
प्रहरी मुख्यालय ने पुलिस विधेयक अध्ययन के लिए समिति का गठन किया
समिति के संयोजक एआईजी राजन अधिकारी हैं और गृह मंत्रालय ने सुधार के मुद्दे पेश करने को कहा है। प्रस्तावित विधेयक में सीडीओ के अधिकार बढ़ाकर पुलिस की शक्तियों को कमजोर करने को लेकर असंतोष है। ६ वैशाख, काठमाडौं। संसद विघटन के बाद निष्क्रिय हुए पुलिस विधेयक (प्रस्तावित संघीय पुलिस अधिनियम) का अध्ययन करने के लिए पुलिस मुख्यालय नक्सल ने एक समिति का गठन किया है। गत २३ और २४ भदौ को हुए जनयुद्ध आंदोलन के बाद संसद के विघटन के साथ उक्त पुलिस विधेयक निष्क्रिय हो गया था। २१ फागुन को प्रतिनिधि सभा के चुनाव के बाद पुलिस मुख्यालय ने इसका अध्ययन करने के लिए समिति बनाई है।
पुलिस प्रधान कार्यालय के अपराध अनुसंधान विभाग प्रमुख एवं अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक (एआईजी) राजन अधिकारी के संयोजन में पुलिस मुख्यालय ने यह समिति गठित की है। समिति में कानूनी शाखा के एसपी सहित अन्य पुलिस अधिकारियों को सदस्य बनाया गया है, पुलिस प्रधान कार्यालय के एक स्रोत के अनुसार। गृह मंत्रालय ने पुलिस विधेयक में सुधार करने वाले पक्ष प्रस्तुत करने को कहा था, जिसके बाद पुलिस प्रधान कार्यालय ने इस समिति का गठन किया। नेपाल पुलिस के सह प्रवक्ता तथा वरिष्ठ उप निरीक्षक (एसएसपी) दीप शमशेर जबरा के अनुसार, एआईजी अधिकारी की समिति के साथ-साथ पुलिस अन्वेषण तथा योजना विकास निर्देशनालय भी काम कर रहा है।
नेकपा पुलिस विधेयक में उल्लिखित कुछ विषयों को लेकर नाराजगी जताई है। पुलिस अधिनियम २०१२ साल के अधिकारों को भी छीनने की कोशिश करने के कारण पुलिस मुख्यालय ने इसका विरोध किया है। विधेयक की धारा ७ में परिचालन, निर्देशन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण का प्रावधान है। जिले में शांति और सुरक्षा की जिम्मेदारी मुख्य जिला अधिकारी (सीडीओ) के अधीन है। पुलिस अधिनियम २०१२ की धारा ८ के अनुसार, सीडीओ के आदेशानुसार पुलिस शांति और सुरक्षा का कार्य करता आ रहा है।
परन्तु प्रस्तावित विधेयक की धारा ७(२) में कहा गया है कि “जिले की शांति, सुरक्षा तथा सुव्यवस्था, अपराध रोकथाम एवं नियंत्रण के संदर्भ में पुलिस कर्मचारी मुख्य जिला अधिकारी के निर्देशन, नियंत्रण तथा पर्यवेक्षण में रहेंगे।” इस व्यवस्था से शांति और सुरक्षा के अलावा अपराध रोकथाम में भी इंटेलिजेंस पुलिस को सीडीओ के निर्देशन में ही कार्य करना होगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस प्रावधान से सीडीओ के अधिकार क्षेत्र में वृद्धि होकर पुलिस की शक्ति कमजोर करने की कोशिश हो रही है।
इसके अतिरिक्त, पुलिस मुख्यालय असंतुष्ट है क्योंकि पुलिस द्वारा प्रयोग किए जाने वाले कुछ अधिकार छीनकर सशस्त्र पुलिस बल को देने की कोशिश की जा रही है। प्रस्तावित सशस्त्र पुलिस बल, नेपाल विधेयक की धारा ८ में अंतरराष्ट्रीय सीमा सुरक्षा और सीमा अपराध नियंत्रण की जिम्मेदारी सशस्त्र पुलिस को दी जा सकती है। धारा ८(ट) में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्तों को नियंत्रित करने, तलाशी लेने और प्रारंभिक जांच कर कानूनी कार्रवाई के लिए संबंधित निकायों को भेजा जा सकता है। इस विषय पर भी पुलिस ने असंतोष जताया है और अपने अधिकारों को सशस्त्र पुलिस को देने का प्रयास करने पर संदेह प्रकट किया है।
पुलिस समायोजन से संबंधित दो अधिनियम २०७६ साल में ही बने हैं। ‘पुलिस कर्मचारियों को नेपाल पुलिस और प्रदेश पुलिस में समायोजित करने संबंधी विधेयक’ २०७६ माघ २८ को राष्ट्रपति द्वारा प्रमाणीकरण प्राप्त हुआ। इसी तरह ‘नेपाल पुलिस और प्रदेश पुलिस के कार्य संचालन, पर्यवेक्षण एवं समन्वय संबंधी व्यवस्था करने वाला विधेयक’ भी २०७६ माघ २८ को राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदित किया गया था। पुलिस समायोजन अधिनियम बनने के साथ आवश्यक संगठन तथा प्रबंधन सर्वेक्षण (ओएण्डएम) को भी मंत्रिपरिषद ने स्वीकृति दे दी है।
२०७७ मंसिर में मंत्रिपरिषद ने स्वीकृत संगठन और प्रबंधन सर्वेक्षण के अनुसार, केंद्रीय पुलिस में २४,८१६ और सात प्रदेशों में ५४,०७२ जनशक्ति समायोजित करने का प्रावधान है। पर अभी तक यह कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है। सुरक्षा निकाय किस स्तर पर रहेगा, इस विषय पर पूर्व संसद में भी कई बार चर्चा हुई है। समायोजन की जटिलता को दूर करने के प्रयास में तत्कालीन सरकार ने १५ माघ २०८१ को नेपाल पुलिस विधेयक प्रतिनिधि सभा में प्रस्तुत किया था। गृह मंत्री रमेश लेखक द्वारा लाए गए इस विधेयक को संसद ने १६ माघ २०८१ को प्रथम दर्जा दिया और ५ फागुन २०८१ को सामान्य चर्चा पूरी हुई।
चर्चा में सांसदों ने संविधान क्रियान्वयन और पुलिस समायोजन के बाद आने वाली सुरक्षा समन्वय की चुनौतियों को उठाया था। पर यह विधेयक समय पर आगे नहीं बढ़ सका और अंततः ११ फागुन २०८१ को राज्य व्यवस्था तथा सुशासन समिति में चर्चा के लिए भेजा गया। संसदीय समिति द्वारा कुछ सीमित चर्चा के बाद यह विधेयक अधिनियम में परिवर्तित नहीं हो सका। २१ फागुन के चुनाव के बाद प्रतिनिधि सभा में इस विषय को पुनः आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। गृह मंत्रालय नेपाल पुलिस विधेयक समेत चार विधेयकों पर काम कर रहा है, जिनमें सशस्त्र पुलिस बल विधेयक, प्रवासन संबंधी विधेयक और गुप्तचर संबंधी विधेयक भी शामिल हैं। संघीय पुलिस अधिनियम लागू होने के बाद पुलिस समायोजन को बढ़ावा मिलेगा और वर्तमान में कानूनी रूप से भी समायोजन करने में कोई बाधा नहीं है।