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जाँच आयोग की रिपोर्ट लीक होने पर ‘भीड़ के मानसिक दबाव’ में कार्यान्वयन

जेन जी

तस्बिर स्रोत, EPA

जेन जी आन्दोलन से संबंधित जाँच आयोग की रिपोर्ट बुधवार को अचानक मीडिया में लीक होने के बाद दबाव में आई सरकार ने उसी दिन फैसला लिया कि इसे संघीय संसद सचिवालय की पुस्तकालय में अभिलेखित किया जाएगा और सार्वजनिक किया जाएगा।

सरकार और आयोग के पास ही माना जाने वाली वह संवेदनशील रिपोर्ट फैलने के बाद दिनभर प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद कार्यालय में इस विषय पर बैठकें हुईं।

प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता हेमराज अर्याल ने कहा, “सरकार द्वारा गोपनीय रखे गए दस्तावेज कैसे सार्वजनिक हुए, इस पर जांच होगी। कौन और कैसे यह जांच करेगा, अभी तय नहीं हुआ है।”

एक संवैधानिक विशेषज्ञ के अनुसार, इस तरह की लीक से सरकार को रिपोर्ट को योजनाबद्ध तरीके से लागू करने में कठिनाई होगी और इसके कारण जनता के दबाव में आना पड़ सकता है।

काठमांडू विश्वविद्यालय के कानून विशेषज्ञ विपिन अधिकारी कहते हैं, “जनता की अवधारणा हमेशा कानूनी शासन के अनुकूल नहीं होती और न ही हमारी दंड प्रणाली के अनुसार कार्यान्वयन में सहायक होती है।”

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