‘कोर्ट विवाह’ के प्रति आकर्षण बढ़ता हुआ
समाचार सारांश
संपादकीय समीक्षा के बाद तैयार।
- चैत्र ११ को दिन काठमांडू जिल्ला अदालत में बाजुरा और तनहुँ के दो जोड़े ने दर्ता विवाह किया।
- अदालत ने दर्ता विवाह के लिए पाँच सौ रुपये शुल्क लेने और फास्ट ट्रैक सेवा के माध्यम से दो घंटे के अंदर प्रमाणपत्र प्रदान करने की व्यवस्था की है।
- दर्ता विवाह के लिए अदालत में अलग भवन और परिसर न होने के कारण उत्सव मनाने आए जोड़ों को उपयुक्त माहौल न मिलने की शिकायत है।
१३ चैत्र, काठमांडू। इसी चैत्र ११ की तारीख को काले जीन्स जैकेट और पैंट पहने बाजुरा त्रिवेणी नगरपालिका-७ के लोकेशकुमार अयडी जिला अदालत काठमांडू परिसर में काफी जल्दी में दिखे। उनके साथ ही उसी जिले की गौमूल-४ की पुनम कुँवर हरी कुर्ता सलवार पहनकर पीछे-पीछे चल रही थीं।
वह दोनों अदालत में किसी प्रशासनिक झंझट या न्याय के लिए नहीं बल्कि अदालती विवाह अर्थात दर्ता विवाह के लिए पहुंचे थे। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद वर अयडी और वधू कुँवर ने उसी दिन विवाह का प्रमाणपत्र प्राप्त किया।
वैदेशिक रोजगार के सिलसिले में जापान में रहे अयडी ने थोड़े अवकाश में नेपाल आकर अपने परिवार से सहमति लेकर अदालती विवाह किया। वर अयडी कहते हैं, ‘‘चैत्र महीना होने के कारण परंपरागत विवाह के लिए सही समय, तिथि और मुहूर्त नहीं मिल सके। इसलिए परिवार की अनुमति लेकर दर्ता विवाह करने का निर्णय लिया। घर पहुंचना संभव नहीं था और कम खर्च में जल्दी काम पूरा करने के लिए यह तरीका अपनाया गया।’’
सामान्यतः विवाह के साथ ही गहनों, पारंपरिक पोशाक में वर-वधू और सजावट की उम्मीद होती है, लेकिन हाल के समय में बढ़ते दर्ता विवाह ने इन परंपरागत अवधारणाओं में नई विविधता लाई है।
सिर्फ अयडी और कुँवर ही नहीं, चैत्र १० को तनहुँ के भानु नगरपालिका-१२ के कसम पन्त और धादिङ त्रिपुरा सुंदरी गाउँपालिका-१ की भावना गिरी ने भी उसी अदालत से दर्ता विवाह किया।
पन्त और गिरी सामान्य पोशाक में और विद्यार्थी जैसे बैग लेकर ताजा प्राप्त प्रमाणपत्र के साथ अदालत के साइन बोर्ड के पास फोटो खिंचवा रहे थे। वर पन्त ने कहा, ‘‘स्व-अध्ययन से कोर्ट मैरिज विश्वसनीय और भरोसेमंद होती है यह जानकर ही यहां आया हूं। यह कानूनी विवाह है, बच्चों और परिवार की सहमति से कम समय, कम खर्च और आसान तरीके से विवाह पूरा होता है और एक परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी कम करता है।’’
शहरीकरण, विदेशी रोजगार, व्यस्त जीवनशैली और सामाजिक परंपराओं के बदलने के कारण दर्ता विवाह के प्रति लोगों की रुचि और बढ़ रही है। अदालती विवाह बालविवाह, बहुविवाह, फर्जी विवाह के खिलाफ प्रभावी भूमिका निभाते हुए सामाजिक बुराइयों जैसे दहेज प्रथा को भी कम करने में मदद कर रहा है, इसलिए समाज में सकारात्मक प्रतिक्रिया बढ़ रही है।
