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लेखा परीक्षण में समस्याएं और न्यूनतम रिटर्न: सार्वजनिक संस्थानों के प्रबंधन में चुनौती

अर्थ मंत्रालय ने सार्वजनिक संस्थानों में सरकार के निवेश में लगातार इजाफा के बावजूद अपेक्षित रिटर्न न मिलने की स्थिति का एक विवरण जारी किया है। फागुन २०८२ तक सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाले २० और अधिकांश स्वामित्व वाले २५ सहित कुल ४५ सार्वजनिक संस्थान संचालित हो रहे हैं। आर्थिक वर्ष २०८०/८१ में कुल शेयर निवेश के मुकाबले मात्र २.४ प्रतिशत अर्थात् ८ अरब ८४ करोड़ रुपये लाभांश प्राप्त हुआ है, मंत्रालय ने बताया।

१४ वैशाख, काठमाडौं। अर्थ मंत्रालय द्वारा जारी देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति के अनुसार सार्वजनिक संस्थानों में सरकार का निवेश लगातार बढ़ा है, लेकिन अपेक्षित रिटर्न नहीं मिल सका है। फागुन २०८२ तक के आंकड़ों के अनुसार सरकार के पूर्ण स्वामित्व में २० और अधिकांश स्वामित्व में २५, कुल ४५ सार्वजनिक संस्थान संचालित हैं। इन संस्थानों में से २८ लाभ में हैं, १५ घाटे में और २ संस्थान बंद अवस्था में हैं।

मंत्रालय के अनुसार असार २०८१ तक सरकार का सार्वजनिक संस्थानों में कुल निवेश ७ खरब ३ अरब ९४ करोड़ रुपये पहुंच गया है। इस कुल निवेश में शेयर निवेश ३ खरब ६४ अरब ८६ करोड़ और ऋण निवेश ३ खरब ३९ अरब ८ करोड़ रुपये है। इतने बड़े निवेश के बावजूद निवेश के मुकाबले रिटर्न अत्यन्त कम दिखा है। आर्थिक वर्ष २०८०/८१ में सरकार को कुल शेयर निवेश का केवल २.४ प्रतिशत अर्थात ८ अरब ८४ करोड़ रुपये लाभांश मिला है, जो आर्थिक विवरण में दर्ज है।

मंत्रालय ने कहा है कि संस्थानों की कमजोर वित्तीय स्थिति और सुशासन में दिक्कतें हैं। कई संस्थानों में नियमित लेखा परीक्षण नहीं हो पाने के कारण उनकी वास्तविक हानि और संभावित दायित्व ज्ञात नहीं हो सके हैं। निवेश के मुकाबले कम रिटर्न मिलने की वजह से सार्वजनिक संस्थानों का प्रभावी प्रबंधन कर उचित रिटर्न सुनिश्चित करने की आवश्यकता स्पष्ट हुई है, आर्थिक विवरण में उल्लेख किया गया है।

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