
महिलाएं कार्यस्थल में क्यों पीछे रह जाती हैं? शोध ने उजागर किया ‘छिपा हुआ समय अंतर’ कारण
शोध से पता चला है कि महिलाओं को घरेलू और कार्यालय दोनों जिम्मेदारियाँ निभाने के कारण समय की कमी के चलते प्रतिस्पर्धा में पीछे रहना पड़ता है। कार्यस्थल में महिलाओं के पीछे रहने का मुख्य कारण केवल भेदभाव या कम वेतन नहीं है। यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट लंदन (यूईएल) के प्रोफेसर टॉयिन आदिसा और उनके सहयोगियों द्वारा किए गए नए शोध ने एक गहरा कारण खोजा है, जिसे ‘छिपा हुआ समय अंतर’ (Hidden Time Gap) कहा गया है। ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मैनेजमेंट रिव्यूज’ में प्रकाशित इस अध्ययन में ८८ विभिन्न शोधों का विश्लेषण कर निष्कर्ष निकाला गया है कि महिलाएं अपनी क्षमता या महत्वाकांक्षा की कमी के कारण नहीं, बल्कि समय अभाव के कारण कार्यस्थल में पिछड़ रही हैं।
दोहरी जिम्मेदारी का प्रभाव: इस शोध के अनुसार कई महिलाएं वास्तव में ‘दो नौकरियां’ कर रही हैं: एक वेतनभोगी कार्यालय का काम और दूसरा घर के अंदर समयबद्ध निरंतर कार्य जैसे देखभाल, खाना बनाना और अन्य घरेलू जिम्मेदारियां। इस ‘दोहरी भार’ के कारण महिलाओं के पास अपना नेटवर्क विकसित करने, प्रशिक्षण लेने, कार्यालय में सक्रिय भागीदारी बढ़ाने और कैरियर विकास के लिए पर्याप्त समय नहीं होता। प्रोफेसर आदिसा का कहना है, ‘महिलाओं के पीछे रहने का कारण उनकी क्षमता नहीं है, बल्कि उनका ‘दोहरी शिफ्ट’ – घर और कार्यालय दोनों जिम्मेदारियों को कार्यस्थल द्वारा नजरअंदाज किया जाना है। हम अभी भी उस आदर्श कर्मचारी की कल्पना कर रहे हैं जिसे घर की कोई जिम्मेदारी नहीं और जिसके पास अनंत समय उपलब्ध है।’
सिर्फ लचीले काम करने के विकल्प पर्याप्त नहीं: अध्ययन में यह भी दिखाया गया है कि कई संस्थाएं फ्लेक्सिबल वर्किंग विकल्प दे रही हैं, फिर भी यह समस्या हल नहीं हुई है। कारण है कि कार्य समय भले ही लचीला हो, उत्पादनशीलता और उपलब्धता की अपेक्षाएं अभी भी पुराने ‘आदर्श कर्मचारी’ मॉडल पर आधारित हैं, जो महिलाओं पर मानसिक दबाव बढ़ाती हैं। यह समस्या केवल अफ़्रीका या विकासशील देशों में ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर मौजूद है। खासतौर पर मातृत्वों से जुड़ी सांस्कृतिक अपेक्षाएं महिलाओं के समय को सीमित करती हैं और वे पुरुष सहकर्मियों के साथ बराबरी से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पातीं।
सतही सुधारों से नहीं होगा समाधान, संरचनात्मक बदलाव जरूरी: प्रोफेसर आदिसा और उनकी टीम ने स्पष्ट किया है कि इस समस्या को हल करने के लिए छोटे-छोटे नीति सुधार पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने कुछ अहम बिंदुओं पर जोर दिया है: शिशु देखभाल में सहायता – कार्यस्थल पर या उसके निकट गुणवत्तापूर्ण शिशु देखभाल की व्यवस्था होनी चाहिए। जिम्मेदारियों का निष्पक्ष वितरण – महिलाओं और पुरुषों दोनों को घरेलू और व्यावसायिक जिम्मेदारियाँ समान रूप से बांटनी चाहिए। कार्य का पुनर्गठन – कार्य का मूल्यांकन समय के आधार पर नहीं, परिणाम के आधार पर किया जाना चाहिए और घरेलू जिम्मेदारियों का सम्मान किया जाना चाहिए। आदिसा ने कहा, ‘यदि हम वास्तव में समावेशी कार्यस्थल बनाना चाहते हैं, तो समाज को देखभाल को जो महत्व देता है और कार्यालय की कामगारों से अपेक्षा करता है, दोनों को पुनर्विचार करना होगा।’