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पूर्वभीआईपीहरूले विदेशमा उपचार गर्दा पाउने सुविधासम्बन्धी व्यवस्था सर्वोच्चद्वारा खारेज

सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व वीआईपी अधिकारियों के विदेश उपचार खर्च की व्यवस्था रद्द की

सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व विशिष्ट व्यक्तियों के विदेश में उपचार के खर्च को राज्य कोष से वहन करने की कानूनी व्यवस्था को रद्द कर दिया है। अदालत ने नागरिक राहत, क्षतिपूर्ति तथा आर्थिक सहायता सम्बन्धी कार्यविधि, २०७३ की धारा १२(१) को निरस्त किया है। अधिवक्ता रादीका चम्लागाई ने इस कार्यविधि को संविधान और कानून से असंगत बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की थी। १४ वैशाख, काठमांडू।

सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य के पूर्व विशिष्ट व्यक्ति (वीआईपी) जब विदेश में उपचार करवाते थे, तब राज्य कोष से उनका खर्च भरने की कानूनी व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। सोमवार को हुई संवैधानिक पीठ ने यह निर्णय लिया कि यह कार्यविधि संविधान और कानून के खिलाफ है। सर्वोच्च न्यायालय के प्रवक्ता अर्जुन कोइराला ने इस निर्णय की जानकारी दी है। हालांकि अदालत ने आदेश का संक्षिप्त विवरण सार्वजनिक नहीं किया है।

राज्य के पूर्व पदाधिकारी उपचार के लिए विदेश जाने और मन्त्रिपरिषद की स्वीकृति से उनके उपचार खर्च को राज्य द्वारा वहन करने की व्यवस्था वर्षों से चली आ रही थी, जबकि स्वदेश में उपचार सम्भव था। २०७५ में जनस्वास्थ्य कानून लागू कर इस तरह के क्रियाकलापों पर रोक लगाई गई, लेकिन एक अन्य कार्यविधि में विशिष्ट पदाधिकारियों को विदेश में उपचार का अधिकार दिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने उस कार्यविधि को रद्द कर दिया है, इसलिए अब विदेश में लगे उपचार खर्च को राज्य कोष से वहन करना गैरकानूनी होगा।

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