
चीन के वैज्ञानिकों ने नासा के अलपत्र पड़े ‘अंतरिक्ष मकड़ी’ परियोजना का सपना साकार किया
चीन के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में सौर ऊर्जा स्टेशन और विशाल एंटीना बनाने के लिए थ्रीडी-प्रिंटेड कनेक्टरयुक्त मज़बूत ट्यूब तकनीक विकसित की है। यह तकनीक अंतरिक्ष में पार्ट्स को जोड़ने और सैकड़ों मीटर लंबी संरचनाएं बनाने में सक्षम होगी, जो अमेरिकी नासा की ‘स्पाइडरफैब’ परियोजना के सपने को पुनः जीवित करेगी। स्यानयांग इंस्टीट्यूट ने छोटे एंटीना संरचना का सफल प्रयोगशाला प्रदर्शन कर लिया है और इसे आने वाली पीढ़ी के अंतरिक्ष सिस्टम के लिए आधारभूत तकनीक माना जा रहा है। १० वैशाख, काठमांडू।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कई वर्ष पहले शुरू की गई ‘स्पाइडरफैब’ परियोजना को अब चीन के वैज्ञानिकों की सक्रियता के कारण चर्चा में ला दिया है। इस परियोजना में मकड़ी जैसे दिखने वाले रोबोट द्वारा अंतरिक्ष में ही सौर ऊर्जा स्टेशन और विशाल एंटीना बनाने की कल्पना की गई थी। नासा का यह सपना अब तक पूरे अंतरिक्ष तक नहीं पहुंच पाया, लेकिन चीन के उत्तरी हिस्से में स्थित स्यानयांग इंस्टीट्यूट ऑफ ऑटोमेशन के वैज्ञानिकों ने इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए आवश्यक मुख्य तकनीकों को विकसित करने का दावा किया है। हाल ही में ‘स्पेस: साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, चीनी शोध टीम ने कार्बन फाइबर कंपोजिट से मजबूत और खोखले ट्यूब तैयार कर उन्हें थ्रीडी-प्रिंटेड कनेक्टर्स के माध्यम से जोड़ने की तकनीक विकसित की है।
इस प्रक्रिया में लेजर का उपयोग करके ट्यूब्स और जोड़ों को बोल्ट या गोंद के बिना ही मजबूती से जोड़ा जाता है। यह तकनीक अंतरिक्ष में बहुत हल्की लेकिन मजबूत संरचनाएं निर्माण करने में सक्षम होगी। वर्तमान अंतरिक्ष तकनीक में सबसे बड़ी चुनौती रॉकेट के सीमित आकार और प्रक्षेपण के दौरान लगने वाले तीव्र बल हैं। पृथ्वी पर बनी बड़ी संरचनाओं को रॉकेट में फिट करना कठिन होता है और प्रक्षेपण के दबाव से नाजुक उपकरण खराब हो सकते हैं। लेकिन चीन के वैज्ञानिकों की नई तकनीक अंतरिक्ष में ही पार्ट्स को सीधे बनाकर, जोड़कर और स्थापित करके, सैकड़ों मीटर लंबी संरचनाओं का सहज निर्माण संभव बनाएगी। स्यानयांग इंस्टीट्यूट, जो 2022 से अमेरिकी प्रतिबंध सूची में है, ने इस तकनीक को आने वाले दौर के अंतरिक्ष प्रणालियों के लिए आधारभूत तकनीक बताया है। प्रयोगशाला में छोटे एंटीना संरचनाओं का निर्माण कर इस अवधारणा का सफल प्रदर्शन भी कर दिया गया है। यदि यह तकनीक पूर्णतया क्रियान्वित हो जाती है, तो यह अंतरिक्ष अन्वेषण, संचार और सौर ऊर्जा संग्रहण के लिए विशाल संरचनाओं के निर्माण में विश्वव्यापी प्रतिस्पर्धा में एक नया आयाम जोड़ने वाली है।