Skip to main content

नीतिगत निर्णयों को स्पष्ट किया जाएगा, न्यायाधीश नियुक्ति के लिए प्रतिस्पर्धा की घोषणा

सरकार ने 2046 साल के बाद सार्वजनिक पद पर रहे व्यक्तियों की संपत्ति जांच तुरंत आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। मंत्रिपरिषद् ने नीतिगत निर्णयों की स्पष्ट परिभाषा देने और प्रशासनिक तथा राजनीतिक कार्यक्षेत्रों को अलग करने की योजना बनाई है। साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी को राष्ट्रीय रणनीतिक उद्योग घोषित करते हुए डिजिटल अवसंरचना विकास और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रचार-प्रसार की नीति तय की गई है। 1 वैशाख, काठमांडू।

सरकार ने 2046 साल के बाद सार्वजनिक पदों पर रहे व्यक्तियों की संपत्ति जांच तत्काल आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। मंगलवार को प्रकाशित ‘राष्ट्रीय प्रतिबद्धता’ के मसौदे में पारदर्शी और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से संपत्ति जांच का उल्लेख किया गया है। इससे पहले सरकार ने 15 दिनों के अंदर प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद् कार्यालय के अधीन संपत्ति जांच समिति गठित करने का ऐलान किया था, लेकिन अब तक समिति का गठन नहीं हुआ है। सरकारी अधिकारियों का दावा है कि समिति गठन का गृहकार्य जारी है।

वर्तमान में केवल शिकायत मिलने पर ही अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग सार्वजनिक पदधारियों की संपत्ति जांच सकता है। लेकिन न्यायाधीशों की संपत्ति जांच अख्तियार नहीं बल्कि न्यायपरिषद् को करनी चाहिए। 2058 साल में न्यायाधीश भैरव प्रसाद लम्साल के नेतृत्व में संपत्ति जांच आयोग गठित हुआ था, लेकिन तब से अब तक कोई नया न्यायिक आयोग नहीं बनाया गया है।

सरकार ने यह भी प्रतिबद्धता जताई है कि मंत्रिपरिषद् द्वारा लिए जाने वाले ‘नीतिगत निर्णयों’ की स्पष्ट परिभाषा की जाएगी।

जवाफ लेख्नुहोस्

तपाईँको इमेल ठेगाना प्रकाशित गरिने छैन। अनिवार्य फिल्डहरूमा * चिन्ह लगाइएको छ