फागुन में काठमांडू जिला अदालत में २७ जोड़ों ने दर्ता विवाह किया
काठमांडू जिला अदालत के आंकड़ों के अनुसार, गत फागुन में एक ही दिन में २७ जोड़ों ने दर्ता विवाह किया था। सूचना अधिकारी दीपककुमार श्रेष्ठ के अनुसार, लगन वाले दिन अधिकतम २७ और अन्य दिनों में औसतन १० तक दर्ता विवाह होते हैं। चालू आर्थिक वर्ष के नौ महीनों (चैत्र ११ तक) में वहां से १,७५५ दर्ता विवाह हो चुके हैं।
पिछले आर्थिक वर्ष में दर्ता विवाह के लिए २,८४३ आवेदन आए थे, लेकिन जेनजी आंदोलन में अभिलेख जलने के कारण कुल दर्ता विवाह के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं।
नेपाली परंपरा अनुसार विवाह के लिए उपयुक्त महीने तकनिकी लगान होते हैं, लेकिन ऐसे परंपरागत माहों में न मानने वाले विवाह भी खूब हो रहे हैं: चैत्र ९ तक ६७, पौष में २२६, कार्तिक में १५९, सावन में १९४ दर्ता विवाह दर्ज हैं।
दर्ता विवाह हेतु कानूनी प्रोत्साहन
समाजशास्त्री टीकाराम गौतम का कहना है कि दर्ता विवाह आधुनिक समाज की विशेषता और सामाजिक बदलाव का संकेत है। उन्होंने कहा, ‘‘समाज की सभी संस्कृतियों की व्याख्या सामाजिक संरचना और जरूरतों के अनुसार होती है। नेपाली समाज की धार्मिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संरचनाएं पहले से काफी बदल गई हैं, इसलिए दर्ता विवाह की संख्या बढ़ रही है।’’
अदालत में कानूनी रूप से प्रमाणित होने के कारण राज्य इसे निरंतर प्रोत्साहित करता है।
दर्ता विवाह करने वाले जोड़े सामान्यतः पढ़ाई, व्यवसाय, रोजगार के कारण काठमांडू में रहते हैं या अपनी स्थायी जगह पर नहीं जा सकते।
वरिष्ठ अधिवक्ता सुनिता रेग्मी पोखरेल के अनुसार पहले दर्ता विवाह मुख्य जिल्ला अधिकारी कार्यालय से होता था, अब जिला अदालत से होता है।
उन्होंने कहा, ‘‘विदेशी रोजगार के लिए युवाओं के विदेश जाने के बढ़ने से दर्ता विवाह भी बढ़ा है। दर्ता विवाह को अधिक अधिकारिक माना जाता है। पारंपरिक विवाह प्रक्रिया में खामियां देख कर युवा दर्ता विवाह की ओर झुक रहे हैं।’’
विवाह दर्ता और दर्ता विवाह में अंतर होता है। विवाह पंजीकरण कार्यालय में किया जाना शादी का दर्ता है, जबकि अदालत में आयोजित आयोजन को दर्ता विवाह कहा जाता है, वरिष्ठ अधिवक्ता ने स्पष्ट किया।
पाँच सौ रुपये में दर्ता विवाह
दर्ता विवाह के लिए दोनों पक्षों का नागरिकता प्रमाणित कॉपी और अन्य योग्यता दस्तावेजों के साथ फोटो लगाकर आवेदन देना होता है। अदालत विवाह दर्ता के लिए पाँच सौ रुपये शुल्क लेती है।
कैलाली के लम्की के विनोद विष्ट विदेश रोजगार के लिए सर्बिया जाते समय दर्ता विवाह कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अधिकारिक निकाय से कानूनी विवाह करना एक शुभ अवसर है, यह सस्ता ही नहीं, विदेश जाने के लिए आवश्यक दस्तावेज भी बन जाता है।’’ विवाह प्रक्रिया पूरी कर वे १० चैत्र को कैलाली की रश्मि बडुवाल के साथ विवाहित हुए हैं।
