारी की सूचना दोपहर को मिली और इसके बाद उन्होंने संसद सचिवालय के महासचिव के माध्यम से सुरक्षा एजेंसियों से आवश्यक समन्वय करने निर्देश दिए।

उन्होंने कहा, ‘बल प्रयोग के सिद्धांत और क्रमबद्धता पर प्रश्न उठाए गए, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने जोखिमपूर्ण स्थिति में भी राज्य की संपत्ति, संसद भवन और जनता के धन की सुरक्षा के लिए पूरा प्रयास किया।’

बल प्रयोग के सिद्धांत, गोली चलाने की आवश्यकता और औचित्य जैसे विषय सुरक्षा नीति, कानून और परिस्थिति के आधार पर संबंधित विशेषज्ञ और एजेंसियों को मूल्यांकन करना चाहिए, उन्होंने कहा।

अंत में उन्होंने कहा, ‘यह विषय सभामुख के स्पष्ट क्षेत्राधिकार में नहीं आता। सभामुख के पास प्रधानमंत्री, गृह मंत्री या सुरक्षा एजेंसियों को गोली चलाने से रोकने का आदेश देने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए संघीय संसद भवन की सुरक्षा हेतु सिंगल कमांड प्रणाली पर आधारित थ्रेट एनालिसिस के अनुरूप स्पष्ट प्रोटोकॉल के साथ उचित संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात करने की व्यवस्था होनी चाहिए – यह मेरा सुझाव है।’

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