Skip to main content

सिलाम साक्मामा सजी बालेन, इसका अर्थ क्या है?

राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के वरिष्ठ नेता बालेन्द्र शाह ने प्रतिनिधि सभा सदस्यता की शपथ ग्रहण समारोह में विशेष सांस्कृतिक पोशाक पहनकर अपनी प्रस्तुति दी।

किरात समुदाय से जुड़े पारंपरिक सिलाम साक्मा पहनकर समारोह में भाग लेने पर उनका पहनावा सभी का ध्यान आकर्षित कर रहा है।

साधारण पोशाक से अलग यह पहनावा केवल बाहरी सुंदरता ही नहीं, बल्कि एक गहरे सांस्कृतिक महत्व को भी दर्शाता है।

किराती संस्कृत‍ि में सिलाम साक्मा को शुभचिन्ह माना जाता है। इसे मृत्यु या अपशकुन की राह रोकने वाला पवित्र प्रतीक माना जाता है। इसी कारण यह पहनावा विशेष अवसरों और धार्मिक-सांस्कृतिक संदर्भों में पहना जाता है।

शपथ ग्रहण समारोह में बालेन के सीने पर सजी सिलाम साक्मा ने उनकी पहचान को और भी अर्थपूर्ण एवं आकर्षक बना दिया है। पारंपरिक पोशाक को आधुनिक सार्वजनिक मंच पर प्रस्तुत करना विविधता, पहचान और समावेशिता का सम्मान जताने वाला सन्देश भी देता है। इससे नेपाल समाज में परंपरा और आधुनिकता के सुंदर समन्वय की झलक मिलती है।

बालेन की इस प्रस्तुति ने नेपाली राजनीति एवं सार्वजनिक जीवन में सांस्कृतिक पहचान का सम्मान करना एकता और विविधता का सुंदर प्रतिबिंब दिखाया है।

पहले भी सार्वजनिक रूप से हर्क साम्पाङ ने सिलाम साक्मा पहनकर इसे चर्चा में लाया था। उसके बाद नेपाली फिल्म “जारी” समेत अन्य माध्यमों ने इसे और लोकप्रिय बनाकर सांस्कृतिक पहचान के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सिलाम साक्मा क्या है?

लिम्बू भाषा में ‘सि’ का अर्थ मृत्यु, ‘लाम’ का अर्थ मार्ग और ‘साक्मा’ का अर्थ रोकना होता है। इसलिए सिलाम साक्मा का मतलब “मृत्यु के मार्ग को रोकना” होता है।

यह केवल एक वस्त्र का हिस्सा नहीं, बल्कि लिम्बू समुदाय की सांस्कृतिक पहचान, आस्था और विश्वास से गहरा जुड़ा प्रतीक है। हाल के समय में इस प्रतीक के उपयोग में वृद्धि सांस्कृतिक जागरूकता और अपनी पहचान पर गर्व का संकेत है।

अतिथियों का स्वागत करते समय सिलाम साक्मा पहनना एक सामान्य प्रथा है। सार्वजनिक समारोहों और विवाह समारोहों में भाग लेते वक्त भी इसे छाती पर पहना जाता है।

कैसे बनता है?

हाथ से बुना हुआ चारकोनी सिलाम साक्मा किनारों पर फुर्कों से सजा होता है। इसे दो बाँस के फ्रेम में विभिन्न रंगों की धाका कपड़ों से आकर्षक रूप से तैयार किया जाता है। इसे दैवीय शक्ति को प्रसन्न करने, सुख, शांति और सद्भाव के लिए तङ्सिन (सांस्कृतिक रस्म) किया जाता है। सिलाम साक्मा को जीवन की रक्षा कवच के रूप में भी माना जाता है।

जवाफ लेख्नुहोस्

तपाईँको इमेल ठेगाना प्रकाशित गरिने छैन। अनिवार्य फिल्डहरूमा * चिन्ह लगाइएको छ