अदालत सूत्रों के अनुसार, कानूनी समय सीमा सात दिनों से कम समय में भी सभी दस्तावेज उपलब्ध होने पर उसी दिन प्रमाणपत्र दे दिया जाता है।
फिर भी अदालत में दर्ता विवाह के लिए अलग भवन और परिसर न होने के चलते शादी समारोह मनाने आए जोड़ों को उचित माहौल नहीं मिल पा रहा है।
काठमांडू में देश के ७७ जिलों के नागरिक रहते हैं, और कुछ लोग जल्दी विवाह कर विदेश जाने की स्थिति में होते हैं, इसलिए अदालत ने प्रमाणपत्र दो घंटे में देने वाली ‘फास्ट ट्रैक सेवा’ शुरू की है।
दलित अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि अदालती विवाह ने जातीय भेदभाव को कम करने में भी मदद की है।
कुछ जोड़े प्रमाणपत्र लेने आते समय साज-सज्जा कर परिवार के साथ उत्सव मनाने के दृश्य भी देखने को मिलते हैं।
नेपाली नागरिकों के लिए विवाह के लिए दोनों पक्षों का अविवाहित होना और स्थायी पता वाला वडा कार्यालय की सिफारिश अनिवार्य होती है, जबकि विदेशी के लिए कम से कम १५ दिन नेपाल में निवास प्रमाणपत्र आवश्यक होता है।
विदेशी नागरिकों के लिए संबंधित देश के दूतावास से ‘नो अब्जेक्शन लेटर’ और विवाह योग्य प्रमाणित सिफारिश लेनी होती है।
विदेशी नागरिक की आयु न्यूनतम सीमा संबंधित देश का निर्धारित होता है जिसे नेपाली भाषा में अनुवाद कर पेश करना होता है। नेपाल में अगर उस देश का दूतावास नहीं है तो भारत के दूतावास की सिफारिश भी स्वीकार्य होती है।
लगन देखने के लिए अदालत में पूर्व तैयारी
हाल ही में दर्ता विवाह के लिए ज्योतिष से मुहूर्त देख कर आने वाले जोड़े बढ़े हैं। अदालत भी अगले दिन विवाह के लिए लगन देखकर पूर्व तैयारी और जनशक्ति प्रबंधन करती है।
अदालत परिसर में रोजाना कई जोड़े फूलमाला पहनाकर, अंगूठी बदल कर, सिंदूर लगाकर उत्सव मनाते देखे जाते हैं। व्यस्त जीवनशैली ने भी दर्ता विवाह को आकर्षक बनाया है। कई जोड़े अदालत में दर्ता विवाह करने के बाद भी सामान्य परंपरागत रीति-रिवाज से विवाह करते हैं।
अदालत में विवाह के लिए अलग स्थान की आवश्यकता
अदालत परिसर में दर्ता विवाह के लिए अलग भवन और परिसर न होने के कारण उत्सव मनाने आए जोड़ों के लिए उचित माहौल उपलब्ध नहीं हो पाता। पारंपरिक अपराधी और परिवार के सदस्य एक ही जगह होने की बाध्यता भी असुविधा देती है। इसलिए विवाह के लिए अलग स्थान की व्यवस्था की मांग हो रही है। कानूनी मान्यता विवाह को सामाजिक और पारिवारिक जीवन व्यवस्थित करने में मदद करती है।
देश के सभी जिला अदालतों में विवाह पंजीकरण होता है, लेकिन तुलनात्मक रूप से ललितपुर, भक्तपुर, कास्की, रुपन्देही, सुनसरी, पर्सा, चितवन और मकवानपुर में दर्ता विवाह अधिक होते हैं। अदालत कानूनी प्रतिबद्धता और परिवारजनों की उपस्थिति में होने वाले इन विवाहों को सदैव प्रोत्साहित करती है।