
सरकार का लोकसभा सीटों की संख्या 50 प्रतिशत बढ़ाने का फैसला
केन्द्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में डीलिमिटेशन विधेयक की चर्चा के दौरान बताया कि प्रत्येक राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या 50 प्रतिशत तक बढ़ाई जाएगी। उनकी जानकारी के अनुसार, लोकसभा की सीट संख्या 815 हो जाएगी, जिसमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। सरकार ने आज संसद में डीलिमिटेशन विधेयक को दायर कर दिया है। विपक्षी दलों ने इस विधेयक पर आरोप लगाया है कि यह उत्तर भारत और अधिक प्रभाव वाले राज्यों में सीटें बढ़ाने और दक्षिण भारतीय राज्यों के प्रतिनिधित्व को कमजोर करने का प्रयास है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने डीलिमिटेशन का विरोध करते हुए कहा है कि वे इस विषय में 23 अप्रैल के मतदान में विरोध करेंगे। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इस विधेयक का विरोध करते हुए संसद में कहा, “सन् 2023 में संसद ने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित किया था। विपक्षी नेताओं ने 2024 के चुनाव से इसे लागू करने की मांग की थी, लेकिन यह लागू नहीं हुआ।” तृणमूल कांग्रेस की सांसद काकोली घोष ने बताया कि डीलिमिटेशन में महिलाओं के आरक्षण को जोड़ने के कारण इसका विरोध किया जा रहा है।
राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखा, “भाजपा की योजना 2029 के चुनाव में अपने लाभ के लिए सभी लोकसभा सीटों का डीलिमिटेशन अपने पक्ष में करने की है।” उन्होंने आगे कहा, “मतदाता वितरण असमान है और क्षेत्रीय रूप से अलग-अलग क्षेत्र हैं जिनका दूसरे क्षेत्रों से कोई संबंध नहीं दिखता।” विपक्षी दलों का मानना है कि यह पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव से पहले महिलाओं को लुभाने की राजनीतिक रणनीति भी है।
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इस विधेयक को बेहद अन्यायपूर्ण बताते हुए दक्षिणी राज्यों को क्षति पहुंचाने पर प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि महिलाओं को 30 सालों से अधिकारों के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ रही है और अब यह लागू हो रहा है।