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कपिलवस्तु में मिलने वाला व्रत का चावल ‘तिन्ना’

कपिलवस्तु जिले के कृष्णनगर नगरपालिकांतर्गत अजिगरा ताल क्षेत्र तिन्ना चावल उत्पादन क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। इसे लाल जंगली चावल भी कहा जाता है। यह खासतौर पर दलदली जमीन में पाया जाने वाला चावल है। अंग्रेज़ी में इसे ‘Red Wild Rice’ कहा जाता है जबकि इसका वैज्ञानिक नाम ‘Oryza rufipogon’ है। यह चावल उच्च फाइबर, प्रोटीन, खनिज और कार्बोहाइड्रेट युक्त होता है। साथ ही यह ग्लूटेन मुक्त तथा बिना पॉलिश किया गया आयरन युक्त अनाज है, जो प्राकृतिक रूप से दलदली क्षेत्र में उगता है। इसे मुख्यतः सात्विक और फाइबरयुक्त भोजन के रूप में माना जाता है। प्राकृतिक तालाब पारिस्थितिकी तंत्र में वृद्धि करता है और प्रायः कीटनाशक, रसायनिक पदार्थ या सिंचित उर्वरकों का उपयोग नहीं होने के कारण यह बिलकुल शुद्ध रहता है। यह डिटॉक्सीफिकेशन और स्वास्थ्य के लिए उपवास आहार में व्यापक रूप से इस्तेमाल होता है।

तिन्ना चावल एक दुर्लभ और पौष्टिक जंगली लाल रंग का चावल है। विशेषकर हिन्दू त्योहारों जैसे छठ, हरितालिका तीज, ऋषि पंचमी, एकादशी आदि पर व्रती लोग इसे पकाकर चावल के रूप में खाते हैं। इसमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जो रक्त में चीनी की मात्रा नियंत्रण में मदद करता है। इसका रंग गहरा लाल भूरा से लेकर तीव्र गहरा लाल रंग तक फैला होता है और कभी-कभी मिट्टी या नटी की खुशबू भी आती है। यह रंग चोकर तह में पाए जाने वाले प्राकृतिक एंथोसायनिन पिगमेंट्स के कारण उत्पन्न होता है। पकाते समय यह लाल भूरा और टोनो रंग तीव्र दिखाई देता है।

स्थानीय किसान राम विलास यादव के अनुसार तिन्ना चावल को तिन्नी, तिनिया और तुम्बा सहित कई अन्य नामों से जाना जाता है। यह चावल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। अक्टूबर से दिसंबर तक सिमसार के आसपास के स्थानीय लोग इसे जंगल से इकट्ठा करते हैं और इसे प्रायः ‘व्रत का चावल’ कहा जाता है। तिन्ना चावल नेपाल के ग्रामीण क्षेत्रों में जैविक विविधता और सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बाजार में इसकी मांग बढ़ने पर कपिलवस्तु के किसान ताल के आसपास खेती भी करने लगे हैं। वर्तमान में इस चावल की कीमत कपिलवस्तु बाजार में प्रति किलो 230 रुपये तक पहुंच चुकी है।

त्रिभुवन विश्वविद्यालय के वनस्पति शास्त्री प्रो. डॉ. मोहन प्रसाद देवाकोटा के साक्षात्कार में बताया गया कि तिन्ना चावल घास वाले मैदान, दलदली क्षेत्र, कृत्रिम स्थलीय और जलीय स्थानों तथा समुद्री क्षेत्रों में बढ़ता है। तिन्ना या लाल चावल को 2017 में अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ ने खतरे की रेड लिस्ट में शामिल किया था। तथापि इसे सबसे कम चिंता वाली श्रेणी में रखा गया है, जो इस प्रजाति पर कोई बड़ा खतरा नहीं होने का संकेत है। अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ के अनुसार तिन्ना चावल नेपाल के अलावा ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, कंबोडिया, चीन (जियांग्सू, हुनान, गुआंगशी, ग्वांगडोंग, युन्नान), कोलम्बिया, इक्वाडोर, गुयाना, हांगकांग, भारत के विभिन्न राज्यों, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, पपुआ न्यू गिनी, फिलिपीन, श्रीलंका, ताइवान, थाईलैंड और वियतनाम में भी पाया जाता है।

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