
राष्ट्रिय खेलकुद परिषद ने बक्सिंग विवादों की जांच के लिए उपसमिति का गठन किया
राष्ट्रिय खेलकुद परिषद ने बक्सिंग क्षेत्र में उत्पन्न विवादों को सुलझाने के लिए भोजानन्द राई की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच उपसमिति गठित की है। उपसमिति को बक्सिंग महासंघ के पदाधिकारियों के खिलाफ दायर शिकायतों और प्रस्तुतियों की जांच कर सात दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच उपसमिति नियम, कानून और संघ के विधान के आधार पर अध्ययन करेगी और आवश्यक दस्तावेज़ों तथा संबंधित पक्षों के साथ समन्वय का प्रबंध करेगी। ८ वैशाख, काठमांडू।
राष्ट्रिय खेलकुद परिषद (राखेप) ने नेपाल बक्सिंग महासंघ सहित बक्सिंग क्षेत्र में उत्पन्न विभिन्न विवाद और समस्याओं के समाधान के लिए जांच उपसमिति का गठन किया है। राखेप की कार्यकारी समिति की मंगलवार को हुई बैठक में राखेप प्रशासन विभाग के प्रमुख भोजानन्द राई की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच उपसमिति गठित करने का निर्णय लिया गया। इस उपसमिति के अन्य दो सदस्य राखेप कानूनी शाखा प्रमुख नारायणराज अर्याल और राखेप खेलकूद विकास विभाग के प्रशासनिक अधिकारी सानुराज केसी हैं।
बक्सिंग से जुड़े विभिन्न विवादों की शिकायतों और प्रस्तुतियों की समीक्षा, संबंधित पक्षों से चर्चा और आवश्यक जांच कर उपयुक्त सुझाव सहित रिपोर्ट सात कार्यदिवसों के भीतर प्रस्तुत करने की समय सीमा निर्धारित की गई है। “नेपाल बक्सिंग महासंघ के पदाधिकारियों द्वारा महासंघ के सचिव पुष्करराज पन्त को नियमों के विरुद्ध बर्खास्त करने, परिषद के पूर्व नेतृत्व द्वारा अनियमितताओं को छुपाने हेतु वाहन खरीद कर उपलब्ध कराने संबंधी शिकायत, पुष्करराज पन्त द्वारा २०८२ पुस ८ को दायर शिकायत जिसमें दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है, नेपाल बक्सिंग महासंघ के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष किरण बहादुर श्रेष्ठ सहित अन्य पदाधिकारियों द्वारा राष्ट्रीय स्वाभिमान को आघात पहुंचाने संबंधी अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग में दाखिल शिकायत, और राखेप के बक्सिंग मुख्य प्रशिक्षक प्रकाश थापा मगर द्वारा सहायक प्रशिक्षक दीपक महर्जन के खिलाड़ियों के सामने अभद्र व्यवहार और अपशब्दों के प्रयोग की शिकायत पर परिषद में दो बार कार्रवाई हेतु प्रस्तुत किए गए आवेदन जिनके विषय में जांच और रिपोर्ट तैयार करने का प्रभारी बनाया गया है,” राखेप ने जानकारी दी है।
उक्त उपसमिति को शिकायत से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों का अध्ययन करने, संबंधित पक्षों के समन्वय से रिपोर्ट तैयार करने, विवरण तैयार करते समय प्रचलित नियम, कानून और संघ के विधान के आधार पर कार्य करने, निर्धारित समय में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने और अपनी बैठक की कार्यप्रणाली स्वयं निर्धारित करने का अधिकार तथा जांच के दायरे का निर्धारण करने का प्रावधान दिया गया है।